संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
पृष्ठ 233, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 233
२४४ शब्द संग्रह
(८)
कुंडलिया
सीस उतारै हाथ से सहज आसिकी नाहीं ॥
सहज आसिकी नाहीं खाँड़ खाने की नाहीं ।
झूठ आसिकी करै मुलूक मैं जूती खाही ॥
जीते जी मरि जाय करै ना तन की आसा ।
आसिक को दिन राति रहै सूली पर बासा ॥
मान बड़ाई खोय नींद भरि नाहीं सोना ।
तिल भरि रक्त न माँस नहीं आसिक को रोना ॥
पलटू बड़े बेकूफ वे आसिक होने जाहिँ ।
सीस उतारै हाथ से सहज आसिकी नाहीं ॥
(९)
झूलना
साहिब के दास कहाय यारो,
जगत की आस न राखिये जी ।
समरथ स्वामी को जब पाया,
जगत से दीन न भाखिये जी ॥
साहिब के घर मैं कौन कमी,
किस बात को अंतै आखिये जी ।
पलटू जो दुख सुख लाख परै,
वहि नाम सुधा रस चाखिये जी ॥
(१०)
झूलना
पहिले संसार से तोरि आवै,
तब बात पिया की पूछिये जी ।