सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 124

शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ

  1. तोमरधार : मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िला में चंबल नदी के किनारे स्थित एक बड़े
    भूभाग को तोमरधार कहा जाता है। इसी क्षेत्र में चंबल नदी के किनारे बरवाई
    और रूअर नामक दो गाँव हैं। मुरैना ज़िला स्वाधीनता से पूर्व ग्वालियर की देशी
    रियासत में था। महिला डाकू पुतली बाई बरवाई गाँव की ही थी।
  2. बीहड़ : चंबल नदी ने अपने दोनों किनारों की हजारों हेक्टेयर भूमि को काट कर
    ऊँचे-नीचे टीलों और गहरी घाटियों में बदल दिया है। इस क्षेत्र को कठिन मार्ग
    वाला क्षेत्र अर्थात बीहड़ कहते हैं। इनमें आना-जाना कठिन है। ठाकुर मलखान
    सिंह, पुतली बाई, फूलनदेवी आदि डाकू इन्हीं बीहड़ों में छिपे रहते थे।
  3. अंग्रेजी राज्य : स्वतंत्रता से पूर्व भारत पर अंग्रेजों का राज्य था। भारत के जिन
    क्षेत्रों पर अंग्रेजों का पूरा कब्जा था उन्हें अंग्रेजी राज्य का क्षेत्र कहते थे। देश के
    शेष भागों में ग्वालियर, इंदौर, जयपुर आदि राजाओं की रियासतें थीं। इनको
    रियासत कहते थे।
  4. शूद्र जाति : यहाँ शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने जाति प्रथा का विरोध किया है। वह
    मनुष्यों के बीच जाति के नाम पर कोई भेदभाव नहीं करते थे और सबको समान
    मानते थे।
  5. मेजिनी : मेजिनी इटली के राष्ट्रीय क्रांतिकारी नेता थे। उन्होंने अपने देश में
    स्वतंत्रता व जनतंत्र के लिए आंदोलन किया था। भारत व अन्य देशों के
    क्रांतिकारियों पर मेजिनी के विचारों का बहुत प्रभाव पड़ा था।
  6. भाई परमानन्द : भाई परमानन्द भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नेता थे। उनका भारत में
    तथा भारत से बाहर यूरोप, अमरीका व कनाडा में काम कर रहे भारतीय
    क्रांतिकारियों से संबंध था। लाहौर षड्यंत्र केस में भाई परमानन्द को फाँसी की
    सजा दी गई थी परन्तु बाद में वह कारावास की सजा में बदल दी गई थी।
  7. देशवासियों से निवेदन : (अ) देशवासियों से निवेदन शीर्षक पर्चा सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी
    नेता व विचारक शचीन्द्रनाथ सान्याल ने लिखा था। शचीन्द्रनाथ ने एक अन्य पर्चा