संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
70. वच्चोंको कैसे छुलाना चाहिये ?
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सन्तति-शास्त्र ।
२. कानके रोग ।
१. जो माताएँ सोते हुए बच्चेको दूध पिलाती हैं उन बच्चों-में दूध कानमें आ जाता है इससे अनेक रोग हो जाते हैं।
( श० क० )
१ बहरापन २ कानका बहना ३ कानका नासूर ४ परदेका मोटा पड जाना ५ परदेकी सूजन इत्यादि ।
३. शरीरमें गरमीका परिवर्तन ।
१. माताके पास सोनेसे बच्चेमें माताके शरीरकी गरमी-का प्रवेश हो जाता है । जो गरमी बच्चोंमें होती है उससे अधिक पहुँचनेमें हानि है । जब कभी माताको ज्वर आता है तो वह बच्चेको अलग नहीं सुलाती । पास सोने और ज्वरका दूध पीनेसे बच्चेको भी ज्वर आ जाता है ।
४. श्वाँस-रोग ।
१. पास सोनेवाले बच्चोंमें माताके श्वाँस रोगका संचार हो जाता है । इस कारण कि माताके पेटसे निकली हुई श्वाँस बच्चेकी श्वाँसके साथ मिल कर अन्दर पहुँचती है और वहाँ फेफड़ोंको खराब कर देती है । यह दशा उस समय होती है जब कि माता और बच्चा दोनों मुँह बन्द करके जाड़ेमें एक लिहाफके अन्दर सोते हैं ।
अतएव बच्चोंको ऐसी थान डालनी चाहिये कि जिससे वे रातमें खूब सोवें । दिनमें इतना न सुलाना चाहिये कि रातमें खूब जागें । यदि इनको रातमें नींद न आवे तो वो वातें समझनी चाहिये—भूख और कुपच । इस प्रकार अलग न सोनेसे बच्चे
बच्चा होनेके कितने दिन बाद गर्भधारण होना चाहिये । २७९
माया रोगी रहते हैं । माताओंको इन बातोंपर ध्यान देना जरूरी है ।
(७१) बच्चा होनेके कितने दिन बाद गर्भधारण होना चाहिये ?
यह एक बड़ा प्रश्न है । लोग इसपर बहुत कम ध्यान देते हैं । लोगोमें इस बातकी विवेचना ही नहीं कि संयोग बच्चा होनेके कितने दिनों बाद होना चाहिये ? इससे तो यह बात कहीं दूर है । लोग यह विचार करते हैं कि जितने बच्चे हो उतना ही अच्छा; परन्तु जल्दी जल्दी सन्तान होना अच्छा नहीं । इस विषयमें अनेक मत हैं ।
१. वैद्यकका मत ।
१. जब बच्चोंको मातासे कुछ भी वास्ता न रहे, वह अच्छी तरह अन्न खाकर जी सके, इसके बाद दूसरी सन्तान होनी चाहिये । ( श० क० )
२. बच्चा होनेके पाँच वर्ष बाद दूसरी सन्तान होनी चाहिये । ( रतिशास्त्र )
२. धर्मशास्त्रका मत ।
१. बच्चा तीन वर्षोंका पूरा होनेके बाद दूसरा गर्भाधान होनी चाहिये । ( वा० य० )
लोग कामवश होकर जल्दी संयोग कर बैठते हैं और इसी कारण बच्चा पैदा होनेके कुछ ही दिनों बाद गर्भ रह जाता है । इसमें अनेक दोष हैं । स्त्रीके श्रवयवमें विगाड़ हो जाता है । गोदका बच्चा दूध उत्तम और ठीक तौरसे नहीं पीने पाता । बच्चा जिस समयतक दूध पीता है उस समयतक माताके