संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 232, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब २२३
(६)
कुंडलिया
सोई सती सराहिये जरै पिया के साथ ॥
जरै पिया के साथ सोई है नारि सयानी ।
रहै चरन चित लाय एक से और न जानी ॥
जगत करै उपहास पिया का संग न छोड़ै ।
प्रेम की सेज बिछाय मेहर की चादर ओढ़ै ॥
ऐसी रहनी रहै तजै जो भोग बिलासा ।
मारै भूख पियास याद सँग चलती स्वासा ॥
रैन दिवस बेहोस पिया के रँग मैं राती ।
तन की सुधि है नहीं पिया सँग बोलत जाती ॥
पलटू गुरु परसाद तैं किया पिया को हाथ¹ ।
सोई सती सराहिये जरै पिया के साथ ॥
(७)
कुंडलिया
आठ पहर निरखत रहै जैसे चन्द चकोर ॥
जैसे चन्द चकोर पलक से टारत नाहीं ।
चुगै बिरह से आग रहै मन चन्दै माहीं ॥
फिरै जेही दिसि चन्द तेही दिसि को मुख फेरै ।
चन्दा जाय छिपाय आग के भीतर हेरै ॥
मधुकर तजै न पदम² जान से जाय बँधावै ।
दीपक मैं ज्योँ पतँग प्रेम से प्रान गँवावै ॥
पलटू ऐसी प्रीति कर परधन चाहै चोर ।
आठ पहर निरखत रहै जैसे चन्द चकोर ॥
(१) बस मैं। (२) कँवल ।