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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 267 में से

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पृष्ठ 243

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२३४ शब्द संग्रह
लिखा रहा कुछ आन कर्म मैं दीन्हा आनै ।
जानौँ महीं अकेल कोऊ दूसर नहिं जानै ॥
पाछे भा फिर चेत देय पर नाहीं लीन्हा ।
आखिर बड़े की चूक जोई निकसा सोई कीन्हा ॥
पलटू मैं पापी बड़ा भूल गया भगवान् ।
दूसर पलटू इक रहा भक्ति दई तेहि जान ॥
(२)
कुंडलिया
पतित-पावन बाना धख्यो तुमहिँ परी है लाज ॥
तुमहिँ परी है लाज बात यह हम ने बूझी ।
जब तुम बाना धख्यो नाँहिँ तब तुम कहँ सूझी ॥
अब तो तारे बनै नहीं तो बाना उतारो ।
फिर काहे को बड़ा बाच जो कहिके हारो ॥
आगहिँ तुम गये चूक दोष नहिँ दीजै मेरो ।
तुम यह जानत नाहिं पतित होइहैं बहुतेरो ॥
पलटू मैं तो पतित हाँ कियो असुभ सब काज ।
पतित-पावन बाना धख्यो तुमहिँ परी है