संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५२ शब्द संग्रह
बुन्द बैसाख की साख सिन्ध गति सन्तन ने गाई ।
सुनि के सज्जन होय समझ करि छोड़ै चतुराई ॥
दीन दिल दुरमत को छोड़ै ।
मन मकरन्द१ की जानि मानि तन मन को सब तोड़ै ॥
लहर सतसँग की जब चटकै । हर दम पिय० ॥११॥
जबर जेठ की रीति करै कोइ किंकर जब होवै ।
मन के बिखम विकार काढ़ि के तुलसी सब धोवै ॥
भरम तजि भक्ति भजन करना ।
मन मूरख को बाँधि पकड़ कर जीवतही मरना ॥
निकल घट न्यारी ह्वै फटकै ।
हर दम पिय की पीर दरस बिन मन मोरा भटकै ॥१२॥
काष्ठ जिह्वास्वामी (देव)
जीवन समय—सं० १८३४ से १६०६ तक । जन्म स्थान—काशी । सतसंग
स्थान—काशी और रामनगर । जाति—सरजूपारी ब्राह्मण भीटरी मिश्र शाखा के ।
इन का विवाह काशी ही में हो गया था परंतु वैराग्य उपजने पर गृहस्थ
आश्रम को