संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७० मीरा बाई
(२)
नीँदलड़ी नहिँ आवै सारी रात, किस बिध होइ परभात¹॥टेक
चमक² उठी सपने सुध भूली, चंद्र कला न सुहात ।
तलफ तलफ जिव जाय हमारो, कब रे मिलै दोना-नाथ ॥
भइ हूँ दिवानी तनसुध भूली, कोई न जानी म्हाँरी बात ।
मीरा कहै बीती सोइ जानै, मरन जीवन उन हाथ ॥२॥
(३)
नैना म्हारे बान पड़ी, साँई मोहिँ दरस दिखाई ॥ टेक ॥
चित्त चढ़ी मेरे माधुरि मूरत, उर विच आन अड़ी ॥१॥
कैसे प्रान पिया बिनु राखूँ, जीवन मूर जड़ी³ ॥ २ ॥
कब की ठाढ़ी पंथ निहारूँ, अपने भवन खड़ी ॥ ३ ॥
मीरा प्रभु के हाथ बिकानी, लोक कहै बिगड़ी ॥ ४ ॥
(४)
माई म्हाँरी हरि न बूझी बात ।
पिंड मैँ से प्राण पापी, निकस क्यूँ नहिँ जात ॥ १ ॥
रैन अँधेरी बिरह घेरी, तारा गिणत निस जात ।
ले कटारी कंठ चीरूँ, करूँगी अपघात ॥ २ ॥
पाट⁴ न खोल्या मुखाँ न बोल्या, साँझ लग परभात ।
अबोलना मैँ अवध बीती, काहे की कुसलात ॥ ३ ॥
सुपन मैँ हरि दरस दीन्हौँ, मैँ न जाग्यो हरि जात ।
नैन म्हाँरा उघड़⁵ आया, रही मन पछतात ॥ ४॥
आवन आवन होय रह्यो रे, नहिँ आवन की बात ।
मीरा ब्याकुल बिरहनी रे, बाल ज्यौँ बिल्लात ॥ ५ ॥
(५)
घड़ी एक नहिँ आवड़े⁶, तुम दरसन बिन मोय ।
तुम ही मेरे प्राण जी, का सूँ जीवन होय ॥ १ ॥
(१) सवेरा । (२) चौंक । (३) बूटी । (४) परदा । (५) खुल गया । (६) सुहावै ।