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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ

  1. तोमरधार : मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िला में चंबल नदी के किनारे स्थित एक बड़े
    भूभाग को तोमरधार कहा जाता है। इसी क्षेत्र में चंबल नदी के किनारे बरवाई
    और रूअर नामक दो गाँव हैं। मुरैना ज़िला स्वाधीनता से पूर्व ग्वालियर की देशी
    रियासत में था। महिला डाकू पुतली बाई बरवाई गाँव की ही थी।
  2. बीहड़ : चंबल नदी ने अपने दोनों किनारों की हजारों हेक्टेयर भूमि को काट कर
    ऊँचे-नीचे टीलों और गहरी घाटियों में बदल दिया है। इस क्षेत्र को कठिन मार्ग
    वाला क्षेत्र अर्थात बीहड़ कहते हैं। इनमें आना-जाना कठिन है। ठाकुर मलखान
    सिंह, पुतली बाई, फूलनदेवी आदि डाकू इन्हीं बीहड़ों में छिपे रहते थे।
  3. अंग्रेजी राज्य : स्वतंत्रता से पूर्व भारत पर अंग्रेजों का राज्य था। भारत के जिन
    क्षेत्रों पर अंग्रेजों का पूरा कब्जा था उन्हें अंग्रेजी राज्य का क्षेत्र कहते थे। देश के
    शेष भागों में ग्वालियर, इंदौर, जयपुर आदि राजाओं की रियासतें थीं। इनको
    रियासत कहते थे।
  4. शूद्र जाति : यहाँ शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने जाति प्रथा का विरोध किया है। वह
    मनुष्यों के बीच जाति के नाम पर कोई भेदभाव नहीं करते थे और सबको समान
    मानते थे।
  5. मेजिनी : मेजिनी इटली के राष्ट्रीय क्रांतिकारी नेता थे। उन्होंने अपने देश में
    स्वतंत्रता व जनतंत्र के लिए आंदोलन किया था। भारत व अन्य देशों के
    क्रांतिकारियों पर मेजिनी के विचारों का बहुत प्रभाव पड़ा था।
  6. भाई परमानन्द : भाई परमानन्द भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नेता थे। उनका भारत में
    तथा भारत से बाहर यूरोप, अमरीका व कनाडा में काम कर रहे भारतीय
    क्रांतिकारियों से संबंध था। लाहौर षड्यंत्र केस में भाई परमानन्द को फाँसी की
    सजा दी गई थी परन्तु बाद में वह कारावास की सजा में बदल दी गई थी।
  7. देशवासियों से निवेदन : (अ) देशवासियों से निवेदन शीर्षक पर्चा सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी
    नेता व विचारक शचीन्द्रनाथ सान्याल ने लिखा था। शचीन्द्रनाथ ने एक अन्य पर्चा

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शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ 113

‘रेवोल्यूशनरी” तथा बंदी जीवन, विचार-विनिमय, समाज व संस्कृति आदि पुस्तकें
भी लिखी थीं। ये पर्चे तथा पुस्तकें भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन तथा क्रांतिकारियों
की विचारधारा पर बहुत अच्छा प्रकाश डालती हैं। शचीन्द्रनाथ सान्याल को
काकोरी षड्यंत्र केस में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। इस केस में
रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी की सजा दी गई थी। “देशवासियों से निवेदन” पर्चा
ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसमें लिखा गया था : “क्रांतिकारी
आंदोलन आतंकवाद नहीं है, क्योंकि भारत में किसी भी क्रांतिकारी का यह
विश्वास नहीं है कि केवल आतंकवाद से ही स्वाधीनता प्राप्त हो सकती है।
यदि सरकारी अत्याचारों के विरुद्ध इक्का-दुक्का व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल का
प्रयोग करते हैं तो उसका अर्थ यह नहीं हुआ कि क्रांतिकारी निरे आतंकवाद
की लड़ाई लड़ना चाहते हैं।”
(ब) गेंदालाल दीक्षित प्रमुख क्रांतिकारी नेता थे। उन्होंने “मातृवेदी” और “शिवाजी
समिति” नामक क्रांतिकारी संगठन बनाए थे। रामप्रसाद बिस्मिल इन संगठनों के
सदस्य थे। दीक्षितजी व बिस्मिल मैनपुरी षड्यंत्र केस के अभियुक्तों में थे।
8. श्राद्ध : क्रांतिकारी आपसी पत्रव्यवहार में सांकेतिक शब्दों का प्रयोग करते थे, ताकि
पुलिस को उनके कार्यों का पता न चल जाए। यहाँ श्राद्ध शब्द का प्रयोग बैठक
के लिए किया गया है। दल में क्रांतिकारियों का नाम भी बदल दिया जाता था।
यहाँ रामप्रसाद बिस्मिल ने पत्र पर अपने गुप्त नाम रुद्र से हस्ताक्षर किए थे।
उर्दू शब्द हिन्दी में अर्थ
9. तुर्बत कब्र
10. माशूक प्रेमिका
11. एहसान उपकार
भावार्थ : यदि प्रेमिका मेरी कब्र पर फूल चढ़ाने आये तो फूल के बोझ से कब्र
दब सी जाती है। फिर भी उसका यह उपकार भी बहुत है।
12. बेवफा निष्ठाहीन
13. शहीदाने-शहीदों की इसका अर्थ है जैसे किसी मुर्गे की गर्दन
पर छुरी चला दी जाए।
14. वफ़ा निष्ठा
15. दीनो ईमां धर्म

114 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
16. सिजदे करना शीश नवाना
17. जल्लाद तलवार से गर्दन काटने वाला
भावार्थ : हम अपनी निष्ठा के लिए अपना बलिदान करने वाले हैं। हमारा धर्म
सारी दुनिया से अलग है। हमें जिससे प्यार है, हम उसी के पाँव पर शीश नवाते हैं
ताकि उसे हमारी गर्दन पर तलवार चलाने में कठिनाई न हो।
18. असगर यह कवि का उपनाम है
19. हरीम मस्जिद
20. इश्क प्रेम
21. हस्ती व्यक्तित्व
22. जुर्म अन्याय
भावार्थ : रामप्रसाद बिस्मिल किसी और कवि असगर के हवाले से कहते हैं कि
प्रेम के पवित्र स्थल में अपने अस्तित्व का अहं ही अपराध है। यहाँ पाँव रखना हो तो
कंधे पर सिर नहीं होना चाहिए।
भावार्थ : यहाँ मनुष्य कहता है कि हे भगवान जो भी कार्य हुए हैं वह सब आपने
किए हैं। मैंने कुछ भी नहीं किया है। जहाँ भी मैंने कोई कार्य किए हैं उनके सम्पन्न
होने का कारण यह है कि आप ही मेरे हृदय में बसे थे।
23. महसूस करना अनुभव करना
24. बादे हवा
25. फना मौत
26. असरार रहस्य
27. बारे बोझ
28. अलम गम
29. रंगे निशात आनन्द का रंग
30. अंदाज पता चल जाना
31. बेहिसी अन्दर से सुन्न हो जाना
32. वफ़ा निष्ठा
33. सदके न्यौछावर
34. नज़रे ज़फा करना तेरे ज़ुल्म पर मैं अपनी बलि देता हूँ
35. लाजिम आवश्यक
36. फ़िदा लुटा देना

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शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ 115
भावार्थ अब मैं मृत्यु के झोंके अनुभव करने लगा हूँ। यानि मुझ पर जीवन का
रहस्य खुलने लगा है। मैंने भरपूर गम भी देखा है और भरपूर खुशी भी। जो मैं अन्दर
से सुन्न होकर रह गया हूँ यह कोई अकारण घटना नहीं है। निष्ठा को दिल की बलि
चढ़ा दे और जीवन को प्रेमिका के अत्याचारों की भेंट चढ़ा दे क्योंकि प्यार में यह
आवश्यक है कि प्रेमी के पास जो कुछ भी है उसे वह लुटा दे।
37. बहरे समुद्र
38. फना मृत्यु
39. रब ईश्वर
40. बिस्मिल यह कवि का उपनाम है
41. जौहरे शमशीर तलवार की वीरता
42. क़ातिल हत्यारा
43. दाग़े नाकामी असफलता का चिह्न
भावार्थ : हे ईश्वर बिस्मिल की लाश को मृत्यु के सागर में जल्दी बहा दे क्योंकि
मेरी प्रेमिका की तलवार की वीरता मेरी लहू की प्यासी है। ऐ मेरी असफलता के दाग
मेरे दिल को सोच समझ कर फूंकना क्योंकि यह बुरी तरह उजड़ चुका है, फिर भी
इसमें अनेक इच्छायें सांस ले रही हैं। यहाँ प्रेमिका का प्रयोग देश की स्वतंत्रता के लिए
किया गया है।
हिन्दी शब्द अर्थ
44. सहस्रों हजारों
45. निज अपने
46. ईश ईश्वर
47. शत सौ
48. देशोपकारक देश की भलाई के लिए
भावार्थ : यदि देश की भलाई के लिए मुझे हजारों बार मरना पड़े तब भी मैं मृत्यु.
के इस कष्ट पर कभी ध्यान न दूँ। हे ईश्वर मेरा अपने देश भारत में ही जन्म
बार-बार हो और मैं हर बार अपने देश की भलाई के लिए ही अपने प्राण दूँ।
टिप्पणी : शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की भगवान से यह प्रार्थना सिद्ध करती है कि
वह महान देशप्रेमी थे। वह देश की स्वतंत्रता व भलाई के लिए एक बार नहीं हजारों
बार जन्म लेना और हजारों बार मरना चाहते थे। रामप्रसाद बिस्मिल की तरह मदन
लाल धींगरा आदि अनेक भारतीय क्रांतिकारियों ने जेलों, अदालतों या फाँसी के तख्तों

116 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
पर इस अनुपम और आदर्श देशप्रेम व बलिदान की भावनाओं को अभिव्यक्त किया
था। ऐसे देशप्रेमी स्वाधीनता सेनानियों के संघर्षों व बलिदानों से ही हमारा प्यारा देश
भारत स्वतंत्र हुआ। भारत के हर नागरिक को अपने हृदय में देशप्रेम व देशसेवा की
भावनाएँ भरनी चाहिए। हम अपने देश की सुरक्षा करके, उसकी एकता को कायम रख
कर और धर्म, सम्प्रदाय या जाति का कोई भेदभाव किए बिना देश की समस्त जनता
की भलाई के लिए कार्य करके ही ऐसा कर सकते हैं।
49. टिप्पणी : शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने अपने प्रिय साथी शहीद अशफाकउल्ला के
कार्यों पर गर्व प्रकट करते हुए देशवासियों से अपील की है कि सभी धर्मों व
संप्रदायों के लोग भेदभाव छोड़ कर और एक होकर देश की स्वतंत्रता के लिए
कार्य करें। वह साईमन कमीशन के विरोध में देश में प्रदर्शित की गई एकता को
आशा भरी निगाहों से देखते हैं और 1927 में मद्रास में होने वाले कांग्रेस के
अधिवेशन से भी आशा रखते हैं।
50. टिप्पणी : रामप्रसाद बिस्मिल के क्रांतिकारी साथियों भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद,
शिव वर्मा आदि ने गुप्त रूप से उन्हें गोरखपुर जेल से भगा ले जाने का प्रयास
किया था परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो सका। रामप्रसाद बिस्मिल को जेल में
इस बात की सूचना नहीं मिल पाई थी कि उनके साथी उन्हें जेल से भगा ले
जाने का प्रयास कर रहे हैं।
51. टिप्पणी : शहीद रामप्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी आंदोलन के अपने अनुभवों के
आधार पर देश के नौजवानों को सलाह देते हैं कि वे बम व पिस्तौल से
व्यक्तिगत हत्याएँ करने का मार्ग छोड़ कर पहले जनता को शिक्षित व संगठित करें
और देश की स्वतंत्रता के लिए खुले जन आंदोलनों में शामिल हों। रामप्रसाद
बिस्मिल की तरह रासबिहारी बोस, शचीन्द्र नाथ सान्याल, भगत सिंह तथा अनेक
अन्य क्रांतिकारियों ने जेलों में गहन अध्ययन करके खुले आंदोलन की महत्ता को
स्वीकार किया था। भगतसिंह-युग गुप्त आंदोलन से खुले आंदोलन में संचरण का
युग था। इस अवधि में क्रांतिकारी व्यक्तिगत हत्याओं की रणनीति पूरी तरह छोड़
तो नहीं पाए थे परंतु वे जन आंदोलन; जन संगठन, जन संघर्ष और समाजवाद की
विचारधारा स्वीकार करने की ओर बढ़ रहे थे। ये 'टेरो-सोशलिज्म' (आतंकवाद
समर्थित समाजवाद) की विचारधारा अपनाए हुए थे।