संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
30. गर्भ स्थिति होनेका तत्कालिक लक्षण
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सन्तति-शास्त्र ।
२. विद्वानोंकी राय ।
१. जब गर्भ धारण होता है तब ज्योंही रज-वीर्य मिलकर गर्भाशयमें पहुँचता है त्यों ही खींची नाभिके नीचे थोडासा मीठा मीठा दर्द होता है । (रति शास्त्र )
१. गर्भ धारण समयमें वीर्य योनिसे बाहर नहीं निकलता और गर्भ धारण होते ही संयोगकी चाह जाती रहती है । (चक्रपाणि )
जब ऐसे लक्षण हों, तो समझ लेना चाहिये कि गर्भ धारण हो गया । ये लक्षण गर्भ धारण होनेके साथ ही साथ मालूम होते हैं ।
(३१) जीव गर्भमें कब आता है ?
इस विषयमें कि गर्भ समयमें वचोमें जीव कब आता है अनेक विवाद हैं । कोई गर्भ धारण होनेके साथ ही, कोई चार मास के बाद, कोई चैतन्यता उत्पन्न होनेपर जीवका गर्भमें आना मानते हैं । इसी प्रकार अनेक मत हैं, परन्तु यदि यह बात मान ली जाय कि गर्भ धारण होनेके साथ ही साथ जीव नहीं आता, तो यहाँ एक बहुत बड़ी शंका यह होगी कि गर्भ फिर बढ़ता कैसे है ? क्योंकि निर्जीव पदार्थका वृद्धि-क्रम नहीं होता इसलिये यह बात माननी पड़ेगी कि सजीव गर्भाधान होता है या गर्भाधान होनेके साथ ही साथ गर्भ सजीव हो जाता है ।
१. वैदिक मत
१. गर्भाधानसे लेकर दस मास अर्थात् पैदा होनेतक गर्भ सजीव रहता है और सजीव ही उत्पन्न होता है ।
(क० म० ५ सू० ७८ म० ९ )
जीव गर्भमे कब आता है ?
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२. धर्मशास्त्रका मत ।
१. स्त्री और पुरुषके संयोगसे पुरुषका शुद्ध वीर्य योनिमें जाकर स्त्रीके शुद्ध रजसे मिलता है। उसी समय भूतात्मा, आप ही आकाश वायु जल पृथिवी और अग्नि अर्थात् पंच महाभूतोंके साथ गर्भाशयमें स्थित होता है ।
( या० य० ध० प्र० ७२ )
३. वैद्यकका मत ।
१. जब गर्भाशयमें रज-वीर्य और जीव इन तीनोंका संयोग ( मेल ) हो जाता है, तो उसको गर्भ कहते हैं; अर्थात् रज-वीर्य और जीव इनके मिलनेपर ही गर्भ स्थित होता है । ( च० श० अ० ४ श्लो० ३ )
२. जिस समय गर्भाशयमें रजवीर्यका मिश्रण होता है । उसी समय जीव उनके साथ उसमें प्रवेश करता है । जिस प्रकार सूर्यकी किरण और मणिके संयोगसे अग्नि प्रकट होती है, इसी प्रकार रज-वीर्यके मिलनेसे जीव प्रगट होता है । ( भा० प्र० ग० प्र० ३२ ३३ )
६. डाक्टरोंका मत ।
१. रज-वीर्यके कीड़े आपसमें मिलकर गर्भ उत्पन्न करते हैं, बिना इन जीवोंके मिले गर्भ नहीं रहता अर्थात् प्रारम्भसे ही गर्भ सजीव होता है ।
धर्मशास्त्र और वैद्यकसे यह बात मालूम होती है कि जब गर्भाशयमें रज-वीर्य मिलता है उस समय उनमें जीव आ जाता है । वेदसे भी यही स्पष्ट है कि गर्भ प्रारम्भ से ही सजीव होता है । डाकुरी मतका भी अभिप्राय यही है कि गर्भ सजीव स्थित होता है । अतएव सर्वसम्मतसे यह बात निश्चय है कि