मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 37, कुल 45 में से
संदर्भ में पढ़ें३८ मलूकदासजी की बानी
मेहर का जामा और तोमा१ भी मेहर का।
मेहर का आपा इस दिल को पिलाइये ॥ २ ॥
मेहर का आसा२ और तमासा भी मेहर का।
मेहर के महल बिच मेहरबान को मनाइये ॥ ३ ॥
कहता मलूक बन्दे कहर की लहर में।
कोटिक बह गये बिन मेहर मेहरबान किस राह से पाइये ॥४॥
( १२ )
अदम कबित्त का जिसकी कबिताई करूँ,
याद करूँ उसको जिन पैदा मुझे किया है ॥ १ ॥
गर्भ बास पाला आतस में नहिं जाला,
तिसको मैं बिसारूँ तो मैं किसकी आस जिया हूँ ॥ २ ॥
नालत इस दुनियाँ को जो दीन से बेदीन करै,
खाक ऐसे खाने जिन ईमान बेंच लिया है ॥ ३ ॥
कहता मलूक मैं बिकाना हरि मूरत पर,
जिस के दीदार से जुड़ाता मेरा हिया है ॥ ४ ॥
( १३ )
सुपने के सुख देख मोह रहे मूढ़ नर,
जानत हमारे दिन ऐसहिं बिहायँगे ॥ १ ॥
क्या करेंगे भोग अच्छी सुन्दरी रमेंगे नित्त,
छाँह कौ लै चारि जून खूँद खूँद खायँगे ॥ २ ॥
सीकरा सो काल है कलसरी३ सी लपेट लेहै,
चंगुल के तले दबे चिचयायँगे ॥ ३ ॥
कहत मलूकदास लेखा देत होइहै दुक्ख,
बड़े दरबार जाय अन्त पछितायँगे ॥ ४ ॥
( १४ )
दीन-दयाल सुनी जब तैं तब तैं हिया में कछु ऐसी बसी है।
तेरो कहाय के जाउँ कहाँ मैं तेरे हित की पट४ खैंच कसी है ॥१॥
(१) तोंबा। (२) डण्डा, छड़ी। (३) गौरैया चिड़िया। (४) पटका।