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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 350 में से

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पृष्ठ 176

( १७५ )
९. यात्रा रेखा पर वर्ग की उपस्थिति इस बात की सूचक होती है कि वह
जीवन में कई बार यात्राएं करेगा तथा यात्राओं से विशेष धन लाभ लेगा ।
१०. चन्द्र रेखा पर वर्ग की उपस्थिति मानव की सभी प्रकार की उन्नति
में सहायक होती है ।
११. यदि विवाह रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी,
सुन्दर, सुशील तथा शिक्षित होती है । तथा उसे ससुराल से विशेष धन लाभ होता है ।
१२. यदि स्वास्थ्य रेखा पर वर्ग हो तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और
जीवन भर स्वास्थ्य अनुकूल बना रहता है ।
१३. यदि भाग्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय
छोटी अवस्था में ही हो जाता है ।
१४. सूर्य पर्वत पर अथवा सूर्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसके जीवन
में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि की कोई कमी नहीं रहती ।
१५. यदि हृदय रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका गृहस्थ जीवन सुखमय
होता है तथा वह हृदय से परोपकारी एवं दयालु होता है ।
१६. मस्तिष्क रेखा पर वर्ग का चिन्ह इस बात का सूचक है कि ऐसे व्यक्ति
का दिमाग सन्तुलित तथा निरन्तर क्रियाशील है ।
१७. यदि जीवन रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु होता है ।
१८. यदि राहू पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका काफी समय साधु के
रूप में जंगलों में व्यतीत होता है ।
वस्तुतः वर्ग का चिन्ह हथेली में कहीं पर भी हो वह पूर्णतः शुभ माना
जाता है ।
७. जाल :
खड़ी रेखाओं पर आड़ी रेखाएं होने से एक प्रकार का जाल-सा
बन जाता है। यह व्यक्ति की हथेलियों में सभी स्थानों पर
देखने को मिल जाता है। इन स्थानों पर पड़े इन जालों का
फलादेश निम्न प्रकार से है :
१. यदि गुरु क्षेत्र पर जाल चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति
क्रूर, निर्दयी, स्वार्थी, तथा घमण्डी होता है ।
२. यदि शनि पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा
व्यक्ति आलसी होता है तथा समाज में कंजूस होने की वजह
से बदनामी सहन करनी पड़ती है ।
३. यदि यह रेखा जाल सूर्य पर्वत पर हो तो समाज
में बार-बार निन्दा का पात्र बनना पड़ता है ।
जाल