वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
प्रारंभिक पृष्ठ व विषयानुक्रमणिका
डॉ० राकेश शास्त्री
सदानन्दयतिविरचितः
वेदान्तसारः
(विस्तृत भूमिका, पदच्छेद, अनुवाद, विशेष एवं
डायग्राम्स सहित 'चन्द्रिका' हिन्दी व्याख्या)
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परिमल संस्कृत ग्रन्थमाला- ६४
वेदान्तसार
(विस्तृत भूमिका, पदच्छेद, अनुवाद, विशेष एवं डायग्राम्स सहित
‘चन्द्रिका’ हिन्दी व्याख्या)
व्याख्याकारः
डॉ. राकेश शास्त्री
अध्यक्ष, संस्कृत-विभाग
हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय
बाँसवाडा (राज०)
परिमल पब्लिकेशन्स
दिल्ली
प्रकाशक :
परिमल पब्लिकेशन्स
२७/२८, शक्ति नगर
दिल्ली - ११०००७
फोन - २७४४५४५६
E-mail : [email protected]
URL : www.parimalpublication.com
द्वितीय संस्करण २००४
ISBN : 81-7110-217-8
मूल्य - १००.०० रुपये
मुद्रक :
हिमांशु प्रिन्टर्स
मेन यमुना विहार रोड़
मौजपुर, दिल्ली-९२
PARIMAL SANSKRIT SERIES NO. 64
VEDĀNTASĀRA OF SADĀNANDA
Introduction, translation, 'Chandrika' Hindi commentary with
various notes and diagrams
Dr. Rakesh Shastri
Head, Dept. of Sanskrit
H. J. Govt. Girls College
Banswara (Raj.)
PARIMAL PUBLICATIONS
DELHI
Published by
Parimal Publications
27/28, Shakti Nagar
Delhi 110007
Phone : 2744 5456
E-mail : [email protected]
URL : www.parimalpublication.com
Second Edition 2004
Price Rs. 100.00
ISBN : 81-7110-217-8
Printed By
Himanshu Printers, Main Yamuna Vihar Road
Maujpur Delhi-92
समर्पण
सरल एवं सौम्य, विधिविशेषज्ञ, परमश्रद्धेय, महामहिम
श्री अंशुमान सिंह
राज्यपाल, राजस्थान
के
कर-कमलों में सादर
राकेश शास्त्री
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यत्किञ्चित्
वेदान्तसार वेदान्तदर्शन का प्रकरणग्रन्थ है। इसके 38 खण्डों में ग्रन्थकार
ने वेदान्तदर्शन के सिद्धान्तों का सरलरूप में प्रतिपादन करने का प्रयास
किया है। इससे पूर्व ब्रह्मसूत्रादि में प्रतिपादित वेदान्त के सिद्धान्तों को
समझना सामान्य व्यक्ति के लिए दुष्करकार्य हो गया था। इसीकारण आचार्य
सदानन्द ने वेदान्तसार की रचना की आवश्यकता अनुभव की जो अत्यन्त
लोकप्रिय हुई। इस पुस्तक की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि
वेदान्तदर्शन के अध्ययन हेतु प्रायः सभी विश्वविद्यालयों ने इसे स्नातकोत्तर
पाठ्यक्रम में निर्धारित किया हुआ है।
यद्यपि इस ग्रन्थ पर अनेक विद्वानों ने अपनी लेखनी चलाकर इसे
पाठकों के लिए सुगम बनाने का प्रयास किया है, तथापि अपने विद्यार्थी
जीवन से ही इसे नूतनशैली में प्रस्तुत करने की मेरी तीव्र अभिलाषा थी।
इससे पूर्व प्रकाशित सांख्यकारिका के संस्करण को छात्रसमुदाय में जो
अपनत्व एवं प्रशंसा प्राप्त हुई, साथ ही उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान ने
उसकी सरल डायग्राम पद्धति की सराहना करते हुए उसे साहित्य पुरस्कार
प्रदान किया, इन दोनों बातों से उत्साहित होकर वेदान्तसार की व्याख्या भी
उसी शैली से प्रस्तुत करने का मैंने संकल्प किया।
ईश्वर की असीम अनुकम्पा से आज यह पुस्तक आपके हाथ में है
इससे न केवल मैं रोमांचित हूँ, अपितु असीम आनन्द का अनुभव कर रहा
हूँ। निश्चय ही इसे भी पूर्व प्रकाशित पुस्तकों के समान ही विद्वानों के हृदय
में स्थान प्राप्त होगा।
यहाँ 108 पृष्ठों की विस्तृत भूमिका में जहाँ वेदान्त-विषयक अनेक
जिज्ञासाओं का समाधान किया गया है। वहीं मूलग्रन्थ के रूप को सुरक्षित
रखते हुए विषय को स्पष्ट किया गया है। सरलता की दृष्टि से मुख्य
खण्डों को उपखण्डों में विभाजित किया गया है। प्रखण्डों के विभाजन में
विषय-विशेष के सर्वांगीण विवेचन की दृष्टि ही प्रमुख रही है।
पूर्व प्रतिपादित विषय को अग्रिम विषय के साथ जोड़ने के लिए
अवतरणिका, पुनः पदच्छेद एवं हिन्दी अनुवाद के बाद 'चन्द्रिका' हिन्दी
व्याख्या में विषय का सर्वांगीण एवं विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
साथ ही विशेष शीर्षक में तत्सम्बन्धित अनेक महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का
उल्लेख किया है। तत्पश्चात् उस खण्ड के अभिप्राय को डायग्राम बनाकर
अध्येता जिज्ञासु के लिए विषय को सहज हृदयंगम कराना ही मुख्य उद्देश्य
है।
मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि अन्य पुस्तकों के समान
ही यह पुस्तक भी विद्वत्समुदाय में लोकप्रिय होगी एवं छात्रों की
आवश्यकता को पूर्ण करेगी।
इस पुस्तक के लेखन में अब तक प्रकाशित अनेक विद्वानों की टीका,
एवं व्याख्याओं से सहायता ली गई है। अतः उनके विद्वान् लेखकों के प्रति
श्रद्धा से अवनत होकर आभार व्यक्त करता हूँ। पुस्तक को और अधिक
उपयोगी बनाने के लिए विद्वानों के सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।
इति शुभम्।
14 मार्च, 2002 राकेश शास्त्री
1-जे-38, हाउसिंग बोर्ड कालोनी
बांसवाडा (राज०)
02962-250026
विषयानुक्रमणिका
(i) दो शब्द
(ii) समर्पण
(iii) विषयानुक्रमणिका
(iv) भूमिका 1
(क) दर्शन से अभिप्राय 1
(ख) दर्शन का विकास 1
(ग) भारतीयदर्शन एक परिचय 2
(घ) वेदान्तदर्शन के मूल स्रोत 8
(ङ) उपनिषदों में वेदान्तदर्शन 9
(च) वेदान्तदर्शन के प्रमुख आचार्य (57) एवं उनके ग्रन्थ 11
बादरायण, आत्रेय, आश्मरथ्य, औडुलोमि, कार्ष्णाजिनि, काशकृत्स्न,
जैमिनि, बादरि, भर्तृप्रपञ्च, भर्तृमित्र, भर्तृहरि, उपवर्ष, बौधायन, टङ्क,
ब्रह्मनन्दी, ब्रह्मदत्त, भारुचि, द्रविड़, गौडपाद, गोविन्दपाद, शङ्कराचार्य,
पद्मपाद, मण्डनमिश्र, सर्वज्ञात्ममुनि, वाचस्पतिमिश्र, श्रीकृष्णमिश्रयति,
प्रकाशात्मयति, अद्वैतानन्द, श्रीहर्षमिश्र, आनन्दबोध, अमलानन्द,
चित्सुखाचार्य, शङ्करानन्द, विद्यारण्यमुनि, आनन्दगिरि, प्रकाशानन्दाचार्य,
मल्लनाराध्य, नृसिंहाश्रम, रंगराजाध्वरी, अप्पयदीक्षित, भट्टोजिदीक्षित,
सदाशिव ब्रह्मेन्द्र, नीलकण्ठ सूरि, सदानन्द योगीन्द्र, नृसिंह सरस्वती,
रामतीर्थ, आपदेव, मधुसूदन सरस्वती, धर्मराज अध्वरीन्द्र, गोविन्दानन्द,
रामानन्द सरस्वती, सदानन्द यति, ब्रह्मानन्द सरस्वती, अच्युत कृष्णानन्द,
महादेव सरस्वती, सदाशिवेन्द्र सरस्वती, आयन्नदीक्षित।
(छ) वेदान्तदर्शन के प्रमुख सिद्धान्त 44
(1) ब्रह्म 44
(2) आत्मा 48
(3) अज्ञान/माया 49
(4) अज्ञान के भेद 52
(5) अज्ञान की शक्तियाँ 53
(6) ईश्वर 54
(7) जीव 56
(8) जीव की चार अवस्थाएँ 57
(9) जगत् 59
(10) शरीरत्रय (कारण, सूक्ष्म, स्थूल) 60
(11) पञ्चकोश 67
(12) पञ्चीकरण प्रक्रिया 69
(13) त्रिवृत्करण 71
(14) प्रमाण 72
(15) कार्यकारणसिद्धान्त 80
(16) समष्टि-व्यष्टि सिद्धान्त 82
(17) सत्ता के त्रिविधरूप 84
(18) जीव की अवस्थाएँ 86
(19) सृष्टि प्रक्रिया 88
(20) अध्यारोप-अपवाद 92
(21) सविकल्पक निर्विकल्पक समाधि 94
(22) जीवन्मुक्त का लक्षण 95
(23) आत्मविषयक विभिन्न मत 98
(24) अरुन्धती न्याय 101
(25) महावाक्य 102
(अ) तत्त्वमसि
(ब) अहं ब्रह्मास्मि
वेदान्तसार मूल एवम् 'चन्द्रिका' हिन्दी व्याख्या
मङ्गलाचरण 108
परिभाषा 116
अनुबन्ध चतुष्टय 119
अज्ञान-निरूपण 149
प्राज्ञ-ईश्वर निरूपण 164
तुरीय निरूपण 168
शक्तिद्वय-निरूपण 173
कारण-निरूपण 178
सूक्ष्म-शरीर 185
पञ्चीकरण प्रक्रिया 201
स्थूलसृष्टि-निरूपण 204
स्थूलमहाप्रपञ्च 212
चार्वाकादिमत निराकरण 216
अपवाद-निरूपण 224
महावाक्यार्थ-निरूपण 232
अनुभववाक्यार्थ-निरूपण 249
समाधि-निरूपण 265
जीवन्मुक्त-निरूपण 278
परिशिष्ट
(क) पुस्तक में दिये गए डायग्राम्स की सूची 294
(ख) सहायकग्रन्थ-सूची 297
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