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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 760

( ७३० ) बघेलवंशवर्णन ।
जोलौं दीनबंधु दृग देखो दाया दीह दास तोलौं युगलेश विनय मोरिं यश साखिये ॥
राज्यश्रीअखंड सुखयुत संयुत सुधर्मसाज भूप रघुराज महाराज आप राखिये ॥ ३ ॥
सोरठा-ग्रंथ भयो जब पूर, उचित मंगलाचरणपर ॥
श्रीहरि गुरु सुख पूर, चरण कमल वंदन करूं ॥ ५४ ॥
कवित्त ।
निरत जासु नाम हरिदास हरिरूप सीय राम सेव हीमें जिन्हें जात रैन दिन ॥
कोहू सों न कहै देखि संत निज आश्रमै सादर करत सत्कार आयो छिन छिन॥
कहैं युगलेश मान रजोगुणि वाहननि चढें नहिं कबों या स्वभावरहो सब दिन॥
कहौं हरिरूप पर हरिते सरसरूप लिये द्वै अनूप श्री है येतो रहै तेहि विन॥१॥
दोहा-घरचो सर्प यक को विछी, यक को दुःखित कीन्ह ॥
हरिचरणामृत पाय तहँ, द्रुत निर्विष करिदीन्ह ॥ ८८ ॥
ऐसे चरित अनेक हैं, को कह आनन एक ॥
नेक कृपा लहि नाथ मैं, वरण्यों है सविवेक ॥ ८९ ॥
जो करताहै ग्रंथको, सोउ वरणै निज वंश ॥
युगलदास याते करत, कछु निज मुख परशंस ॥ २९०॥
कवित्त ।
देश गुजरात ते नरेश संग आये यहां पुस्तिबहु तिन्हें कहां लौं गिनाइये ॥
चैनसिंह भे दिवान अति मतिमान खास कलम सुवंश राय तिनकों सुनाइये ॥
लल्लू खास कलम कहायें नाम मंशाराम भूपति अजीत बहु मान्यो सो जनाइये॥
कायत प्रसिद्ध साधु सुमति अगाध तासु वंश गिरिधारी लाल नाम जासु गाइये १
दोहा-महाराज विश्वनाथ तेहि, मान्यों करि अति प्यार ॥
सोय खास कलमहि कियो, लखि तिहि बुद्धि अपार ९१
भोदूलाल दिवान सुजाना । रहेतें अस मन कियें अमाना ॥
यह संकोच पुरुषतें भारी । करौ न हमरौ हुकुम सुखारी ॥