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रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
स्वस्थ शरीर की पहचान
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स्वस्थ शरीर की पहचान
यदि हमें एक तंदुरुस्त शरीर की आकृति, रंग-रूप और क्रिया-कलापों का ठीक-ठीक ज्ञान होगा, तभी हम रोगी को पहचान सकते हैं। एक स्वस्थ शरीर की निम्नलिखित पहचान होती है—
- ❑ स्वस्थ शरीर में सभी अंग सुंदर और सुडौल होते हैं।
- ❑ स्वस्थ शरीर में छाती धनुषाकार होती है।
- ❑ मस्तक सपाट होता है; उसमें चर्बी से बनी गद्दी नहीं होती।
- ❑ पैरों को टाँगों से अलग करने वाली रेखा बिलकुल स्पष्ट होती है।
- ❑ पैर पूर्ण विकसित होते हैं।
- ❑ नाक भी सुंदर और सुगठित होती है; न अधिक मोटी होती है, न अधिक पतली।
- ❑ आँखें साफ और बड़ी होती हैं।
- ❑ हाँठ भी सुंदर होते हैं; वे ज्यादा मोटे नहीं होते।
- ❑ दुड्डी भी सुंदर और गोल होती है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में मल-विसर्जन आसानी से होता है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में भोजन भी आसानी से पच जाता है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में भूख अच्छी लगती है और खाने के बाद भारीपन नहीं लगता।
- ❑ स्वस्थ शरीर में अधिक परिश्रम करने के बाद सुख की अनुभूति होती है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में नींद भी गहरी आती है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में नाक के नीचे की सीमा रेखा साफ-साफ दिखाई देती है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में तेज झलकता है।
- ❑ स्वस्थ शरीर में सिर निर्बाध रूप से दाएँ-बाएँ, ऊपर-नीचे घुमाया जा सकता है।
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