सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 200

काफ़ियाँ १६१
ना मैं मुल्ला ना मैं काजी, ना मैं सुन्नी ना मैं हाजी ।
बुल्ले साह नाल लाई¹ बाजी, अनहद सबद बजाया है ॥४॥
सहजो बाई
[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी-संग्रह भाग १ पृष्ठ १५४]
॥ गुरुदेव ॥
(१)
हमारे गुरु पूरन दातार ।
अभय दान दीनन को दीन्हे, किये भवजल पार ॥ १ ॥
जन्म जन्म के बंधन काटे, जम की बंध निवार ।
रंक हुते सो राजा कीन्हे, हरि धन दियौ अपार ॥ २ ॥
देवैं ज्ञान भक्ति पुनि देवैं, जोग बतावनहार ।
तन मन बचन सकल सुखदाई, हिरदे बुधि उँजियार ॥३॥
सब दुख-गंजन पातक-भंजन, रंजत ध्यान विचार ।
साजन दुर्जन जो चलि आवै, एकहि दृष्टि निहार ॥ ४ ॥
आनंद रूप सरूप-मई है, लिप्त नहीं संसार ।
चरनदास गुरु सहजो केरे, नमो नमो बारम्बार ॥ ५ ॥
(२)
राम तजूँ पै गुरु न बिसारूँ, गुरु के सम हरि कूँ न निहारूँ ॥१
हरि ने जन्म दियो जग माहीं, गुरु ने आवागवन छुटाहीं २
हरि ने पाँच चोर दिये साथा, गुरु ने लई छुटाय अनाथा ३
हरि ने कुटुंब जाल मैं गेरी, गुरु ने काटी ममता चेरी² ॥४
हरि ने रोग भोग उरझायौ, गुरु जोगी करि सबै छुटायौ ॥५
हरि ने कर्म धर्म भरमायौ, गुरु ने आतम रूप लखायौ ॥६
(१) लगाई। (२) बेड़ी।