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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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६६ विवाहवृन्दावनम्- [षड्वर्ग-


योगनाड्यो भवन्तीत्यर्थः । इमाः ( एवं प्रकारेण साधिताः अन्तरनाड्यः )
इन्दोः पुण्याः, रवेस्तु पुण्यतमाः स्युः—एतदुक्तं भवति—त्रयस्त्रिंशतं
षष्ट्या संगुण्य चन्द्रगत्या भजेत् लब्धफलं चन्द्रसंक्रान्तिकाले सन्धिनाड्यः,
सूर्यगत्या भजेत् फलं सूर्यसंक्रान्तिकाले सन्धिनाड्यो भवन्ति, ताश्चन्द्रस्य
सामान्यपुण्यप्रदाः, रवेस्तु पुण्यतमा भवन्तीत्यर्थः ॥ १६ ॥

भा०— ३३ को ३ स्थान में रखकर ६० से गुना करके पृथक् पृथक् चन्द्रमा
और सूर्य के गत्यन्तर, चन्द्रमा की गति और चन्द्र सूर्य की गति के योग से भाग
देने से क्रम से तिथिसन्धि, नक्षत्रसन्धि, और योगसन्धि घटी होती है । इसी
प्रकार ३३ को ६० से गुनाकर चन्द्रगति से भाग देकर लब्धि चन्द्र संक्रान्ति घटी
और सूर्य गति से भाग देकर लब्धि सूर्य संक्रान्ति घटी होती है, इनमें चन्द्रमा
की सन्धिघटी सामान्य पुण्य प्रद