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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 221, कुल 267 में से

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पृष्ठ 221

२१२ शब्द संग्रह
पठयौ काम क्रोध मद लोभा, जा तैं कीन्ह सकल तन छोभा ।
केवल नाम भजै सो बाचै, नहिं तौ और सकल मनकाचै ।
भीखा तुम बिन कौन निवाजा१, ए हरि मीत बड़े तुम राजा८
॥ बिनती ॥
(१)
प्रभु जी करहु अपनो चेर ।
मैं तौ सदां जनम को रिनिया२, लेहु लिखि मोहिं केर ॥१॥
काम क्रोध मद लोभ मोह यह, करत सबहिन जेर ।
सुर नर मुनि सब पचि पचि हारे, परे करम के फेर ॥२॥
सिव सनकादि आदि ब्रह्मादिक, ऐसे ऐसे ढेर ।
खोजत सहज समाधि लगाये, प्रभु को नाम न नेर ॥३॥
अपरंपार अपार है साहिब, ह्वै अधीन तन हेर ।
गुरु परताप साध की संगति, छुटे सो काल अहेर३ ॥४॥
त्राहि त्राहि सरनागत आयो, प्रभु दरवो४ यहि बेर ।
जन भीखा को उरिन कीजिये, अब कागद जिनि हेर ॥५॥
(२)
अस करिये साहिब दाया ॥ टेक ॥
कृपा कटाच्छ होइ जेहि तैं प्रभु, छूटि जाय मन माया ॥१॥
सोवत मोह निसा निस बासर, तुम्हीं मोहिं जगाया ॥२॥
जनमत मरत अनेक बार, तुम सतगुरु होय लखाया ॥३॥
भीखा केवल एक रूप हरि, ब्यापक त्रिभुवन राया ॥४॥
(३)
यार हे! हँसि बोलहु मो सौं, भरम गाँठि छूटै प्रभु तो सौं ॥१॥
पालन करि आये मो कहँ तुम, खाय जियाय कियो घर पोसे।२
(१) दया या परवरिश करना । (२) क़रज़दार । (३) शिकार । (४) दया कीजिये ।