सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 45 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 29

अनुभयं उपजा भय गया, हद तज बेहद लागा ।
घट उँजियारा होइ रहा, जब आतम जागा ॥ ५ ॥
सब रंग खेलै सम रहै, दुबिधा मनहिं न आनै ।
कह मलूक सोइ रावला, मेरे मन मानै ॥ ६ ॥

॥ शब्द १४ ॥

बाजीगरै पसारी बाजी । भूल भुलायो सब का जी ॥१॥
देखा मैं मुल्ला बौराना । नाहक पढ़े किताब कुराना ॥२॥
है हजूर वह दूर बतावै । बाँग जिकिर धौं किसे सुनावै॥३॥
रोजा करै निमाज गुजारै । उरुस¹ करै और आतम मारै ॥४॥
वो भी मुल्ला बड़ा कसाई । जिन तुझको तदबीर सिखाई ॥५॥
है बेपीर औ पीर कहावै । करि मुरीद तदबीर सिखावै ॥६॥
ऐसा मुर्शिद कबहुँ न करिये । खून करावै तिस तें डरिये ॥७॥
अपने मूड़ अजाब चढ़ावै । पैगम्बर का धोखा लावै ॥८॥
ऐसा मुर्शिद करै जो कोई । दोजख जाय परैगा सोई ॥६॥
दरदमंद दुरवेस कहावै । जो मोहिं राम की रीझ बतावै ॥१०॥
साहेब को बैठे लौ लाई । काहू की नहिं करै तमाई२ ॥११॥
पाँच तत्त से रहै नियारा । सो दुर्वेस खोदा का प्यारा ॥१२॥
जो प्यासे कों देवै पानी । बड़ी बंदगी मोहमद मानी ॥१३॥
जो भूखे को अन्न खवावै । सो सिताब³ साहेब को पावै॥१४॥
अपने मन तदबीर कराई । साहेब के दर होय बड़ाई ॥१५॥
जो फकीर ऐसा कोइ होय । फिरै बेबाक न पूछे कोय ॥१६॥
छोड़ै गुस्सा जीवत मरै । तेहिं इजराइल सिजदा करै॥१७॥
अपना सा दुख सब का जानै । दास मलूका ता को मानै ॥१८॥


(१) नियाज, कुर्बानी । (२) लालच । (३) जल्द ।