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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 267 में से

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पृष्ठ 80

धान१ न भावै नींद न आवै, विरह सतावै मोय।
घायल सी घूमत फिरूँ रे, मेरा दरद न जाने कोय ॥२॥
दिवस तो खाय गमाइयो रे, रैन गमाई सोय।
प्राण गमायो झूरताँ२ रे, नैन गमाई रोय ॥ ३ ॥
जो मैं ऐसा जानती रे, प्रीत किये दुख होय।
नगर ढँढोरा फेरती रे, प्रीत करो मत कोय ॥ ४ ॥
पंथ निहारूँ डगर बुहारूँ, ऊबी३ मारग जोय।
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे, तुम मिलियाँ सुख होय ॥५॥
(६)
मैं अपने सैयाँ सँग साची।
अब काहे की लाज सजनी, प्रगट ह्वै नाची ॥ १ ॥
दिवस भूख न चैन कबहिन, नींद निसु नासी।
बेध वार को पार होइगो, ज्ञान गुह४ गाँसी ॥ २ ॥
कुल कुटुँब सब आनि बैठे, जैसे मधु मासी५।
दास मीरा लाल गिरधर, मिटी जग हाँसी ॥ ३ ॥
(७)
नातो६ नाम को मो सूँ, तनक न तोड़्यो जाय ॥ टेक ॥
पानाँ ज्यूँ पीली पड़ी रे, लोग कहै पिंड रोग।
छाने७ लाँघन८ मैं किया रे, राम मिलन के जोग ॥ १ ॥
बाबल९ बैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हाँरी बाँह१०।
मूरख बैद मरम नहिँ जाने, करक११ कलेजे माँह ॥ २॥
जाओ बैद घर आपने रे, म्हाँरो नाँव न लेय।
मैं तो दाधी१२ विरह की रे, काहे कूँ औषध१३ देय ॥ ३॥


शब्दार्थ / पाद-टिप्पणी:

(१) अन्न। (२) बिलक बिलक कर। (३) खड़ी। (४) गुप्त। (५) शहद की
मक्खी। (६) रिश्ता। (७) छिप कर। (८) फ़ाक़ा। (९) बाप। (१०) नाड़ी।
(११) दर्द। (१२) जली हुई। (१३) दवा।