सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)
Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ * श्रीरामचरितमानस *
तब मधुबन भीतर सब आए।
अंगद संमत मधु फल खाए॥
रखवारे जब बरजन लागे।
मुष्टि प्रहार हनत सब भागे॥४॥
तब सब लोग मधुवनके भीतर आये और अंगदकी सम्मतिसे
सबने मधुर फल [या मधु और फल] खाये। जब रखवाले
बरजने लगे, तब घूँसोंकी मार मारते ही सब रखवाले भाग
छूटे॥४॥
[दोहा २८]
जाइ पुकारे ते सब बन उजार जुबराज।
सुनि सुग्रीव हरष कपि करि आए प्रभु काज॥
उन सबने जाकर पुकारा कि युवराज अंगद वन उजाड़ रहे
हैं। यह सुनकर सुग्रीव हर्षित हुए कि वानर प्रभुका कार्य कर
आये हैं॥२८॥
जौं न होति सीता सुधि पाई।
मधुबन के फल सकहिं कि खाई॥
एहि बिधि मन बिचार कर राजा।
आइ गए कपि सहित समाजा॥१॥
यदि सीताजीकी खबर न पायी होती तो क्या वे मधुवनके
फल खा सकते थे? इस प्रकार राजा सुग्रीव मनमें विचार कर
ही रहे थे कि समाजसहित वानर आ गये॥१॥
आइ सबन्हि नावा पद सीसा।
मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा॥