कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
( ७३० ) बघेलवंशवर्णन ।
जोलौं दीनबंधु दृग देखो दाया दीह दास तोलौं युगलेश विनय मोरिं यश साखिये ॥
राज्यश्रीअखंड सुखयुत संयुत सुधर्मसाज भूप रघुराज महाराज आप राखिये ॥ ३ ॥
सोरठा-ग्रंथ भयो जब पूर, उचित मंगलाचरणपर ॥
श्रीहरि गुरु सुख पूर, चरण कमल वंदन करूं ॥ ५४ ॥
कवित्त ।
निरत जासु नाम हरिदास हरिरूप सीय राम सेव हीमें जिन्हें जात रैन दिन ॥
कोहू सों न कहै देखि संत निज आश्रमै सादर करत सत्कार आयो छिन छिन॥
कहैं युगलेश मान रजोगुणि वाहननि चढें नहिं कबों या स्वभावरहो सब दिन॥
कहौं हरिरूप पर हरिते सरसरूप लिये द्वै अनूप श्री है येतो रहै तेहि विन॥१॥
दोहा-घरचो सर्प यक को विछी, यक को दुःखित कीन्ह ॥
हरिचरणामृत पाय तहँ, द्रुत निर्विष करिदीन्ह ॥ ८८ ॥
ऐसे चरित अनेक हैं, को कह आनन एक ॥
नेक कृपा लहि नाथ मैं, वरण्यों है सविवेक ॥ ८९ ॥
जो करताहै ग्रंथको, सोउ वरणै निज वंश ॥
युगलदास याते करत, कछु निज मुख परशंस ॥ २९०॥
कवित्त ।
देश गुजरात ते नरेश संग आये यहां पुस्तिबहु तिन्हें कहां लौं गिनाइये ॥
चैनसिंह भे दिवान अति मतिमान खास कलम सुवंश राय तिनकों सुनाइये ॥
लल्लू खास कलम कहायें नाम मंशाराम भूपति अजीत बहु मान्यो सो जनाइये॥
कायत प्रसिद्ध साधु सुमति अगाध तासु वंश गिरिधारी लाल नाम जासु गाइये १
दोहा-महाराज विश्वनाथ तेहि, मान्यों करि अति प्यार ॥
सोय खास कलमहि कियो, लखि तिहि बुद्धि अपार ९१
भोदूलाल दिवान सुजाना । रहेतें अस मन कियें अमाना ॥
यह संकोच पुरुषतें भारी । करौ न हमरौ हुकुम सुखारी ॥
बघेलवंशवर्णन । ( ७३१ )
अस विचारि नरनाथहिं पाहीं । कह्यों सुघर इनही सुख माहीं ॥
इन्हे खास कलमी रघुनाथी । दै राखिये निकट कर साथी ॥
सुनि विश्वनाथ हियेकी जानी । राख्यो अपने ढिग सुखमानी ॥
ग्रंथ अनूपम अमित बनायों । सादर तासों मुदित लिखायो ॥
तेहि सुत युगलदास मम नामा । विश्वनाथ नृप ढिग अभिरामा ॥
रह्यों बालते जे किय ग्रंथा । लिख्यो अहैं जिनमें हरिपंथा ॥
दोहा-महाराज रघुराजके, अब निवसों नित पास ॥
तासु हुकुम लहि ग्रंथ यह, विरच्यों सहित हुलास॥९२॥
नृपचरित्र यह ग्रंथको, कियो नाम अभिराम ॥
बाँचि सुकवि सज्जन सुमति, लहैं सदा सुखधाम॥९३॥
ग्रंथ रामरसिकावली, रच्यो जो नृप रघुराज ॥
तहँ कबीर इतिहास में, यहै ग्रंथहैं भ्राज ॥ ९४ ॥
इति सिद्धिश्रीमहाराजाधिराजश्रीमहाराजा बहादुर श्रीकृष्णचन्द्र कृपापात्राधिकारी
श्रीरघुराजसिंहजूदेवकृते श्रीरामरसिकावल्यां ग्रंथान्तर्गत श्रीयुगलदासकृत
बघेलवंशवर्णनं नाम आगम निर्देश ग्रंथसमाप्तः ॥
सूचना ।
बीज सूक्ष्म कारण जिसे, गावत हैं बुध वेद ।
तेहि जानन को युक्तिसो, बीजक नाम अखेद॥
बीजक लीन्हा हाथमें, पाया धन सोइ शोध ।
ताते बीजक नाम है, भया सबन को बोध ॥
बीजक लीन्हे हाथमें, सूझे नहीं धन धाम ।
मुक्ता धन पाये बिना, बीजक सबै निकाम ॥
याकी टीकानेकहैं, बहु विधि कथ्यो सिद्धान्त।
विश्वनाथ नृप रामरत, जान्यो यह वृत्तान्त ॥
राम प्रत्यय टीका करी, बहु पाण्डित्य तेहि मांहि।
पढ़े विचारे जाहि को, राम भक्ति जन पाहिं ॥
चिन्तामणि अरुकल्पतरु, शब्द जगतके मांहि ।
अपनी अपनी भावना, सबही पावत जाँहि ॥
राम उपासना दृढहुते, रीवाँ नरेश सुभूप ।
अपनी मनकी भावना, वर्णन कीन्ह सुरूप ॥
तेहि ग्रन्थको शुद्ध करि, कहुं २ टिप्पण दीन ।
युगलानन्द मोहि कहत हैं, क्षमियो परम प्रवीन ॥
संदिग्ध ठौर जेते रहे, टिप्पणी करी बनाय ।
बाकी अब कछु होयजो, लीजो संत सजाय ॥
गुरु थल हाता जानिये, शिवहर जन्म स्थान ।
भारत पथिक मोहि कहत हैं, पंथ कबीर न आन ॥
श्रीवेङ्कटेश प्रेसवर, प्रसिद्ध सकल जहान ।
तामें छप्यो या ग्रन्थ है, सबको सुखद समान ॥
इति श्रीकबीर साहब कृत बीजककी पाखण्ड खण्डनी टीका
रसीदपुर (शिवहर) वाले स्वामी युगलानन्द कबीर पंथी
भारत पथिक द्वारा संशोधिता समाप्त हुई ।
क्रयपुस्तकें—(भाषा काव्य.)
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नाम. की. रु. आ.
रामरसायन रामायन-रसिकविहारीकृत ... .... ... .... ४-०
रसिकप्रिया सटीक ... ... ... ... .... ... १-४
रामचंद्रिका सटीक कवि केशवदास प्रणीत ... .... २-०
काव्यनिर्णयभाषा छन्दबद्ध [भिखारीदासकृत] मनहरण छन्दोंमें कठिन
(अलंकार) वर्णन... ... ... ... ... .... १-४
जगद्विनोद [ पद्माकरकृत नायकाभेद ].. .... ... ... ०-६
रसराज [ मतिरामकृत नायकाभेद ] ... ... ... ०-६
ब्रजविलास बड़ा मोटेअक्षरका टिप्पणीसहित ... ... .. ५-०
ब्रजविलास मध्यमअक्षर टिप्पणी सहित विलायती जिल्द ग्लेज .... २-०
तथा रफ़ू कागजका ... .... ... ... ... १-८
ब्रजविलास छोटा अक्षर ग्लेज ... .... ... .... ... १-०
, ” ” रफ़ू... ... ... ... ०-१२
ब्रजचरित्र (श्रीराधाकृष्णजीकी सर्वलीला सुगम दोहा चौबोलोंमें
वर्णित हैं)... ... ... .... ... .... ३-०
प्रेमसागर बड़ा ग्लेज कागजका... ... ... : ... १-८
प्रेमसागर बड़ा रफ़ू .... .... ... ... १-४
भक्तमाला रामरसिकावळी बड़ी रीवाँधिपति महाराज रघुराजसिंहकृत
अत्युत्तम छन्दबद्ध जिसमें चारोंयुगोंके भक्तोंकी भिन्न २ कथा हैं
और यह द्वितीयावृत्ति उत्तर चरित्र समेत अत्युत्तम नई छपी है ४-०
रामस्वयंवर श्रीममहाराजरघुराजसिंहकृत (काव्यदेखनेयोग्य) ... ४-८
रुक्मिणीपारिणय-महाराज श्रीरघुराजसिंहजूदेव प्रणीत ... ... १-८
भक्तमाल नाभाजीकृत सटीक (छन्दबद्ध) ... ... ... १-४
महाभारत भाषा सबलसिंहकृत—तुलसीदासजीके रामायणकी रीतिसे दोहा
चौपाईमें १८ अठारहोंपर्व ... ... ... .... ... ३-८
( २ ) जाहिरात ।
नाम. की. रु. आ.
तथा प्रथम भाग ( ३-आदि, सभा, वनपर्व ) .... ... ... १-०
तथा द्वितीय भाग ( २-विराट, उद्योगपर्व ) ... ... ... १-०
तथा तृतीय भाग ( ८-भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, गदा, सौप्तिक,
ऐषिक, स्त्रीपर्व ) .... ... ... ... ... १-०
तथा चतुर्थ भाग ( ५-शान्ति, अश्वमेध, आश्रमवासिक, कुशल, स्वर्गा-
रोहणवर्णन ) .... ... ... ... .... १-०
विजयमुक्तावली ( महाभारतका सूक्ष्म वृत्तांत छंद बद्ध ) .... १-०
❊ परिहासदर्पण ... ... .... ... ... .... ०-६
अर्जुनगीता भाषा .... ... ... ... ... ... ०-४
शनिकथा कायस्थकी .... ... ... .... ... ... ०-१॥
शनिकथाराघवदासकृत ... ... ... ... ... ... ०-२
शनिकथा बड़ी पं० रामप्रतापजीकृत ... ... ... .... ०-८
रुक्मिणी मंगल बड़ा ( पद्मभक्तकृत मारवाडी भाषा ) .... ... १-४
हनुमानबाहुक पंचमुखी कवच समेत मूल ... ... ... ०-१॥
नासिकेतपुराणभाषा ( स्वर्गनरकका वर्णन ) ... ... ... ०-६
नरसीमेहताका मामेरा बड़ा ... ... ... ... ... ०-५
विस्मिलपरिवारका स्वांग ( इश्कचमन ) ... ... ... ०-८
सूर्यपुराणादि २२५ रत्न अतिउत्तमकागज और जिल्दबंधा ... ०-८
सूर्यपुराणादि २२५ रत्न रफू ... ... ... ... ०-६
ज्ञानमाला .... ... .... ... .... ... ... ०-२
मंगलदीपिका अर्थात् शाखोच्चार... ... ... ... ०-१॥
दंपतिवाक्यविलास-जिसमें सब देशांतरकी यात्रा और धंधेके
सुखको पुरुषने मंडन और स्त्रीने खंडन किया है दोहा
कवित्तोंमें ( सुभाषित ) ... ... ... ... ०-१२
रसरंग ( ज्ञानभक्तिमार्गी अजबरँगीले पद्य कृष्णगढ़
महाराज प्रणीत ) ... ... ... ... ... ०-८
जाहिरात । ( ३ )
नाम. की. रु. आ.
दादूरामोदय संस्कृत—दादूपंथी साधुओंको ... ... ... ०-१०
श्यामकामकैलि ... .... ... ... ... ... ... ०-४
परमेश्वरशतक .... ... ... ... ... .... ०-६
भक्तिप्रबोध ... ... .... ... ... .... ०-२
भावपंचाशिका कविवृंदजीकृत ... .... ... ... ... ०-२
प्रेमशतक ... ... ... ... ... .... ०-४
मदनमुखचपेटिका भाषाटीका .... ... .... ... .... ०-४
प्रेमवाटिका भाषा ( रोचक भजन ) .... ... ... ... ०-२
हनुमत्पताका छन्दबद्ध ( वीररसके रोचककवित्त ) .... .... ०-३
नामप्रताप छन्दबद्ध ( श्रीरामनाम माहात्म्य ) ... ... ... ०-१॥
शृंगारांकुर भाषा—छन्दबद्ध ( रसकाव्य ) ... ... ... ०-२
जगन्नाथशतक—इसमें रघुराजसिंह रीवाँधिपतिके बनायेहुये १००
कवित्त विनयके हैं ... ... .... ... ... ... ०-३
नैषधकाव्य मनहरणछन्दोमें राजा नल
दमयन्तीका सम्पूर्ण उदाहरणों समेत चरित्र .... ... १-०
सुन्दरीतिलक ( शृंगाररसके चुहचुहाते हुए
कवित्त भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्रजी संगृहीत ) ... .... ०-६
विक्रमविलास ( छन्दबद्ध वैतालपचीसी ) .... ... ... ०-८
मसलानामा ( मसलोंके उदाहरणमें शिक्षावर्णन ) .... .... ०-२
काव्यसंग्रह ( प्राचीन रोचक कवित्त सवैया ) ... .... ... ०-८
काव्यरत्नाकर ( एक २ समस्यामें रोचकता
पूर्वक अनेक कवियोंकी चातुरीके कवित्त ) .... .... ... ०-८
आरती संग्रह २९ आरतीका .... ... .... ... .... ०-१॥
हनुमानसाठिका ( हनुमानजीकें ओजवर्द्धक ६० कवित्त ) ... ०-१॥
भाषाभूषण ( नायकाभेद मधुर छंदबद्ध ) .... ... ... ०-२
अनुरागरसभाषा ( नारायणस्वामिकृत ) पद्योंमें.... ... ... ०-३
( ४ ) जाहिरात ।
नाम. की. रु. आ.-
प्रेमपुष्पमंजरी ( अच्छे २ भजन व पंजाबदेशके भी पद हैं.... ०-२
कृष्णचरितावली ( कृष्णकी छोटी २ लीला ) ... ... ... ०-४
प्रेमपचासा ( चित्रकाव्य ) ... ... .... ... .... ०-३
सुदामाचरित्र अत्युत्तम छंदबद्ध ... .... ... ... ... ०-३
होलीचौताल संग्रह ... ... .... ... ... ... ०-४
सुदामाकी बारहखड़ी ... ... .... .... ... ०-१
द्रौपदीकी बारहमासी ... ... ... ... ... ०-१
दुर्गाचालीसी ... ... ... ... ... .... ०-१
माता पिता पूजनविधि .... ... .... .... ... ०-१
बारहमासी संग्रह ... ... .... .... ... ०-१॥
हरदेवकी बारहखड़ी कलियुगका चरित्र ... ... ... ... ०-२
छन्दरत्नमाला [ पिंगल ] ... ... ... ... ०-२
गोपीवियोगकी बारहखड़ी [ लालाशालिग्रामकृत दत्तलालकी बारहखडी
सहित ] ... .... ... ... ... .... ०-२
नशाखण्डनचालीसी ४० कवित्तोंमें सब नशोंका खण्डन... ... ०-२
मिलापदर्पण ( मेलमिलाप शिक्षा ) ... ... ... ०-२
श्राद्धदर्पण ( श्राद्धमण्डन ) ... ... ... ... ०-२
ब्रह्मज्ञानदर्पण ... ... ... ... ... ०-२
पंजाबपंकजपराग [ महन्त रघुवीरदासकृत ] ... ... ... ०-४
प्रेमपुष्पलता ( उत्तमभजन ) .... ... ... ... .... ०-८
कबीरउपासनापद्धति- ( साधारणतःसर्वसाधारणको और विशेषतः कबीर
पंथियोंको सदाचार बतानेवाली अद्वितीय पुस्तक ) ... ०-१०
संपूर्ण पुस्तकोंका " बड़ा सूचीपत्र " अलग है मँगालीजिये.
पत्ता-खेमराज श्रीकृष्णदास,
“ श्रीवेङ्कटेश्वर ” ( स्टीम् ) प्रेस-बंबई.