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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 267 में से

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पृष्ठ 199

१६० शब्द संग्रह
(३)
मन अटक्या बेपरवाहे नाल ॥ टेक ॥
नैन फँसे दिल मिलया लोड़े, मूरख लोक असानूँ मोड़े।
मेरा हर दम जाँदा आहे नाल ॥ १ ॥१
मुल्लाँ काजी नमाज पढ़ावन, हुकम सरा दा भय दिखलावन ।
साडे इसक नूँ की सरा दे नाल ॥ २ ॥२
नदियाँ पार सजन दा ठाना, कीते कौल जरूरी जाना ।
कुछ करले सलाह मलाहे नाल ॥ ३ ॥३
आसिक सोई जेहड़ा४ इसक कमावे, जित वल५ प्यारा उते वल जावे ।
बुल्ले साह जा मिल तू अलाहे६ नाल ॥४॥
॥ उपदेश ॥
टुक बूझ कवन छप आया है ।
इक नुकते मैं जो फेर पड़ा, तब ऐन गैन७ का नाम धरा ।
जब मुरसद नुकता दूर किया, तब ऐनाँ ऐन८ कहाया है ॥१॥
तुसीं इलम किताबाँ पढ़दे हो, केहे उलटे माने९ करदे हो ।
बेमूजब ऐवैं लड़दे हो, केहा१० उलटा बेद पढ़ाया है ॥२॥
दुई दूर करो कोई सोर नहीं, हिंदू तुरक कोइ होर११ नहीं।
सब साधु लखो कोइ चोर नहीं, घट घट मैं आप समाया है३॥
(१) मेरी आँखें प्रीतम से लग गई हैं और दिल मिलने को तरसता है, मूरख
लोग बरजते हैं [मोड़े] पर मेरी हर साँस आह के साथ निकलती है।
(२) क़ाज़ी मुल्ला नमाज़ पढ़ने को कहते हैं और शरअ [मुसलमानों के कर्मकांड]
के हुकम का डर दिखलाते हैं लेकिन हमारे इश्क़ को शरअ की क्या परवाह है।
(३) हमारे प्रीतम का स्थान [ठाना] भवसागर के पार है उसको बचन दिया
है कि ज़रूर आऊँगा तो अब केवट अर्थात सतगुरु से सलाह करले । (४) जो ।
(५) तरफ़ । (६) अल्लाह के । (७) फ़ारसी हर्फ़ों मैं ऐन [ع] पर एक नुक़ता
लगा देने से ग़ैन [غ] हो जाता है। (८) आँख । (९) अर्थ । (१०) किसने ।
(११) और, न्यारे न्यारे ।