रोगों की पहचान

रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 4
| 0 | साधारण स्नान | 32 |
|---|
- | बीमारियों के बच्चे रहने के सरल और बेहतरीन उपाय | 33
- | रोगों से बच्चे रहने के पाँच सर्वोत्तम फार्मूले | 37
- | आयुर्वेद का महत्व | 41
- | रोगों के उपचार में आयुर्वेद के फार्मूले | 45
0 | कुछ रोग होने पर | 45
0 | क्षय रोग होने पर | 46
0 | हैजा होने पर | 46
0 | जुकाम होने पर | 46
0 | आँखों से दिखना कम हो जाने पर | 47
0 | आँखें दुखने पर | 48
0 | आँख आने पर | 49
0 | पोथकी (रोहें) रोग होने पर | 49
0 | अण्डकोषों में दर्द होने पर | 49
0 | पीलिया रोग होने पर | 50
0 | लू लगने पर | 51
0 | निमोनिया होने पर | 51
0 | आँव आने पर | 51
0 | बवासीर होने पर | 52
0 | अजीर्ण (बदहजमी) होने पर | 53
0 | मूत्र न आने पर | 53
0 | रुक-रुक कर पेशाब आने पर | 54
0 | बार-बार पेशाब आने पर | 54
0 | पेट में दर्द होने पर | 54
0 | पेट में सूजन होने पर | 54
0 | नाभि स्थान में दर्द होने पर | 54
0 | पेट में कीड़े होने पर | 54
0 | मंदाग्रि होने पर | 55
0 | पेट में गैस होने पर | 55
0 | गुर्दे की पथरी होने पर | 55
0 | माथे में दर्द होने पर | 57
0 | अल्मपित्त होने पर | 57
0 | पायरिया होने पर | 57
0 | खाँसी होने पर | 58
0 | दमा होने पर | 58
0 | ग्रहणी रोग होने पर | 59
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