संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतुलसी साहिब (हाथरसवाले) २५१
करम का भोग भरम छूटै ।
बिन बेनी असनान पकड़ जम घर घर के लूटै ॥
बचै नहिँ कोइ सब को पटकै । हर दम पिय० ॥ ६ ॥
पूस पुरुप की आस बास बिन नहिँ जिव निस्तारा।
सतगुरु केवट गैल गवन करि जब जावै पारा ॥
मिलै जब पिउ परसै प्यारी ।
सुन्दर सेज बिछाय पिया सँग सोवै कर यारी ॥
अरज करि प्रीतम से हटकै । हर दम पिय० ॥ ७ ॥
माघ मनोरथ प्रीति परम पद की सुधि संभारी ।
ऐसी हैँ कोइ नारि जगत तजि तन मन से न्यारी ॥
सुरत की डोरी लै लावै ।
मूल मुकर१ की राह दाव करि सहजहि चढ़ि जावै ॥
कुमति कुनबे की बुधि झटकै । हर दम पिय० ॥ ८ ॥
फागुन फरक निकारि यार सँग खेलै खुल होली ।
आस अबीर उड़ाय गुनन की भर मारै झोली ॥
अरगजा घिसि चन्दन लेपै ।
नील सिखर की राह सुरत चढ़ि सुन्दर में चेपै२ ॥
चरन में हित चित से गठि कै । हर दम पिय० ॥ ९ ॥
चतुर सहेली चेत हेत हियरे से मन लावै ।
पल पल पालै प्रीति रीति पिया को जो रस चावै ॥
अमल करि होवै मतवारी ।
नसा नैन के माहिँ बिसरि गइ सुधि बुधि सब सारी ॥
गरक३ डोरी बाँधै बटि कै । हर दम पिय० ॥ १० ॥
(१) दर्पन । (२) चिपक जाय । (३) डूबी हुई, मतवाली ।