रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
असली कोकशास्त्र ४२५
७—तालीशपत्र, कूठ और तगर, इनका उबटन लगाने से
शरीर की अपूर्व शोभा बढ़ जाती है ।
८—नागकेशर का चूर्ण, कमलपत्र, शहद, इनको शुद्ध घी में
मिलाकर खाने से कै और दस्त होकर शरीर की कान्ति बढ़ती है।
९—तमालपत्र, नागकेसर, तगर, कमलपत्र और तालीसपत्र,
इन सबको पीसकर शरीर पर मलने से शरीर का सौन्दर्य
बढ़ता है ।
१०—प्रियंगू क फूल, लोध, मँजीठ, कूठ, बढ़ के अंकुर,
लालचन्दन तथा मसूर इन सबका उबटन बनाकर शरीर पर
मलने से कान्ति और तेज बढ़ता है और शरीर गोरा होता है ।
११—जायफल को चन्दन की तरह दूध में घिसकर यदि मुँह
पर लगाया जाय तो मुँह के मुहासे नाश होकर चेहरे पर चमक
आती है ।
१२—सुगन्धबाला, केसर, लोध, अगर, खस, चन्दन, इनका
उबटन बनाकर बदन पर मलने से रूप-राशि खिल उठती है ।
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४२६ असली कोकशास्त्र
दुर्गन्धि नाशक योग
१—शंखचूर्ण, करौंदा के बीज, अनार की छाल, इमली, आम
की छाल, इन सब औषधियों को पीसकर उबटन करने से सब
प्रकार की शारीरिक दुर्गन्ध दूर हो जाती है ।
२—लोध की छाल, सफेद् चन्दन, नेत्रवाला, कुमकुम और
तगर इनको समान भाग में पीसकर सब शरीर पर लेपन करने से
शरीर की दुर्गन्धि दूर होती है ।
३—खस, कमलपत्र, लोध की छाल, सिरीश, इनका उबटन
लगाने से शारीरिक पसीने की बू दूर हो जाती है ।
४—कुमकुम, जायफल, कूठ, तुलसी, और जावित्री, इन सबको
पीसकर मुँह में रखकर चूसने से मुख की दुर्गन्धि नष्ट होती है ।
५—यदि केवल मातुङ्ग की छाल ही मुख में रखकर चूसी
जाय तो वह मुख की दुर्गन्ध दूर करती हुई अधोवायु की भी
दुर्गन्ध को दूर करती है ।
६—भटकटैया सफेद् फल वाली, सफेद् दूब, श्वेतापराजिता
का पुष्प, इन सबको पान में रखकर खाने से मुख की दुर्गन्धि दूर
होती है ।
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असली कोकशास्त्र ४२६
गन्धक आठ-आठ माशे तथा आठ तोले अफीम मिलाकर इन
सबको एक साथ खरल कर ले । तत्पश्चात् तीन-तीन रत्ती की
गोली बनाकर जो मनुष्य प्रति दिन सोने के समय दूध के साथ
सेवन करता है, उसकी स्तम्भन शक्ति बढ़ जाती है ।
१०—अभ्रक भस्म, स्वर्ण भस्म, लोह भस्म, चाँदी भस्म,
सोनामक्खी की भस्म, शुद्ध पारा, वंशलोचन, तथा भाँग के बीज
का चूर्ण इन सबको आठ-आठ तोले भाँग के काढ़ा के साथ खरल
कर एक-एक माशे की गोली बना ले । प्रति दिन एक गोली दूध
के साथ खाने से स्तम्भन और मैथुन शक्ति बढ़ती है ।
११—मुरा, चिचड़ा का बीज, जावित्री, मरोड़फली, जायफल
काकोली, खरेंटी, क्षीर काकोली, सफेद पान, कंकोल, मुलहठी,
बच, और खस इन सबको बराबर-बराबर लेकर चूर्ण बना ले ।
और नित्य दूध के साथ खाये । इससे वीर्य स्तम्भन होता है ।
१२—पीपल, मिर्च, धतूरा, इन तीनों को पीसकर शहद में
मिला ले । कुछ दिन इनका लेप इन्द्रिय पर करने से वशीकरण
हो जाता है ।
१३—सफेद कमल, नील कमल, इन दोनों का केसर शहद
और मिश्री में मिलाकर इन्द्रिय पर लेप करे तो इन्द्रिय स्तम्भन
होता है । वह मनुष्य प्रचण्ड रतिवाला हो जाता है ।
१४—सुहागा, कूठ, मैनसिल, नोनिया की पत्ती का रस, और