मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमिश्रित २१
॥ मिश्रित ॥
॥ शब्द १ ॥
अब मैं अनुभव पदहिं समाना ॥टेक॥
सब देवन को भर्म भुलाना, अविगति हाथ बिकाना ॥ १ ॥
पहिला पद है देई देवा, दूजा नेम अचारा ।
तीजे पद में सब जग बंधा, चौथा अपरम्पारा ॥ २ ॥
सुन्न महल में महल हमारा, निरगुन सेज बिंछाई ।
चेला गुरु दोउ सैन करत हैं, बड़ी असाइस१ पाई ॥ ३ ॥
एक कहै चल तीरथ जइये, (एक) ठाकुरद्वार बतावै ।
परम जोति के देखे संतो, अब कछु नजर न आवै ॥ ४ ॥
आवा गवन का संसय छूटा, काटी जम की फाँसी ।
कह मलूक मैं यही जानिके, मित्र कियो अबिनासी ॥ ५ ॥
॥ शब्द २ ॥
सबहिन के हम सबै हमारे । जीव जंतु मोहिं लगैं पियारे । १ ।
तीनों लोक हमारी माया । अंत कतहूँसे कोई नहि लाया । २ ।
छत्तिस पवन हमारी जात । हमहीं दिन और हमहीं रात । ३