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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 220, कुल 267 में से

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भीखा साहिब २११
॥ समरथ ॥
ए हरि मीत बड़े तुम राजा ।
व्यापक जहाँ तहाँ लगु तुम्हरे हुकुम बिना कहुँ सरै न काजा ॥टेक
तिरगुन सूबा मौज बनाया, भिन्न भिन्न तहँ फौज रखाया ।
हय¹ गय² रथ सुखपाल बहूता, माया बढ़ी करै को कूता ।
कहत बनै नहिँ अनघड़ साजा, ए हरि मीत० ॥ १ ॥
चारो दिसा कनात गड़ा है, असमान तंबू बिन चोब खड़ा है।
पानी अगिनि पवनहै पायक, जो कछु काम सो करिबे लायक
अनहद ढोल दमामा बाजा, ए हरि मीत ० ॥ २ ॥
तारागन पैदल समुदाई, अज्ञा ले तहँ तहँ चलि जाई ।
चाँद सूर निसवासर आई, आवत जात मसाल दिखाई ।
ध्रुव कियो थीर अचल मन धाजा³, ए हरि मीत ० ॥३॥
सहजादा है मन बुधिकाला, कीन्हेव सकल जगत पैमाला।
काल बड़ा उमराव है भारी, डरे सकल जहँ लग तन धारी ।
तुम्हरे दंड सकल सिर ताजा, ए हरि मीत ० ॥ ४ ॥
सत्त सतोगुन मंत्र दृढ़ावा, ज्ञान आदि दे पुत्र बुलावा ।
अमल करहु तुम जग मैं जाई, फेरहु केवल राम दुहाई ।
नाम प्रताप प्रकास को छाजा, ए हरि मीत ० ॥ ५ ॥
चतुरंगिनि उज्ज्वल दल देखा, जोग बिराग बिचार को लेखा।
छिमा सील संतोष को भाऊ, परमारथ स्वारथ नहिँ चाऊ।
स्वारथ-रत पर पारहु गाजा⁴, ए हरि मीत ० ॥ ६ ॥
रज गुन तम गुन कीन्ह्यो मेला, सबहौँ भयो सतोगुन चेला।
हम तुम आड़ कछू नहिँ कीन्हा, अज्ञाईस सीस पर लीन्हा।
मरत बहुत डेर आपु की लाजा, ए हरि मीत ० ॥ ७ ॥
(१) घोड़ा। (२) हाथी । (३) ध्वजा, फरहरा । (४) जो स्वार्थी है उस पर
बिजली गिराते हैं।