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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 234, कुल 267 में से

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पृष्ठ 234

पलटू साहिब ३२५
तरवार दोय है म्यान एकै,
किस भाँति से वा मैं कीजिये जी ॥
मीठे प्याले को दूर करौ,
कडु प्रेम पियाला पीजिये जी ।
पलटू जब सीस उतारि धरै,
तब राह पिया की लीजिये जी ॥
॥ सूरमा ॥
समुझि बूझि रन चढ़ना साधो, खूब लड़ाई लड़ना है ॥टेक॥
दम दम कदम परै आगे को, पीछे नाहिं पछरना है ।
तिल तिल घाव लगै जो तन मैं, खेत सेती क्या टरना है ॥१॥
सबद खैँचि समसेर¹ जेर करि, उन पाँचो को धरना है ।
काम क्रोध मद लोभ कैद करि, मन कर ठौरै मरना है ॥२॥
खड़ा रहै मैदान के ऊपर, उनकी चोट सँभरना है ।
आठ पहर असवार सुरत पर, गाफिल नाहीं परना है ॥३॥
सीस दिहा साहिब के ऊपर, किसकी डेर अब डेरना है ।
पलटू बाना रुंड² के ऊपर, अब क्या दूसर करना है ॥४॥
॥ पतिब्रता ॥
कुंडलिया
पतिबरता को लच्छन सब से रहै अधीन ॥
सब से रहै अधीन टहल वह सब की करती ।
सास ससुर औ भसुर ननद देवर से डरती ॥
सब को पोषन करै सभन की सेज बिछावै ।
सब को लेइ सुताय, पास तब पिय के जावै ॥
सूतै पिय के पास सभन को राखै राजी ।
ऐसा भक्त जो होय ताहि की जीती बाजी ॥
(१) शब्द रूपी तलवार । (२) धड़ ।
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