रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
बीमारियों से बचे रहने के सरल और बेहतरीन उपाय
बीमारियों से बचे रहने के सरल और बेहतरीन उपाय
कसरत
हररोज कम-से-कम आधा घण्टा व्यायाम करें। 27 डण्ड, 27 बैठक निकालें और इतने ही लेटकर सिटअप निकालें। अन्य व्यायाम भी कर सकते हैं। व्यायाम शुरू करने से पहले शरीर पर देसी तेल या घी की मालिश जरूर करें। यह कसरत सुबह-शाम दोनों समय भी कर सकते हैं। शाम के समय करें तो भोजन के कम-से-कम तीन घण्टे बाद ही करें।
प्राणायाम
शरीर में अधिकांश रोग वायु-विकार से ही होते हैं और प्राणायाम इस वायु-विकार को ठीक कर लेता है। इसलिए सुबह-सुबह यह प्राणायाम भी 5 मिनट कर लें।
उपवास
10 दिन में एक बार व्रत रखना चाहिए। यह व्रत कैसे रखना, ध्यान से समझें। पूरा दिन कुछ नहीं खाना; रात को भी नहीं खाना; केवल पानी पी लें। सुबह उठकर एक बड़ा गिलास पानी पीकर शौच जाना। बड़ा सख्त मल बाहर आयेगा; आँतें खुलेंगी। फिर मुँह-हाथ धोकर 4 लीटर पानी पीना। पेट में गैस होगी, इसलिए डकारते जाना, गैस बाहर निकालते जाना और पानी पीते जाना। ऐसे में दिल घबराने लगेगा। चिंता नहीं करना। शुरू-2 में मुश्किल आयेगी, फिर आसान हो जायेगा। इतना
33
34
साहिब बंदगी
पानी पीना कि आँतों के नीचे उतर जाए। अब शौच जाने की इच्छा होगी। पहले तो रोटी के सड़े हुए अंश, काले-काले दाने, छिलके आदि, जो शरीर में फँसे होंगे, पानी के साथ बाहर आयेंगे। ये ही गैस बनाते हैं। फिर पीला-पीला पानी बाहर आयेगा। यदि पानी नीचे से उतरे तो थोड़ा हिलना-डुलना। तो तीसरी बार अब बची-खुची गंदगी के साथ थोड़ा-थोड़ा साफ पानी निकलेगा। चौथी बार नल की तरह साफ पानी बाहर आयेगा। फिर हाथ साफ करके मुँह में अंगुली डालकर बचा पानी भी बाहर निकाल लेना। इसके बाद अब हल्का भोजन करना। जब ऐसा व्रत होगा तो शरीर का वात, पित्त और कफ सब ठीक हो जायेगा, इसलिए रोग नहीं हो पायेंगे।
योगासन
योगासन भी शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह भी आधा घण्टा तक कर सकते हैं।
भोजन में सावधानी बरतें
- □ भोजन करते समय पानी 1-2 घूँट करके ही पिएँ। बहुत अधिक पानी भोजन के साथ मत लें। भोजन के साथ घूँट-2 पानी अमृत समान है, लेकिन बहुत अधिक पानी ठीक नहीं। भोजन के तुरंत बाद पानी मत पिएँ, यह विष समान है।
- □ एक बार भोजन करके दूसरी बार भोजन करने में पाँच-छः घण्टे का अंतर जरूर रखें।
- □ भोजन को चबा-चबाकर तरल बनाकर खाएँ।
- □ हो सके तो भोजन खुली-ताजी-स्वच्छ हवा और धूप में खाएँ। पर यदि कमरे में खाना हो तो ताजी हवा के आने का मार्ग बंद न करें।
- □ भोजन का समय भी निश्चित होना चाहिए। असमय भोजन करना भी हानिकारक हो जाता है। यदि आप शाम को 6 बजे भोजन
रोगों की पहचान
35
करते हैं तो ज्यादा-से-ज्यादा साढ़े छः ही होने दें।
- ❑ सुबह पाचन-शक्ति तेज होती है, फिर यह शाम तक लगातार धीरे-धीरे कम होती जाती है, इसलिए भोजन का अधिक अंश सुबह ही कर लें। शाम को कम भोजन करना चाहिए और रात को सोते समय तो बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।
- ❑ शाम का भोजन सोने से कम-से-कम दो घण्टा पहले होना चाहिए। ऐसे में नींद भी अच्छी आयेगी।
- ❑ चखो पर चरो मत, चरो तो फरो, न फरो तो मरो। किसी ने कितना प्यारा कहा है। भोजन के मामले में अल्प आहारी बनें। यानी कुछ भी खाना हो, बहुत ज्यादा नहीं खाएँ। यदि ज्यादा खा लिया तो फिर सैर कर लो। यदि खुराक बहुत है और सैर भी नहीं करते हो तो जल्दी मरने के लिए तैयार रहो।
पानी में सावधानी बरतें
जल को ऋग्वेद में परम औषधी कहा गया है।
सर्वेषाम् भेषजम् आपुं में॥
अर्थात-जल में सभी प्रकार की औषधियाँ हैं। अथर्ववेद भी कह रहा है-
अप्सवन्तर मुतमप्सु भेषजम्॥
अर्थात-जल में अमृत है, जल में औषधी है। पर हमें जल पीने का समय पता होना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है-
अजीर्णो भेषजं बारि, जीर्णो बारि बलप्रदम्।
भोजने चामृतो बारि, भोजनान्ते विषप्रदम्॥
जब भोजन न किया जाए, केवल जल का ही सेवन किया जाए, तब जल औषधी का काम करता है। जब भोजन पच जाए तब जल बल प्रदान करता है। जब भोजन के बीच में थोड़ा-2 जल पिया जाए, तब जल अमृत समान होता है। पर भोजन करने के ठीक बाद पिया हुआ जल
36
साहिब बन्दगी
विष-तुल्य होता है।
इसलिए जल पीने के मामले में निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए—
- ❑ पानी पीने की मात्रा आयु और मौसम के अनुसार होनी चाहिए।
- ❑ साधारणतया हररोज़ दो लीटर पानी ज़रूर पीना चाहिए।
- ❑ सुबह उठकर एक बड़े गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना मल की सही सफाई के लिए बड़ा लाभाकारी होता है।
- ❑ जल घूँट-2 करके पीना चाहिए। दो-तीन सैकेण्ड मुँह में रखने के बाद ही नीचे उतारना चाहिए।
- ❑ जो जल आप पी रहे हैं, ध्यान रहे कि वो न अधिक गर्म हो और न अधिक ठण्डा। चाहे कितनी भी गर्मी हो, पर अधिक ठण्डे जल का सेवन मत करें। वो हानिकारक ही होता है।
- ❑ भूख लगने पर पानी मत पिएँ, इससे जलोदर रोग हो सकता है।
पानी का पीना निम्नलिखित रोगों में लाभदायक है—
थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में एक बड़ा गिलास ठण्डा पानी पीते रहना पत्थरी, उच्च रक्तचाप, ज्वर, कब्ज आदि रोगों में लाभकारी सिद्ध होता है।
इसके अतिरिक्त यदि नींद न आए तो किसी खुले बर्तन में पानी डालें। 8 मिनट तक दोनों पैर उसमें डाले रखें। सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडे पानी का सहारा ले सकते हैं। फिर यदि पेशाब रुक-रुक कर आता हो तो ठंडे-ठंडे पानी में कपड़ा भिगोकर नाभि स्थान के नीचे रखें। इस तरह पानी के बहुत गुण हैं। पर सावधानी बरतें कि पानी स्वच्छ पिएँ। यदि पानी स्वच्छ न हो तो उबालकर उसे ठंडा करके पिएँ।