कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबघेलवंशवर्णन । ( ७३१ )
अस विचारि नरनाथहिं पाहीं । कह्यों सुघर इनही सुख माहीं ॥
इन्हे खास कलमी रघुनाथी । दै राखिये निकट कर साथी ॥
सुनि विश्वनाथ हियेकी जानी । राख्यो अपने ढिग सुखमानी ॥
ग्रंथ अनूपम अमित बनायों । सादर तासों मुदित लिखायो ॥
तेहि सुत युगलदास मम नामा । विश्वनाथ नृप ढिग अभिरामा ॥
रह्यों बालते जे किय ग्रंथा । लिख्यो अहैं जिनमें हरिपंथा ॥
दोहा-महाराज रघुराजके, अब निवसों नित पास ॥
तासु हुकुम लहि ग्रंथ यह, विरच्यों सहित हुलास॥९२॥
नृपचरित्र यह ग्रंथको, कियो नाम अभिराम ॥
बाँचि सुकवि सज्जन सुमति, लहैं सदा सुखधाम॥९३॥
ग्रंथ रामरसिकावली, रच्यो जो नृप रघुराज ॥
तहँ कबीर इतिहास में, यहै ग्रंथहैं भ्राज ॥ ९४ ॥
इति सिद्धिश्रीमहाराजाधिराजश्रीमहाराजा बहादुर श्रीकृष्णचन्द्र कृपापात्राधिकारी
श्रीरघुराजसिंहजूदेवकृते श्रीरामरसिकावल्यां ग्रंथान्तर्गत श्रीयुगलदासकृत
बघेलवंशवर्णनं नाम आगम निर्देश ग्रंथसमाप्तः ॥