रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
दूषित पदार्थ के जमाव का स्थान और रोगों की संभावना
दूषित पदार्थ के जमाव का स्थान और रोगों की संभावना
शरीर में दोषयुक्त पदार्थ का जमाव शरीर के अगले भाग में हो सकता है, दाएँ या बाएँ भी हो सकता है, पीछे के भाग में भी हो सकता है और पूरे शरीर में भी।
पीछे के भाग में दूषित पदार्थ का जमाव सबसे खतरनाक माना जाता है, दाएँ और बाएँ स्थान में उससे कम और आगे के भाग में दोषयुक्त पदार्थ का जमाव सबसे कम हानिकारक होता है।
शरीर में जमा हुआ दूषित पदार्थ ही शरीर की आकृति को बिगाड़ता है।
सबसे पहले दूषित पदार्थ पेड़ में इकट्ठा होता है। फिर वहाँ से सिर, हाथ या पैरों की ओर बढ़ता जाता है। यह इतनी धीरे-धीरे बढ़ता है कि इंसान को पता नहीं चल पाता है। जब यह गर्दन जैसे तंग मार्ग से निकलता है और वहाँ इसका जमाव स्पष्ट दिखाई पड़ जाता है। वहाँ या तो सूजन होगी या फिर छोटे-छोटे पिण्ड बन जायेंगे, जिन्हें देखकर कोई भी रोग होने की संभावना को समझ सकता है। कभी-कभी यह गले की सूजन भी आसानी से दिखाई नहीं देती है। इसके लिए गर्दन को आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ घुमाकर देखना पड़ता है। सूजन और पिण्डों के अलावा त्वचा का रंग भी बदल जाता है। कभी तो त्वचा बहुत लाल हो जाती है, कभी भूरी, कभी बदरंग, कभी स्लेटी रंग की तो कभी बड़ी पीली।
अब समझने की बात यह है कि दूषित पदार्थ पीछे की ओर, दाएँ-बाएँ में कैसे जाता है! दोष का मुख्य स्थान तो पेट था, पर किसी का दोष पीछे की ओर, किसी का बाईं ओर से तो किसी का सामने की
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ओर से बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सभी आदमी एक तरह नहीं सोते। कुछ दाईं करवट लेकर ज्यादा सोते हैं तो कुछ बाईं करवट लेकर। कुछ सीधा सोते हैं तो कुछ लगातार समय-समय पर करवट बदलते रहते हैं। ऐसे में सोने की स्थिति अनुसार ही उसका दोष उन दिशाओं में बढ़ सकता है। ऐसे में कुछ के शरीर में दूषित द्रव्य मिला-जुला हो जाता है यानी दाएँ और सामने की ओर या फिर बाएँ और पीछे की ओर या फिर कभी पूरे शरीर में भी वो दूषित द्रव्य फैल जाता है।
सामने के भाग में दूषित पदार्थ के जमाव से रंग-रूप में पड़ने वाले अंतर
जब दूषित पदार्थ का जमाव सामने की ओर होता है तो शरीर में निम्नलिखित में से कुछ बदलाव आ सकते हैं—
- ❑ चेहरा भारी-सा लगने लगता है।
- ❑ गर्दन आगे की तरफ से कुछ बड़ी हो जाती है।
- ❑ चेहरे और गर्दन को अलग करने वाली सीमा-रेखा कुछ पीछे चली जाती है।
- ❑ माथे पर चर्बीदार गद्दी बन जाती है।
- ❑ गर्दन पर छोटे-छोटे पिण्ड या बड़ा-सा पिण्ड भी बन जाता है।
- ❑ गाल पर सिकुड़न पड़ जाती है।
- ❑ सिर साइड से गंजा हो जाता है।
- ❑ नीचे का होंठ मोटा हो जाता है।
- ❑ टुट्टी बढ़ जाती है।
- ❑ चमड़ी का रंग बहुत पीला हो जाता है या फिर बहुत लाल हो जाता है।
- ❑ आँखें दब-सी जाती हैं।
- ❑ सिर का ऊपरी हिस्सा बड़ा हो जाता है।
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- ❑ पेट बाहर की ओर निकल आता है।
- ❑ मुँह खुला-सा हो जाता है।
रोग होने की संभावना
- ❑ फेफड़े खराब होने की संभावना रहती है।
- ❑ दाँतों के खराब होने की संभावना रहती है।
- ❑ आँख के रोग होने की संभावना रहती है।
- ❑ सिर में गंज पड़ सकती है।
- ❑ खसरा (एक प्रकार का दानेदार संक्रामक रोग) हो सकता है।
- ❑ ज्वर हो सकता है।
सामने के भाग में यदि दूषित पदार्थ जमा हो जाए तो उसे निकालना मुश्किल नहीं होता है। इससे उत्पन्न रोग दाएँ-बाएँ के जमाव से भयंकर नहीं होते।
दाएँ या बाएँ भाग में दूषित पदार्थ के जमाव से रंग-रूप में आने वाले बदलाव
जब गंदे पदार्थ का जमाव दाएँ या बाएँ भाग में होता है तो शरीर में निम्नलिखित में से कुछ बदलाव आ सकते हैं-
- ❑ सिर दाएँ या बाएँ, जहाँ भी दूषित पदार्थ इकट्ठा होगा, वहाँ की तरफ झुक जाता है।
- ❑ जिस ओर जमाव होगा, उस तरफ की गर्दन फूली हुई और सख्त हो जाती है।
- ❑ दाएँ या बाएँ में से, जहाँ दूषित पदार्थ का जमाव होगा, केवल वहाँ का हिस्सा बड़ा और चौड़ा हो जाने की वजह से पूरा शरीर बेडौल हो जाता है।
- ❑ दूषित पदार्थ के जमाव वाली साइड से चेहरा ज्यादा लंबा हो जाता है।
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- ▯ दूषित पदार्थ के जमाव वाली तरफ से सिर और गर्दन की मध्य की रेखा साफ दिखाई नहीं पड़ती है।
- ▯ एक साइड का पैर भी दूसरे पैर की अपेक्षा अधिक मोटा होगा।
- ▯ पेट भी बाहर की ओर हो सकता है। यह तो रोग का महा चिह्न है। फिर दोष किस तरफ है, यह भी कभी-कभी स्पष्ट दिख पड़ता है।
रोग की संभावना
- ▯ वर्षों तक रहने वाला आधे सिर का दर्द हो जाता है।
- ▯ आँखें खराब हो जाती हैं। मोतियाबिंद हो जाता है।
- ▯ दाँत खराब होकर टूट जाते हैं।
- ▯ ज्वर की संभावना बाईं तरफ के जमाव में ज्यादा रहती है।
पीछे के भाग में गंदे द्रव्य के जमाव से
रंग-रूप में आने वाले बदलाव
जब शरीर में गंदे पदार्थ का जमाव पीछे की ओर हो जाता है तो निम्नलिखित में से कुछ बदलाव स्पष्ट दिख सकते हैं—
- ▯ कंधे गोल हो जाते हैं।
- ▯ माथे पर चर्बी की गद्दी बन जाती है।
- ▯ पीछे की तरफ से सिर बड़ा हो जाता है।
- ▯ चाल डगमगा जाती है।
- ▯ गर्दन दाएँ-बाएँ नहीं घुमाए जा सकती है।
- ▯ गर्दन और सिर के पीछे के भाग की रेखा दिखाई नहीं पड़ती।
- ▯ कभी-कभी गर्दन सिर जितनी बड़ी हो जाती है।
- ▯ कूबड़ निकल जाता है।
रोगों की संभावना
- ▯ याददाश्त कमज़ोर हो सकती है।
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- ❑ दिमागी नुक्स हो सकता है।
- ❑ बच्चों को तेज बुखार हो सकते हैं।
- ❑ पति-पत्नी दोनों के पिछले भाग में यह जमाव होने से संतान उत्पत्ति नहीं हो सकती है।
पीछे के भाग में दूषित पदार्थ का जमाव मनुष्य को विनाश की ओर ले जाता है। यह बड़ा खतरनाक सिद्ध होता है। इससे शीघ्र ही सही विधि से बचने का प्रयास करना चाहिए।
मिश्रित भागों में रोगों के जमाव से होने वाले रोग और बदलाव
अधिकतर गंदे पदार्थ का जमाव मिश्रित भागों में होता है। जैसे पीछे और बाईं या दाईं ओर। कभी आगे और दाईं ओर। फिर जब ये दोनों तरफ के जमाव आपस में मिल जाते हैं तब कई भयंकर रोगों की उत्पत्ति होती है। तो बदलाव इस तरह के हो सकते हैं-
- ❑ मुँह खुला-सा हो जाता है।
- ❑ नाक बहुत पतली या मोटी हो जाती है।
- ❑ सिर बहुत बड़ा हो जाता है।
- ❑ आँखें दब-सी जाती हैं
- ❑ कंधे ढीले हो जाते हैं।
विभिन्न भागों के जमाव में जो बदलाव आते हैं, उनमें से कोई भी बदलाव आ सकता है।
रोगों की संभावना
- ❑ बहरापन आ सकता है।
- ❑ आँख से अंधापन आ सकता है।
- ❑ दाँत खराब होकर टूटने लग सकते हैं।