संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकाफ़ियाँ १६१
ना मैं मुल्ला ना मैं काजी, ना मैं सुन्नी ना मैं हाजी ।
बुल्ले साह नाल लाई¹ बाजी, अनहद सबद बजाया है ॥४॥
सहजो बाई
[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी-संग्रह भाग १ पृष्ठ १५४]
॥ गुरुदेव ॥
(१)
हमारे गुरु पूरन दातार ।
अभय दान दीनन को दीन्हे, किये भवजल पार ॥ १ ॥
जन्म जन्म के बंधन काटे, जम की बंध निवार ।
रंक हुते सो राजा कीन्हे, हरि धन दियौ अपार ॥ २ ॥
देवैं ज्ञान भक्ति पुनि देवैं, जोग बतावनहार ।
तन मन बचन सकल सुखदाई, हिरदे बुधि उँजियार ॥३॥
सब दुख-गंजन पातक-भंजन, रंजत ध्यान विचार ।
साजन दुर्जन जो चलि आवै, एकहि दृष्टि निहार ॥ ४ ॥
आनंद रूप सरूप-मई है, लिप्त नहीं संसार ।
चरनदास गुरु सहजो केरे, नमो नमो बारम्बार ॥ ५ ॥
(२)
राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ, गुरु के सम हरि कूँ न निहारूँ ॥१
हरि ने जन्म दियो जग माहीं, गुरु ने आवागवन छुटाहीं २
हरि ने पाँच चोर दिये साथा, गुरु ने लई छुटाय अनाथा ३
हरि ने कुटुंब जाल मैं गेरी, गुरु ने काटी ममता चेरी² ॥४
हरि ने रोग भोग उरझायौ, गुरु जोगी करि सबै छुटायौ ॥५
हरि ने कर्म धर्म भरमायौ, गुरु ने आतम रूप लखायौ ॥६
(१) लगाई। (२) बेड़ी।