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निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages
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108 साहिब बन्दगी

हैं। आपने कहा कि जाने दो, फिर क्या है, सबको जाना है एक दिन। पर आपके ट्रस्टियों ने बार-बार आग्रह किया तो आपने विचार किया। जब आपको लगा कि इसकी अभी यहाँ पर ज़रूरत है तो ही आपने मजबूरी में उसमें प्राण फूँके।

यह एक की बात नहीं है, सैंकड़ों की बात है। पर यह काम आप बड़े चुपके से कर देते हैं। जब भी किसी में प्राण फूँकते हैं तो फिर उसे बता देते हैं कि अब बहुत ही सावधानी से काम करना, तुम्हें पुनर्जन्म मिला है; यदि कुछ गलत किया तो मैं भी भागीदार हो जाऊँगा।

मस्तगढ़, जम्मू के पंडित प्रभु दयाल जी ने पीलिया की बीमारी में प्राण त्याग दिये। उन्हें आप-ही-आप दिखने लगे। तब उनके पार्थिक शरीर को लेकर राँजड़ी लाया गया। सुबह के 5 बजे थे। उन्हें एक कुल्ले में लिटाया गया। जब आपने द्वार खोला तो उनका बेटा सामने था। आपने उससे पूछा कि आज इतनी सुबह कैसे आना हुआ; पंडित जी कहाँ हैं? तब वो अपने पिता जी को आपके समक्ष लाया। आपकी नज़र पड़ते ही उनके शरीर में प्राण वापिस आ गये। आपने पंडित जी से कहा-अरे पंडित जी! आप तो चले गये थे। वे आपके चरणों पर गिर पड़े; बंदगी की और रोने लगे। तब आपने उन्हें प्रसाद दिया और बहुत कुछ समझाकर घर भेज दिया।

नौग्राम की रक्षा बहन जी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बीमारियों के कारण उनका शरीर छूट गया। हार्ट की भी उन्हें तकलीफ़ थी और अन्य छोटी-छोटी बीमारियाँ भी थीं। घर वाले उनके पार्थिक शरीर को लेकर आपके पास आए। आपने कहा कि अभी तो इनकी ज़रूरत है। तब आपने उनमें प्राण फूँके और फिर समझाया कि इस शरीर से अब कोई गलत काम नहीं लेना; इसे मेरा ही मानना; आपने तो छोड़ दिया था।

इसके अलावा हज़ारों लँगड़ों, हज़ारों पागलों को आपने ठीक किया है। अन्य भी कई बीमारों को, जो किसी डाक्टर के इलाज़ से ठीक नहीं हो पाए होते हैं, उन्हें भी अच्छा किया है। पर यह काम आप इतने चुपके से करते हैं कि वो ख़बर फैल नहीं पाती है। यह इसलिए करते हैं

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निराले सद्गुरु
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कि यदि यह ख़बरें फैलने लगेंगी तो आपके पास फिर लाशें ही पहुँचेंगी। फिर तो राँजड़ी में भक्त लोगों को आपके दर्शन भी दुर्लभ हो जायेंगे। वैसे तो आप सहज में सबसे मिल लेते हैं, पर ऐसे में आपके दर्शन करना सच्चे भक्तों के लिए बड़ा मुश्किल काम हो जायेगा। इसलिए आप यह स्थिति उत्पन्न नहीं होने देना चाहते हैं।

सच तो यह है कि आपको इसके लिए किसी करिश्मे की भी ज़रूरत नहीं है। आप एक पर्दा करके संसार में चल रहे हैं। यदि आप केवल यह पर्दा हटा देंगे तो सब आपमें लय हो जायेंगे। कोई पंथ, कोई मत-मतान्तर नहीं रह जायेगा, सब आपमें लय हो जायेंगे। केवल आपका पंथ ही रह जायेगा। पर यह काम भी आप नहीं करना चाहते हैं। क्योंकि फिर तो सभी मुक्त हो जायेंगे। इसलिए आप युक्ति-युक्ति द्वारा जीवों के कल्याण का काम करना चाहते हैं। अपने ज्ञान द्वारा लोगों को अपनी ओर खींचना चाहते हैं, ताकि श्रद्धावान और साहिब के अंकुरी जीव सत्य भक्ति में आ सकें।

मुर्दे को जीवित तुम करके,
देते जीवन दान हो।
जग में जीवन सादा जीते,
तनिक भेद अपना न देते।
कोई न समझे कोई न जाने,
गुप्त सब तेरे काम हो॥
सुन भक्तों की दीन पुकार,
हरते उनके दुख अपार।
पल-पल रक्षा तुम हो करते,
काल की दुनिया से छुड़ा,
ले जाते अपने धाम हो॥
तुम्हारा भेद तुम ही जानो,
सब में तुम रहे समानो।
कहाँ लग कहें कुछ कहा न जाय,
धन साहिब तेरे काम हो॥

कोई समझे प्रेम दीवानी है

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110 साहिब बन्दगी

कोई समझे प्रेम दीवानी है


समझ समझ कोई समझ कहानी,
आत्म हुई दीवानी है।
सुर नर मुनि त्रिदेव नहीं,
साहिब यह नूरानी है॥

न इसका कोई संगी साथी,
न इसकी कोई रानी है।
मात गर्भ में यह नहीं आता,
कहती संतन वाणी है॥

आता जो जन शरण में इसकी,
पाता अमर निशानी है।
चाम महल में यह नहीं रहता,
बोले मधुमय वाणी है॥

सबसे न्यारा साहिब है यह,
अद्भुत बड़ी कहानी है।
प्रेम नगर का है यह राजा,
कोई समझे प्रेम दीवानी है॥

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निराले सद्गुरु111

पुस्तक सूची

हिन्दी में

  1. परा रहस्या
  2. मासिक पत्रिका सत्यकेतु
  3. पावन प्रार्थनाएँ
  4. सद्गुरु चालीसा
  5. वार्षिक डायरी
  6. सद्गुरु भक्ति
  7. कहाँ से तू आया और कहाँ तुझे जाना रे?
  8. सत्संग सुधारस
  9. नाम अमृत सागर
  10. अमृत वाणी
  11. सद्गुरु नाम जहाज़ है
  12. चल हंसा सतलोक
  13. कोटि नाम संसार में तिनते मुक्ति न होय
  14. मूल नाम गुप्त है, जाने बिरला कोय
  15. गुरु सुमिरै सो पार
  16. तीन लोक से न्यारा
  17. सेहत के लिए ज़रूरी
  18. सहजे सहज पाइये
  19. रोगों से छुटकारा
  20. सद्गुरु महिमा
  21. भक्ति के चोर
  22. अनुरागसागर वाणी
  23. भक्ति सागर
  24. हरि सेवा युग चार है, गुरु सेवा पल एक
  25. सत्य नाम के पटतरे उबरे पतित अनेक
  26. काग पलट हंसा कर दीना
  27. कस्तूरी कुण्डल बसै मृग खोजे बन माहिं
  28. गुरु पारस गुरु परस है
  29. गुरु अमृत की खान
  30. शीश दिये जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान
  31. मूल सुरति
  32. भृंग मता होय जिहि पासा, सोई गुरु सत्य धर्मदासा
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112 साहिब बन्दगी

  1. मैं कहता हूँ आँखिन देखी

  2. गुरु संजीवन नाम बतावे

  3. नाम बिना नर भटक मरे

  4. रोगों की पहचान

  5. यह संसार काल को देशा

  6. न्यारी भक्ति

  7. साहिब तेरी साहिबी सब घट रही समाय

  8. जाप मरे अजपा मरे अनहद भी मर जाए

  9. आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

  10. सुरति समानी नाम में

  11. सबकी गठरी लाल है, कोई नहीं कंगाल

  12. निराले सद्गुरु

  13. कुँजड़ों की हाट में हीरे का क्या मोल


सन्तो सो सतगुरु मोहे भावे, जो आवागमन मिटावै।
द्वार न मूदे पवन न रोके, न अनहद उरझावे॥