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सर्वकोश
जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चेतावनी ३६
छूटि मैलं होय निर्मल, नूर नीर अन्हाव ।
जगजीवन निर्बान होवै, मिटै सब दुचिताव ॥ ४ ॥
॥ शब्द २१ ॥
आपु ते डारत आपु नसाई ।
कहूँ बिबाद कीन्ह भक्तन ते, पांछे मन पछिताई ॥ १ ॥
काहू क दोष देइ नहिं कोई, धाइ जरै जो जाई ।
साधु बिबेकी दाया राखत, रामहिं दरद न आई ॥ २ ॥
गर्व-प्रहारी गुमान न राखै, करै जानि जो जाई ।
रावन औ हरनाकुस मारा, कछू बिलम्ब न लाई ॥ ३ ॥
नर केतान कवनि गिनती यहँ, कीट कि नहिं समताई ।
जो भक्तन ते बैर कियो है, अंत रसातल जाई ॥ ४ ॥
नहिं मानै तौ बूझति ले मन, कहत अहौं गोहराई ।
जगजीवन जे दीन लीन मन, तिन पर सदा सहाई ॥ ५ ॥
॥ शब्द २२ ॥
दुनियाँ पार परिपंच न जानी ।
नहिं नय चलहि गुमान लादे, बोलहिं बिष रस बानी ॥ १ ॥
सिद्ध साध कै निंदा करि, नहिं