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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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पलटू साहिब २३३
(४)
रेख़्ता
सुंदरी पिया की पिया को खोजती,
भई बेहोस तू पिया के कै।
बहुत सी पद्मिनी खोजती मरि गईं,
रटत ही पिया पिया एक एकै॥
सती सब होत हैं जरत बिनु आगि से,
कठिन कठोर वह नाहिं झाँकै।
दास पलटू कहै सीस उतारि के,
सीस पर नाचु जो पिया ताकै¹॥
(५)
भूलना
केतिक जुग गये बीति माला के फेरते।
छाला परि गये जीभ राम के टेरते॥
माला दीजे डारि मनै को फेरना।
अरे हाँ पलटू मुँह के कहे न मिलै दिलै बिच हेरना॥
(६)
अरिल
जीवन है दिन चारि भजन करि लीजिये।
तन मन धन सब वारि संत पर दीजिये॥
संतहि से सब होइ जो चाहै सो करैँ।
अरे हाँ पलटू संग लगे भगवान संत से वे डेरैँ॥
॥ दीनता ॥
(१)
कुंडलिया
दूसर पलटू इक रहा भक्ति दई तेहि जान॥
भक्ति दई तेहि जान नाम पर पख्यो मोकहँ।
गिरा परा धन पाय छिपायौँ मैं ले ओकहँ॥
(१) देखै।
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