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सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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पृष्ठ 36

कबित्त २७
रहम की नजर कर कुरहम दिल से दूर कर ।
किसी के कहे सुने चुगलो मत मानिये ॥ ३ ॥
कहता मलूक मैं रहता पनाह तेरी ।
दाता दयाल मुझे अपना कर जानिये ॥ ४ ॥
( ६ )
गाफिल है बंदा गुनाह करै बार बार ।
काम पड़े साहेब धौं कैसा फरमावैगा ॥ १ ॥
आखिर जमाने को डरता है मेरा दिल ।
जब जबरील१ हाथ गुर्ज लिये आवैगा ॥ २ ॥
खाब सी दुनियाँ दिल को न करै सात पाँच ।
काली पीली आँखें कर फिरिस्ता दिखलावैगा ॥ ३ ॥
कहता मलूक किसी मुल्क में बचाव नहीं ।
अब कीजै किरपा तब मेरे मन भावैगा ॥ ४ ॥
( १० )
भील कद करी थी भलाई जिया आप जान ।
फील कद हुआ था मुरीद कहु किसका ॥ १ ॥
गीध कद ज्ञान की किताब का किनारा छुवा ।
व्याध और बधिक निसाफ२ कहु तिसका ॥ २ ॥
नाग कद माला लैके बंदगी करी थी बैठ ।
मुझको भी लगा था अजामिल का हिसका ॥ ३ ॥
एते बदराहों को बदी करी थी माफ ।
जन मलूक अजाती पर एतो करी रिस का ॥ ४ ॥
( ११ )
मेहर की कफनी औ कुताह भी मेहर का ।
मेहर का मुतंगा३ इस कमर में लगाइये ॥ १ ॥
(१) मौत का फिरिश्ता। (२) इन्साफ। (३) मूँझ की करधनी जो साधू लोग पहिनते हैं।