रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची
श्री सद्गुरु वे नमः
रोगों की पहचान
सद्गुरु नाम की औषधि, खरी नीयत से खाय।
अंग रोग व्यापै नहीं, महान् रोग मिट जाय ॥
—सत्तगुरु मधु परमहंस जी
साहिब
बन्दगी
सन्त आश्रम रंजड़ी, पोस्ट राया, ज़िला जम्मू
रोगों की पहचान
— सतगुरु मधुपरमहंस जी
प्रचार अधिकारी
— राम रतन, जम्मू
© SANT ASHRAM RANJARI (JAMMU )
ALL RIGHTS RESERVED
| First Edition | — | 2007 |
|---|---|---|
| Copies | — | 5000 |
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*santashram@ sahib-bandgi.org
*sadgurusahib@ sahib-bandgi.org
Editor
Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri
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Distt. - Jammu
Ph. (01923) 242695, 242602
Mudrak: Sartaj Printing Press
विषय सूची
पृष्ठ संख्या
| 1. रोगों के मुख्य कारण | 9 |
|---|---|
| 2. शरीर में दोषयुक्त पदार्थ का आगमण | 10 |
| 3. स्वस्थ शरीर की पहचान | 11 |
| 4. अस्वस्थ शरीर की पहचान | 12 |
| 5. रोगों के सामान्य चिह्न | 13 |
| 6. रोगों को दबाएँ मत | 14 |
| 7. दूषित पदार्थ के जमाव का स्थान और रोगों की संभावना | 15 |
| 8. कुछ खतरनाक रोगों के चिह्न | 20 |
| □ क्षय रोगों के चिह्न | 20 |
| □ ज़िगर की खराबी के चिह्न | 21 |
| □ कैंसर के चिह्न | 21 |
| □ गुर्दे की बीमारी के चिह्न | 21 |
| □ बाँझपन के चिह्न | 22 |
| □ गठिया की बीमारी के चिह्न | 22 |
| □ अँधेपन की बीमारी के चिह्न | 22 |
| □ हृदय की बीमारी के चिह्न | 22 |
| □ पागलपन की बीमारी के चिह्न | 23 |
| □ कुछ रोग के चिह्न | 23 |
| □ गले के ट्यूमर के चिह्न | 24 |
| □ दाँतों के रोग के चिह्न | 24 |
| □ बवासीर के चिह्न | 24 |
| 9. रोगों के उपचार में जल-चिकित्सा का महत्व | 25 |
| □ मेहन स्नान (जन्म के बाद बच्चे का पहला स्नान) | 25 |
| □ कटि स्नान (जन्म के बाद बच्चे का दूसरा स्नान) | 26 |
| □ पूर्ण टब का गर्म स्नान | 27 |
| □ भाप स्नान | 28 |
| □ नेत्र स्नान | 29 |
| □ नासिका स्नान | 29 |
| □ पैर का गर्म स्नान | 29 |
| □ स्थानीय भाप स्नान | 30 |
| □ गर्म-ठंडा पूर्ण स्नान | 30 |
| □ गर्म सेंक | 31 |
| □ धूप स्नान | 31 |
3
| 0 | साधारण स्नान | 32 |
|---|
- | बीमारियों के बच्चे रहने के सरल और बेहतरीन उपाय | 33
- | रोगों से बच्चे रहने के पाँच सर्वोत्तम फार्मूले | 37
- | आयुर्वेद का महत्व | 41
- | रोगों के उपचार में आयुर्वेद के फार्मूले | 45
0 | कुछ रोग होने पर | 45
0 | क्षय रोग होने पर | 46
0 | हैजा होने पर | 46
0 | जुकाम होने पर | 46
0 | आँखों से दिखना कम हो जाने पर | 47
0 | आँखें दुखने पर | 48
0 | आँख आने पर | 49
0 | पोथकी (रोहें) रोग होने पर | 49
0 | अण्डकोषों में दर्द होने पर | 49
0 | पीलिया रोग होने पर | 50
0 | लू लगने पर | 51
0 | निमोनिया होने पर | 51
0 | आँव आने पर | 51
0 | बवासीर होने पर | 52
0 | अजीर्ण (बदहजमी) होने पर | 53
0 | मूत्र न आने पर | 53
0 | रुक-रुक कर पेशाब आने पर | 54
0 | बार-बार पेशाब आने पर | 54
0 | पेट में दर्द होने पर | 54
0 | पेट में सूजन होने पर | 54
0 | नाभि स्थान में दर्द होने पर | 54
0 | पेट में कीड़े होने पर | 54
0 | मंदाग्रि होने पर | 55
0 | पेट में गैस होने पर | 55
0 | गुर्दे की पथरी होने पर | 55
0 | माथे में दर्द होने पर | 57
0 | अल्मपित्त होने पर | 57
0 | पायरिया होने पर | 57
0 | खाँसी होने पर | 58
0 | दमा होने पर | 58
0 | ग्रहणी रोग होने पर | 59
4
| □ | प्रसव न होने पर | 60 |
|---|---|---|
| □ | प्रदर (लकोरिया) होने पर | 60 |
| □ | रक्त प्रदर होने पर | 60 |
| □ | श्वेत प्रदर होने पर | 61 |
| □ | बंध्यत्व होने पर | 61 |
| □ | गर्भ धारण के समय होने वाली पीड़ा पर | 61 |
| □ | कान के बहने पर | 62 |
| □ | कान में दर्द होने पर | 62 |
| □ | बहरापन होने पर | 62 |
| □ | गला बैठने पर | 63 |
| □ | दाँत दर्द होने पर | 63 |
| □ | दाँतों में बदबू आने पर | 64 |
| □ | दाँतों में कीड़े होने पर | 64 |
| □ | मसूड़ों में सूजन होने पर | 64 |
| □ | लीवर में वृद्धि होने पर | 64 |
| □ | पिती की बीमारी होने पर | 64 |
| □ | दस्त होने पर | 65 |
| □ | प्लीहा वृद्धि होने पर | 65 |
| □ | सिर दर्द होने पर | 65 |
| □ | आधे सिर में दर्द होने पर | 65 |
| □ | लकवा होने पर | 65 |
| □ | बच्चों के दाँत निकलते समय होने वाली पीड़ा | 66 |
| □ | बिस्तर पर मूत्र करने पर | 66 |
| □ | टॉसिल होने पर | 66 |
| □ | हिचकियाँ आने पर | 66 |
| □ | काली खाँसी होने पर | 66 |
| □ | मुँह में छाले होने पर | 67 |
| □ | चेचक होने पर | 67 |
| □ | उल्टियाँ होने पर | 67 |
| □ | खून बहने पर | 67 |
| □ | स्वप्रदोष होने पर | 67 |
| □ | नपुंसकता होने पर | 68 |
| □ | वीर्य की कमी होने पर | 68 |
| □ | दाद होने पर | 68 |
| □ | सुजाक होने पर | 68 |
| □ | मुँहासे होने पर | 69 |
| □ | खाज-खुजली होने पर | 70 |
5
| शरीर से दुर्गंध आने पर | 70 |
|---|---|
| जोड़ों में दर्द होने पर | 70 |
| गठिया होने पर | 70 |
| गंजापन होने पर | 71 |
| बाल झड़ने पर | 71 |
| घाव हो जाने पर | 71 |
| घाव में कीड़े होने पर | 71 |
| बाल सफेद होने पर | 71 |
| प्रमेह होने पर | 72 |
| मधुमेह रोग होने पर | 72 |
| बदन में दर्द होने पर | 74 |
| विषैले कीड़ों के काटने पर | 74 |
| सामान्य ज्वर | 75 |
| कफ का बुखार होने पर | 75 |
| पित्त से बुखार होने पर | 75 |
| वायु से बुखार होने पर | 76 |
| कैंसर होने पर | 76 |
| आग से जल जाने पर | 76 |
| उच्च रक्तचाप होने पर | 77 |
| निम्न रक्तचाप होने पर | 77 |
| 14. रोगों के निदान में कुछ लाजवाब फार्मूले | 78 |
|---|---|
| गुर्द की पीड़ा होने पर | 78 |
| बहरापन होने पर | 78 |
| क्षय रोग होने पर | 78 |
| 15. भोजन द्वारा रोगों का निदान | 80 |
|---|---|
| बादाम से रोगों का निदान | 80 |
| नीबू से रोगों का निदान | 81 |
| तुलसी से रोगों का निदान | 83 |
| सौंफ से रोगों का निदान | 84 |
| गन्ने से रोगों का निदान | 85 |
| शहद से रोगों का निदान | 85 |
| लहसुन से रोगों का निदान | 87 |
| अदरक से रोगों का निदान | 88 |
| आँवले से रोगों का निदान | 89 |
| प्याज से रोगों का निदान | 90 |
| सहजन से रोगों का निदान | 91 |
| हींग से रोगों का निदान | 92 |
| टमाटर से रोगों का निदान | 92 |
6
| □ | धनिये से रोगों का निदान | 93 |
|---|---|---|
| □ | नारियल से रोगों का निदान | 94 |
| □ | लौकी से रोगों का निदान | 95 |
| □ | पपीते से रोगों का निदान | 95 |
| □ | सेब द्वारा रोगों का निदान | 96 |
| □ | जामुन द्वारा रोगों का निदान | 96 |
| □ | बथुआ से रोगों का निदान | 97 |
| □ | फालसे से रोगों का निदान | 98 |
| □ | मौसमी से रोगों का निदान | 98 |
| □ | दूध से रोगों का निदान | 99 |
| □ | अनन्नास से रोगों का निदान | 99 |
| □ | करेले से रोगों का निदान | 99 |
| □ | अजवायन से रोगों का निदान | 100 |
| □ | आम से रोगों का निदान | 101 |
| □ | नीम से रोगों का निदान | 102 |
| □ | लौंग से रोगों का निदान | 104 |
| □ | अमरूद से रोगों का निदान | 104 |
| □ | मुनक्के से रोगों का निदान | 105 |
| □ | हल्दी से रोगों का निदान | 105 |
| □ | पोदीने से रोगों का निदान | 106 |
| □ | गाजर से रोगों का निदान | 106 |
| □ | जीरे से रोगों का निदान | 108 |
| □ | अंगूर से रोगों का निदान | 108 |
| □ | चने से रोगों का निदान | 109 |
| □ | अनार से रोगों का निदान | 109 |
| □ | नारंगी से रोगों का निदान | 110 |
| □ | देसी घी से रोगों का निदान | 110 |
| □ | अखरोट से रोगों का निदान | 111 |
| □ | आलू से रोगों का निदान | 112 |
| □ | मूली से रोगों का निदान | 112 |
| □ | मैथी से रोगों का निदान | 113 |
| □ | गेहूँ से रोगों का निदान | 114 |
| □ | छाछ से रोगों का निदान | 114 |
| □ | तिल से रोगों का निदान | 115 |
| □ | काली मिर्च से रोगों का निदान | 115 |
| □ | राई से रोगों का निदान | 116 |
| □ | फिटकरी से रोगों का निदान | 116 |
16. जन्म-मरण का महारोग
7
117
8
साहिब बन्दगी
सतलोक
अमरलोक
बेगमपुरा
सत्य पुरुष
परम पुरुष,
अविनाशी पुरुष
ज्ञानी पुरुष और साहिब
मन के देहा
काल पुरुष
निराकार, निरंजन
अथवा मन की
भूल भलाईया
सहस्रसागर चक्र
अथवा
गिरिजन लोक
पांचवा आकाश
तत्व जो रारंकार
से पैदा होता है, यह
शरीर में मन रूप
में समाया हुआ है।
जो के सब का काल
है सारा संसार इसी
को ही सत्य पुरुष
मान कर खोज
रहा है।
अतल
वितल
सुतल
तलातल
महातल
रसातल
पाताल
- ● → सहज लोक
- ● → वार्णी लोक
- ● → इच्छा लोक
- ● → अंकुर लोक
- ● → मूल सुरति लोक
- ● → सोहेंग लोक
- ● → अचिन्त लोक
आज्ञा चक्र दो दल कमल
यहाँ आत्मा का वास है।
कंठ चक्र-यहाँ आद्य शक्ति का वास है
शिवलोक - यहाँ शिव और पार्वती जी का
वास है, 70 प्रकार की अनहद धुने यहाँ से
उठती है तथा भंवर गुफा में सुनाई देती है।
यही पर अग्नि तत्व है, जो ज्योति निरंजन
(अलख निरंजन) से पैदा होता है।
विष्णु लोक - यहाँ विष्णु जी और लक्ष्मी जी
का वास है। नाभि स्थान पर संपूर्ण शरीर का
संचालन पेट हो करता है। वायु तत्व यहाँ पर
है, जो सोहें शब्द से पैदा होता है।
ब्रह्मलोक - (स्वादिष्टान चक्र) यहाँ ब्रह्मा
और सावत्री जी का वास है। यहाँ से संपूर्ण
मैथुन सृष्टि का संचालन होता है। यहाँ जल
तत्व है, जो ओंकार (ॐ) से पैदा होता है।
मूलाधार चक्र - (गुहा स्थान) यहाँ गणेश
जी का वास है पृथ्वी तत्व यहाँ पर है, जो
सत् शब्द से पैदा होता है।
मानव शरीर में लोकों की रचना