सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary

महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished782 पृष्ठ

( ३ ) वानप्रस्थप्रकरण प्राणों के स्थान ”

( ४७ )
कृषि आदि से जीविका न होने पर शरीर के अंगों, अस्थियों की संख्या ४५५
अन्य साधन ४३५ इन्द्रियों के विषय-गन्धादि ४५८
राजा द्वारा वृत्ति निर्धारण ” कर्मेन्द्रियाँ ”
( ३ ) वानप्रस्थप्रकरण प्राणों के स्थान ”
वानप्रस्थ के धर्म ४३६ प्राणस्थानों के विस्तार ४५९
स्वयं प्राप्त फल द्वारा पंचमहायज्ञ ४३७ स्नायु, धमनी, पेशियों
द्रव्यसंचय का नियम ४३८ की संख्या ४६०
स्नान, स्वाध्याय और दान ४३९ बालों और रोओं की संख्या ४६१
वानप्रस्थ के भोजन का नियम ” शरीर में रसों का अनुपात ४६२
चान्द्रायणादि व्रत का नियम ” शरीर में आत्मा की स्थिति ४६३
पञ्चाग्निसेवन आदि ४४० ‘बृहदारण्यक’ तथा योगशास्त्र
समदृष्टि होने का नियम ४४१ का निर्देश ”
भैक्षाचरण ” आत्मा के ध्यान की विधि ४६४
शरीर त्याग का नियम ४४२ शब्द ब्रह्म की उपासना ”
मुक्ति के मार्ग सामगान, वीणा ”
( ४ ) यतिधर्मप्रकरण वादन आदि ४६५
यतिधर्म का निरूपण ४४२ गीतज्ञ की योनि ”
यति के धर्म ४४४ आत्मा से सम्पूर्ण जगत्
भिक्षाटन ४४५ की उत्पत्ति ४६६
यति के पात्र और उनकी शुद्धि ४४६ मुनियों का प्रश्न ”
इन्द्रियसंयम और अनिष्टमय यज्ञ से प्रजासृष्टि ”
संसार ४४७ आत्मा द्वारा सुख-दुःख का भोग
ध्यान और ब्रह्मदर्शन ४४८ क्यों ? ४६७
धर्म के लिए आश्रमविशेष आदिदेव से चार वर्णों की
आवश्यक नहीं ” उत्पत्ति ४६८
सत्य, अस्तेय आदि धर्म ” मुनियों की शंका ४६९
ब्रह्म से अनेक जीवात्मा की उत्पत्ति ४४९ कर्मानुसार योनि की प्राप्ति ४७०
आत्मा द्वारा किया गया कर्म ” कर्मों के फल की प्राप्ति का समय ”
आत्मा का शरीरधारण ४५० कैसा व्यक्ति किसी योनि में जन्म
शरीरधारण की प्रक्रिया और लेता है ४७१
अवस्थाएँ ४५१ सत्त्वादि गुण का परिणक ४७२
गर्भ में शरीर का विकास और आत्मा को पिछले जन्म का बोध
शारीरिक गुणों के उद्भव का क्यों नहीं होता ४७३
क्रम ४५३ आत्मा का समष्टि, व्यष्टि भेद ४७४
दोहद का महत्त्व ” धातुएं और आत्मा से जगत्
गर्भ के महीनों में विकास की की उत्पत्ति ”
दशाएँ ४५४ जगत् के सृजन की प्रक्रिया ४७५
प्रसव का समय ४५५ आत्मा के विषय में प्रमाण ४७६

( ४८ )
आत्मा का अज्ञान और क्लेश ४७६ | उपपातक ५०८
मुक्ति कौन पाता है ? ४७८ | जाति अंश के कारणभूत पाप "
मोक्षप्राप्ति का हेतु ४७९ | ब्राह्मणहत्या के प्रायश्चित्त की विधि ५१३
कर्मफलभोग के लिए शरीरधारण आत्मा को नट से उपमा " | ब्रह्मवध के विषय में विशेष नियम ५१४
मोक्ष का मार्ग, स्वर्गमार्ग संसरण-मार्ग ४८१ | प्रोत्साहक आदि के लिए दण्ड-प्रायश्चित्त ५१६
आत्मा के अस्तित्व का प्रमाण ४८३ | बालक और वृद्ध के लिए आधा प्रायश्चित्त ५१७
क्षेत्रज्ञ का स्वरूप ४८४ | ब्रह्महत्या के प्रायश्चित्त की अवधि ५१८
बुद्धि आदि की उत्पत्ति " | ब्रह्महत्या का दूसरा प्रायश्चित्त ५२१
गुणस्वरूप ४८५ | ब्रह्महत्या के प्रायश्चित्त का अतिदेश ५२५
स्वर्गमार्ग, पितृयान ४८६ | आत्रेयी की हत्या का प्रायश्चित्त ५२६
पितृयान के मुनियों का वर्णन ४८७ | आत्रेयी का लक्षण "
ज्ञान के हेतु " | सुरापान प्रायश्चित्त ५२७
आत्मज्ञानी और देवयान ४८८ | सुरा के विषय में विचार ५२८
उपासना की विधि ४८९ | एकादश मद्य ५२९
धारणात्मक योगाभ्यास का प्रयोजन ४९० | सुरापान का दूसरा प्रायश्चित्त ५३०
योग की सिद्धि के लक्षण ४९१ | सुरायुक्त शुष्कान्न के भक्षण का प्रायश्चित्त "
कर्मों के त्याग से मुक्ति " | सुरापात्र में जल पीने का प्रायश्चित्त ५३१
गृहस्थ के लिए भी मुक्ति संभव " | मद्यपान का प्रायश्चित्त ५३२
( ५ ) प्रायश्चित्तप्रकरण | द्विजाति की पत्नी के विषय में सुरापान प्रायश्चित्त ५३४
कर्मविपाक का निरूपण ४९२ | सुवर्णस्तेय का प्रायश्चित्त "
महापातकी का पुनः पुनः जन्म " | शङ्ख के विचार ५३५
कर्म के अनुसार शरीरधारण ४९६ | सुवर्ण शब्द का अर्थ ५३६
पतित होने का कारण और आवश्यकता ४९७ | सुवर्णस्तेय का दूसरा प्रायश्चित्त ५३७
प्रायश्चित्त का अधिकारी " | गुरुतल्पगमन का प्रायश्चित्त ५३९
प्रायश्चित्त न करने पर दोष ४९९ | गुरु शब्द का अर्थ "
इक्कीस नरक ५०० | गुरुतल्पगमन का दूसरा प्रायश्चित्त ५४२
प्रायश्चित्त का फल ५०१ | महापातकियों के साथ संसर्ग का प्रायश्चित्त ५४६
महापातकी ५०२ | इस विषय में नियम का अपवाद ५४९
ब्रह्महत्या के समान पाप ५०५ | शूद्रादि के विषय में प्रायश्चित्त ५५०
सुरापान के समान पाप " | गोवध का प्रायश्चित्त ५५१
सुवर्णस्तेय के समान पाप ५०६
गुरुतल्प के समान पाप "
गुरुतल्पातिदेश ५०७

( ४६ )
अवस्था के अनुसार प्रायश्चित्त का नियम ५५३
गोपालक की उपेक्षा से गोहत्या का प्रायश्चित्त ५५५
स्त्रियों के प्रायश्चित्त के विषय में विशेष नियम ५५६
पुरुषों के विषय में प्रायश्चित्त के विशेष नियम ५५७
उपपातकों के प्रायश्चित्त ५५८
स्त्री, शूद्र, विट्, क्षत्र के वध का प्रायश्चित्त ५६२
स्त्रीवध का प्रायश्चित्त ५६३
अनुपपातक प्राणिवध के विषय में प्रायश्चित्त ५७०
बिल्ली मारने पर प्रायश्चित्त ५७१
वृक्षादि काटने पर प्रायश्चित्त ५७३
पुंश्चली, वानर के वध का प्रायश्चित्त और उनके स्पर्श से शुद्धि का उपाय ५७५
वीर्यस्खलन का प्रायश्चित्त ५७६
ब्रह्मचारी द्वारा स्त्रीभोग का प्रायश्चित्त ५७८
स्वप्न में वीर्यपातहुने के प्रायश्चित्त का मन्त्र ५८०
संन्यास से भ्रष्ट होने पर प्रायश्चित्त ,,
अन्य अनुपपातक का प्रायश्चित्त ५८१
गुरु के लिए प्रायश्चित्त का विधान ५८२
सब प्रकार की हिंसा का प्रायश्चित्त ५८३
झूठा दोष लगाने पर प्रायश्चित्त ,,
भ्रातृजायागमन का प्रायश्चित्त ५८५
रजस्वला पत्नी के संभोग का प्रायश्चित्त ,,
अयाज्य व्यक्ति का यज्ञ कराने का प्रायश्चित्त ५८७
वेदविप्लावन का प्रायश्चित्त ५८८


स्वाध्यायत्याग का प्रायश्चित्त ५८९
अग्नित्याग का प्रायश्चित्त ,,
आश्रम में न रहने का प्रायश्चित्त ५९०
समुद्रयात्रा का प्रायश्चित्त ५९१
वेश्यागमन का प्रायश्चित्त ,,
प्याज आदि खाने पर प्रायश्चित्त ५९३
संधिनी गाय का दूध पीने पर प्रायश्चित्त ५९५
गर्हित मांस खाने का प्रायश्चित्त ,,
अपवित्र द्रव्य से स्पृष्ट वस्तु खाने का प्रायश्चित्त ५९५
बुरे विचार से प्रदत्त अन्न खाने का प्रायश्चित्त ५९९
बासी भोजन करने का प्रायश्चित्त ,,
गुणदुष्टशुक्त आदि के भक्षण का प्रायश्चित्त ६००
क्रियादुष्ट अन्न के भक्षण का प्रायश्चित्त ,,
एकाह्यादि श्राद्धभोजन का प्रायश्चित्त ६०३
अपुत्रादि के अन्नभक्षण का प्रायश्चित्त ६०४
जातिभ्रंश करने वाले पाप का प्रायश्चित्त ६०४
(६) प्रकीर्णकप्रायश्चित्तानि
निषिद्ध दान लेने का प्रायश्चित्त ६०४
गुरु की भर्त्सना का प्रायश्चित्त ६०५
विप्र को मारने के लिए उद्यत होने पर दण्ड ६०६
पादप्रहार का प्रायश्चित्त ,,
मनु द्वारा बताये गये प्रकीर्णक-प्रायश्चित्त ,,
नित्य, श्रौतादि कर्म न करने पर प्रायश्चित्त ,,
इन्द्रधनुष देखने का प्रायश्चित्त ६०७
यज्ञोपवीत चढ़ाये विना मलमूत्र-त्याग का प्रायश्चित्त ,,

५ या० भू०

( ५० )

चोर और पतित के साथ भोजन करने का प्रायश्चित्त ६०७
नीलरंगे वस्त्र धारण करने का प्रायश्चित्त "
देशविशेषगमन का प्रायश्चित्त ६०८
प्रायश्चित्त के विषय में देश और काल का विचार ६०९
पतित के घड़ा फोड़ने की विधि ६१०
पतित को समाज में मिलाने की विधि "
पतितत्याग की विधि का अतिदेश ६११
स्त्रियों का विशेष रूप से पतित होना ६१२
चरितव्रत के विषय में विशेष ६१३
जाति में सम्मिलित करने की दूसरी विधि ६१४
रहस्यप्रायश्चित्त ६१५
दूसरा प्रायश्चित्त ६१७
सुरापान का रहस्यप्रायश्चित्त "
सुवर्णस्तेय का प्रायश्चित्त ६१८
गुरुतल्प का प्रायश्चित्त "
उपपातक का रहस्य प्रायश्चित्त ६२०
सौ बार प्राणायाम का नियम "
अपवित्र वस्तु मुख में डालने का प्रायश्चित ६२१
अज्ञानवश किये गये पाप का प्रायश्चित्त "
साधारण पवित्र मन्त्र ६२२
यम और नियम ६२४

सान्तपन नाम का व्रत ६२५
महासान्तपन व्रत ६२६
पर्णकृच्छ्रव्रत ६२७
पादकृच्छ्रव्रत ६२८
प्राजापत्यकृच्छ्र ६२९
अतिकृच्छ्र ६३०
कृच्छ्रातिकृच्छ्र "
पराककृच्छ्र ६३१
सौम्यकृच्छ्र "
तुलापुरुषकृच्छ्र "
चान्द्रायणव्रत ६३२
दूसरे प्रकार का चान्द्रायण ६३३
कृच्छ्र और चान्द्रायण का साधारणतः आचरण ६३४
प्रायश्चित्त में वपन का विचार ६३६
अनादिए पाप का प्रायश्चित्त "
व्रत न कर सकने पर गोदान आदि ६३७
महापातक आदि में गायों की संख्या "
चान्द्रायण आदि में गायों की संख्या "
पुनः पाप करने पर पुनः प्रायश्चित्त ६३८
व्रत न कर सकने पर ब्राह्मण भोजन ६३९
कृच्छ्र और चान्द्रायण का फल ६४०
इस शास्त्र के अध्ययन और श्रवण का फल "
टिप्पणी (नोट्स) ६४३
पद्यार्धानुक्रमणिका ६९७

11639