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संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

40. सन्तानपर माताकी इच्छाका प्रभाव

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सन्तति-शास्त्र ।

१. यदि गर्भवती मंथुन-प्राप्य हो अर्थात् उनको मंथुनको इच्छा हो तो निलंब, चिकलांग अथवा मेहरा, राडिया मन्तान उत्पन्न होती है ।
( च० १० अ० ८ श्लो० ४१ )

२. यदि गर्भवती पराय धनके हरनेकी इच्छा करे, तो कुट्टन और हर्षवाली अथवा राडिया या ज्ञानानिया सन्तान होती है ।
( च० १० अ० ८ श्लो० ४१ )

३. यदि गर्भवतीको मूत्ररका मांस प्राप्य हो अर्थात् उसके गनकी इच्छा हो, तो लाल नेत्रवाली, हत्यारी, कसाई तथा कुछ कुछ कठोर गेमवाली सन्तान उत्पन्न होती है ।
( च० १० अ० ८ श्लो० ४२ )

४. अपनी इच्छाके अनुसार गर्भवतीको मनमाना पदार्थ न मिलनेसे गर्भका बालक, चीना, कुचडा, दूध, पागल, मूर्ख और नेत्रविकारवाला उत्पन्न होता है । इसलिये जिम वस्तुकी इच्छा हो वही स्त्रीको गर्भ समयमें देना चाहिये । यदि मनमाना पदार्थ मिल जाय तो प्रगल्भी-चिरंजीवी और उत्तम बालक उत्पन्न होता है ।
( मु० १० श० ३ श्लो० ४१ )

५. जिन जिन द्रव्याँके सुगन्धको गर्भवती भोगनेको इच्छा करे उनके न मिलनेसे गर्भको वाधा पहुँचती है । इसलिये मनचाहा पदार्थ जरूर देना चाहिये । मनमाना पदार्थ मिलनेसे गुरगुरुक सन्तान होती है और न मिलनेसे बालक और माता दोनों भय रहता है । गर्भवतीकी इच्छा जिन जिन द्रव्याँसे संवन्ध रखने वाले पदार्थकी हो यदि वे न मिले तो उन्हीं २ अंगोंको हानि पहुँचती है ।
( सु० १० श० ३ श्लो० २२ मे० २४ )

सन्तानपर माताकी इच्छाका प्रभाव ।

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६. यदि गर्भवतीको राजाके दर्शनकी इच्छा हो, तो अनवान् और भाग्यशाली सन्तान उत्पन्न होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २५)

७. उत्तम वस्त्र और आभूषणोंके पहनेकी इच्छा हो तो शौकीन सन्तान पैदा होती है। (सु० १० अ० ३ श्लो० २६)

८. यदि महात्मा और देवताओंके दर्शनकी इच्छा हो, तो धर्मशील और सत्पात्र सन्तान होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २७)

९. सर्प इत्यादि देखनेकी इच्छा यदि गर्भवती करे, तो हिंसा करनेवाली सन्तान उत्पन्न होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २८)

१०. यदि गोहका मांस खानेकी इच्छा हो, तो बहुत सोने-वाला और सखी वालक उत्पन्न होता है। (२८)

११. यदि गोमांस खानेकी इच्छा करे तो बलवान् और सारे क्रूरों को सहने वाली सन्तान उत्पन्न होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २९)

१२. मैसे का मांस खानेकी इच्छा गर्भवतीको हो, तो शूरवीर लाल नेत्रोंवाली योग्युक सन्तान उत्पन्न होती है। (२९)

१३. यदि सूअरके मांसकी इच्छा हो तो सोनेवाली और शूरवीर सन्तान उत्पन्न होती है। (सु० १० अ० ३ श्लो० ३०)

१४. यदि गर्भवतीकी इच्छा रास्ता चलनेकी हो, तो बड़ी बड़ी जंघाओं और बन में विचरनेवाली सन्तान उत्पन्न होती है। (३०)

१५. हिरनका मांस खानेकी इच्छा यदि हो, तो बड़ी जंघाओं-वाली सदा वनचारी सन्तान होती है। (३०)

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सन्तति-शास्त्र ।

१६. यदि गर्भवतीका चित्त साबरके मांसपर हो, तो उद्भिन्न-चित्तवाली सन्तान होती है। (२०)

१७. तीतरका मांस खानेकी इच्छा यदि गर्भवती करे, तो सदा डरनेवाली सन्तान उत्पन्न होती है। (२०)

१८. गर्भवती यदि शृंगारकी इच्छा करे, तो शौकीन सन्तान होती है। (श० क०)

१९. यदि गर्भवती को वदचलनीके लिये किसी मिष्ठसे मिलनेकी इच्छा हो, तो वदचलन पुत्र और यदि कन्या हो, तो वह कुकर्म करनेवाली होती है। (श० क०)

२०. किसी स्नेहीसे मिलनेकी इच्छा हो, तो मिलनसार सुहृद सन्तान होती है। (श० क०)

२१. यदि श्रेष्ठ और पूज्य जनोंसे मिलनेकी इच्छा हो, तो सदाचारी सन्तान होती है। (श० क०)

२२. यदि गर्भवतीको खेल करनेकी इच्छा हो, हँसमुख सन्तान होती है। (श० क०)

२३. शिफार करनेकी इच्छा यदि हो, तो हँसक सन्तान होती है। (श० क०)

२४. यदि गर्भवतीकी लिखने पढ़नेकी इच्छा हो, तो गुणस सन्तान होती है। (श० क०)

२५. यदि नाच-गानेकी इच्छा हो, तो शृंगाररससे भरी हुई सन्तान होती है। (श० क०)

२६. यदि गर्भवतीको उत्तम फल खानेकी इच्छा हो, तो शुद्ध भोजन करनेवाली सन्तान होती है। (श० क०)

२७. फुलवारी और उपवनोंमें सैर करनेकी इच्छा हो, तो प्रसन्नाचित्तवाली सन्तान उत्पन्न होती है। (श० क०)

माताके भोजनका सन्तानपर प्रभाव ।

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२८. यदि हँसी दिह्मगीकी इच्छा हो, तो पुत्र होनेपर परस्त्री-प्रिय और यदि कन्या हो तो कुकर्म करनेवाली होती है ।

( ३० क० )

२९. यदि द्रव्य एकत्र करनेकी इच्छा गर्भवतीको हो, तो कंजूस सन्तान होती है ।

( ' १० क० )

इच्छा बहुत बड़ी चीज़ है । गर्भ समयमें इससे सावधान रहना चाहिये । जहाँतक हो सके उत्तम इच्छाका होना ठीक है, क्योंकि इच्छाका बहुत बड़ा प्रभाव बालकोंपर पड़ता है । माताकी जैसी इच्छा होती है उसीके अनुसार सन्तान भी उत्पन्न होती है ।

(४१) माताके भोजनका सन्तानपर प्रभाव ।

आहार वह वस्तु है कि जिससे शरीरका पोषण होता है । गर्भका बालक भी आहारके रससे पलता और पुष्ट होता है । अतएव माताका जैसा आहार होगा उसीके गुण दीपके अनुसार बच्चा भी होगा । आहारके गुणदीप बच्चोंमें अनेक प्रकार-से होते हैं ।

१. यदि गर्भवती मन्दिरा पीया करे, तो तृपात् अथवा विकल चित्तवाली सन्तान उत्पन्न होती है ।

( ३० ३० अ० ८ श्लो० ४२ )

२. गोहका मांस खानेसे शर्करा, पथरी, अथवा शनैर्मैह रोगवाली सन्तान होती है ।

( ४२ )

यदि गर्भवती मछली खाया करे, तो बहुत देरमें पलक भारनेवाली या देहीदण्डिवाली सन्तान उत्पन्न होती है ।

( ४२ )