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कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 762, कुल 766 में से

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सूचना ।
बीज सूक्ष्म कारण जिसे, गावत हैं बुध वेद ।
तेहि जानन को युक्तिसो, बीजक नाम अखेद॥
बीजक लीन्हा हाथमें, पाया धन सोइ शोध ।
ताते बीजक नाम है, भया सबन को बोध ॥
बीजक लीन्हे हाथमें, सूझे नहीं धन धाम ।
मुक्ता धन पाये बिना, बीजक सबै निकाम ॥
याकी टीकानेकहैं, बहु विधि कथ्यो सिद्धान्त।
विश्वनाथ नृप रामरत, जान्यो यह वृत्तान्त ॥
राम प्रत्यय टीका करी, बहु पाण्डित्य तेहि मांहि।
पढ़े विचारे जाहि को, राम भक्ति जन पाहिं ॥
चिन्तामणि अरुकल्पतरु, शब्द जगतके मांहि ।
अपनी अपनी भावना, सबही पावत जाँहि ॥
राम उपासना दृढहुते, रीवाँ नरेश सुभूप ।
अपनी मनकी भावना, वर्णन कीन्ह सुरूप ॥
तेहि ग्रन्थको शुद्ध करि, कहुं २ टिप्पण दीन ।
युगलानन्द मोहि कहत हैं, क्षमियो परम प्रवीन ॥
संदिग्ध ठौर जेते रहे, टिप्पणी करी बनाय ।
बाकी अब कछु होयजो, लीजो संत सजाय ॥
गुरु थल हाता जानिये, शिवहर जन्म स्थान ।
भारत पथिक मोहि कहत हैं, पंथ कबीर न आन ॥
श्रीवेङ्कटेश प्रेसवर, प्रसिद्ध सकल जहान ।
तामें छप्यो या ग्रन्थ है, सबको सुखद समान ॥
इति श्रीकबीर साहब कृत बीजककी पाखण्ड खण्डनी टीका
रसीदपुर (शिवहर) वाले स्वामी युगलानन्द कबीर पंथी
भारत पथिक द्वारा संशोधिता समाप्त हुई ।

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