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सर्वकोश
स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

Smritichandrika: Vyavaharakanda of Devannabhatta

देवण्णभट्ट (सम्पादक: एल. श्रीनिवासाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished474 पृष्ठ

पृष्ठ 315, कुल 474 में से

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पृष्ठ 315

यथाप्रोक्ता नियतास्युरुदङ्मुखाः ।
Wait, line 4:
द्विजातयो यथाप्रोक्ता नियतास्युरुदङ्मुखाः ।
Let's check the letters:
द्वि (dvi)
जा (jaa)
त (ta)
यो (yo)
य (ya)
था (thaa)
प्रो (pro)
क्ता (ktaa)
नि (ni)
य (ya)
ता (taa)
स्यु (syu)
रु (ru)
द (da)
ङ्मु (ṅmu)
खाः (khaaḥ) ।
Yes, exactly: "द्विजातयो यथाप्रोक्ता नियतास्युरुदङ्मुखाः ।"

पूजयेद्यजमानस्तु विधिवद्दक्षिणामुखः ॥
Letters:
पू (pū)
ज (ja)
ये (ye)
द्य (dya)
ज (ja)
मा (mā)
न (na)
स्तु (stu)
वि (vi)
धि (dhi)
व (va)
द्द (dda)
क्षि (kṣi)
णा (ṇā)
मु (mu)
खः (khaḥ)
॥ (double danda, wait: it looks like "॥" or "।"?)
In the image: "॥" (two dandas).

याज्ञवल्क्योपि—
Letters:
या (yā)