सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)
Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५० * श्रीरामचरितमानस *
सृष्टिका सृजन, पालन और संहार करते हैं; जिनके बलसे
सहस्रमुख (फणों)-वाले शेषजी पर्वत और वनसहित समस्त
ब्रह्माण्डको सिरपर धारण करते हैं; ॥ ३ ॥
धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता।
तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥
हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा।
तेहि समेत नृप दल मद गंजा॥ ४॥
जो देवताओंकी रक्षाके लिये नाना प्रकारकी देह धारण करते
हैं और जो तुम्हारे-जैसे मूर्खोंको शिक्षा देनेवाले हैं; जिन्होंने
शिवजीके कठोर धनुषको तोड़ डाला और उसीके साथ
राजाओंके समूहका गर्व चूर्ण कर दिया॥ ४॥
खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली।
बधे सकल अतुलित बलसाली॥ ५॥
जिन्होंने खर, दूषण, त्रिशिरा और बालिको मार डाला, जो
सब-के-सब अतुलनीय बलवान् थे; ॥ ५॥
[दोहा २१]
जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि।
तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि॥
जिनके लेशमात्र बलसे तुमने समस्त चराचर जगत्को जीत
लिया और जिनकी प्रिय पत्नीको तुम [चोरीसे] हर लाये हो,
मैं उन्हींका दूत हूँ॥ २१॥
जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई।
सहसबाहु सन परी लराई॥