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निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

500 कहानियाँ रोज़ सुननी पड़ती हैं आपको

Page 103Permalink

निराले सद्गुरु
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सीधा आप पर पड़ रही थी, पर आप लगे रहे, हाथ आगे रखकर सत्संग करते रहे। एक आपके लिए छाता लेकर आया, पर आपको किसी की सेवा भी पसंद नहीं आती है, क्योंकि कन्संट्रेट नहीं होने से गलती कर देते हैं। तो उसने भी दो बार छाता आपके सिर पर लगा दिया। इतने में दूसरा आया, सोचा कि मैं ज़्यादा समझदार हूँ। उसने 10-15 मिनट में ही तीन बार छाता आपके सिर पर लगा दिया। आपने कहा कि दोनो बैठ जाओ अपनी जगह, मैं खुद निपट लूँगा, रहने दो ऐसे ही। तो आप कड़कती धूप में भी लगे रहे।

आपकी एक ही धुन है कि सत्संग द्वारा लोगों को समझाकर सत्य भक्ति में लगाना। चाहे कैसा भी ख़राब मौसम क्यों न हो, आप सत्संग स्थल पर पहुँचते-ही-पहुँचते हैं।


500 कहानियाँ रोज़ सुननी पड़ती हैं आपको

सुबह होते ही लोगों की भीड़ से आप घिर जाते हैं। लगभग 400-500 लोगों से निपटना पड़ता है। दर्शन करने कोई दो ही होते हैं, बाकी अपनी-अपनी समस्याएँ लेकर ही आए होते हैं। फिर कोई आपको ब्रश भी नहीं करने देता, वहाँ भी आकर आपको अपनी-अपनी फरियाद सुनाने लगते हैं। फिर सभी के पास कहानियाँ होती हैं; वो सुना-सुनाकर आपका समय नष्ट करते हैं। पर आप सबकी समस्याओं को शांत होकर सुनते हैं। कुछ डॉ० की रिपोर्ट लेकर आ जाते हैं। अब डॉ० लोगों का