नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनवमोऽध्यायः ३९
गजदन्तोऽवहित्थश्च वर्धमानस्तथैव च।
एते तु संयुता हस्ता मया प्रोक्तास्त्रयोदश ॥ १० ॥
असंयुक्त हस्तमुद्राएं २४ हैं। जिनके नाम हैं—( १ ) पताक, ( २ )
यहाँ केवल उनकी मुद्रा, जाति, वर्ण तथा देवता दिये जा रहे हैं। प्रत्येक मुद्रा की
उत्पत्तिकथा उस मुद्रा के लक्षण के नीचे पाद टिप्पणी में दे दी गई है तथा इसी
कारण इस अध्याय में टिप्पणियाँ भी संक्षिप्त ही रखी हैं।
मुद्रानाम देवता जाति वर्णं
( १ ) पताक ब्रह्मा ब्राह्मण श्वेत
( २ ) त्रिपताक शिव क्षत्रिय रक्त
( ३ ) कतरीमुख चक्रपाणि-विष्णु क्षत्रिय ताम्र
( ४ ) अर्धचन्द्र महादेव वैश्य धूम्र
( ५ ) अराल वासुदेव मिश्र रक्त
( ६ ) शुकतुण्ड मरीचि ब्राह्मण रक्त
( ७ ) मुष्टि चन्द्र शूद्र नील
( ८ ) शिखर कामदेव गान्धर्व धूलियाँ
( ९ ) कपित्थ पद्मगर्भ-विष्णु ऋषि श्वेत
( १० ) कटकामुख रघुराम देव ताम्र
( ११ ) सूचीमुख विश्वकर्मा देव श्वेत
( १२ ) पद्मकोष भार्गव यक्षकिन्नर श्वेत
( १३ ) सर्पशीर्ष शिव देव पीत
( १४ ) मृगशीर्ष महेश्वरशिव ऋषि श्वेत
( १५ ) कंगुल पद्म सिद्ध सुवर्ण
( १६ ) अलपद्म सूर्य गान्धर्व धूलि
( १७ ) चतुर सूर्य मिश्र धूलि
( १८ ) भ्रमर गरुड मिश्र घन (काला)
( १९ ) हंसास्य ब्रह्मा मिश्र श्वेत
( २० ) हंसपक्ष कामदेव अप्सरा नील
( २१ ) सन्दंश वाल्मीकि विद्याधर श्वेत
( २२ ) मुकुल चन्द्र संकीर्ण श्वेत
( २३ ) ऊर्णनाभ इन्द्र देव श्वेत
( २४ ) ताम्रचूड कूर्मावतार क्षत्रिय रक्त