विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम् १० ] वसन्तलदमीसहितम् । ७३
भा०—शनिवार में सूर्यबिम्ब दृश्य रहते हुए ही, और गुरुवार में सूर्यबिम्ब
के अस्त होने पर गोधूलिक लग्न ग्रहण करना चाहिये । यह भी केवळ शनिवार
में अस्त के बाद कुलिक की प्राप्ति और गुरुवार में अस्त से पूर्व अर्धयाम की प्राप्ति
होने के कारण समझना । इस गोधूलि में अशुभ नक्षत्र कृष्णपक्ष और दुर्मुहूर्त
होने पर भी हीनवर्णों का विवाह शुभकारक होता है ॥ ५ ॥
सार्क शनावित्यादि यदुक्तं तत्परिमाणं कथयति —
अत्रोभयत्र घटिकादलमिष्टमाहुर्ग्राह्यस्तदम्बरमणेरपि नार्धविम्बः ।
कालार्गलानियतये तपनार्धविम्बवेलाव्यवस्थितिरियं रचयां बभूवे ॥
सं०—अत्र ( गोधूलिके ) उभयत्र ( विम्बार्धास्तमयात् पूर्वं पश्चाच्च )
घटिकादलं ( घट्यर्धं ) इष्टमाहुः । तत् तस्मात् अम्बरमणेः सूर्यस्य अर्ध-
विम्बः ( अर्धबिम्बं यस्मिन् सः ) अपि 'कालो' न ग्राह