संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
68. दूध कैसे विगडता है ?
२८८
सन्तति-शास्त्र ।
अनेक प्रकारकी असावधानियोंने दूषित हो जाना है और माताओंको जरा भी पता नहीं चलता। बच्चोंके रोगी होनेपर चिकित्सकोंकी जरा भी दृष्टि दूषपर नहीं जाती। अनेक विद्वानोंकी राय है कि दूषके विगड़नेसे ही बच्चोंमें अधिकांग रोग उत्पन्न होते हैं, जिसके अनेक कारण हैं।
१. वैयक्तिका मत।
- १. माता श्रववा धावके भारी आहार और दूषित व्यवहार से शरीरमें दोष उत्पन्न होकर दूष विगाड़ देते हैं।
( श० क० ) - २. अनिर्भयुत, शोक, चिन्ता, भय और क्रोधसे । ( श० क० )
- ३. माताके अनेक प्रकारके रोगोंसे । ( श० क० )
- ४. दूधमें, घी, खाड़, मांस और नमकका अंश कम हो जानेसे। ऐसा उस समयमें होता है जब कि स्त्री की दूध इत्यादि पौष्टिक पदार्थ न खावे। ( रतिशास्त्र )
- ५. पैंतीस वर्षकी श्रवस्थाके ऊपरवाली माताका दूष हलका पड़ जाता है।
गर्भवती स्त्रीका दूष तीन मानके बाद विगड़ जाता है। ( श० क० ) - ६. अधिक मेहनत करनेसे दूधमें मांसका अंश कम हो जाता है। ( रतिशास्त्र )
- ८. बुरी शौपधियोंके बानेसे दूषके सारे अंश दूषित हो जाने हैं।
- ९. आहार और विहारसे वात, पित्त और कफ अलग अलग या एक साथ विगड़ कर दोष उत्पन्न कर देते हैं।
( श० क० )
इस प्रकारसे विगड़े हुए दूधमें अनेक लक्षण प्रगट होते हैं।
दूध कैसे विगाड़ता है ?
२६६
१. यदि दूधका रंग काला अथवा लाल रंगका कसैला जिसमें कुछ वास आती है, अत्यंत रुखा, तरल, भागदार हलका जिसमें बच्चों को रुस करनेकी शक्ति न हो, दुबला करनेवाला, जिसके पीनेसे वायु उत्पन्न हो इस प्रकारका दूध वात-दोषसे दूषित होता है।
(च० श० अ० ८ श्लो० १०८)
२. यदि दूधका रंग काला, नीला, पीला और तांबेके रंगका कड़ुआ खड़ा या चरपरा हो और गंध मुग्दे या क्षधिर-किसी हो, अत्यन्त गरम पित्त-योग उत्पन्न करनेवाला, ऐसा दूध पित्त-दोषसे दूषित होता है।
(च० श० अ० ८ श्लो० १०९)
३. यदि दूधका रंग अत्यन्त सफेद अत्यन्त मीठा और नमकीन हो जिसमें घी, तेल, वसा और मजाके समान गंध तंतु युक्त अथवा पानीमें डालनेसे झूब जावे जिससे कफ पैदा हो, ऐसा दूध कफसे दूषित होता है।
(च० श० अ० ८ श्लो० ११०)
४. यदि वात, पित्त और कफ तीनों दोषके लक्षण मिले तो सन्निपातसे दूषित और यदि दो प्रकारके दूषित लक्षण मिले तो द्विदोषसे दूषित जानना चाहिये। (भा० वा०)
इस प्रकारके दूषित दूध पीनेसे बच्चोंमें अनेक लक्षण प्रगट होते हैं।
१. शरीरकी तौलका कम होना नींद कम आना, उल्टी होना, शरीरका दुबलापन, बलगम पैदा होना, भागदार हरे दस्त आना, आंतोंमें विगाड़, अतिसार, दस्तमें फटा दूध निकलना, पाचन-शक्तिका विगाड़, बराबर कै दस्त और हिचकीका होना इत्यादि।
२५०
सम्बन्धित-शाल ।
पैसे लक्ष्योंसे बच्चोंको उंगी समझना चाहिये। बच्चोंका वजन कम होनेकी जांच नौलसे हो सकती है। जब विगड़े हुए दूधका अस्तर वजन पर पड़ता है तब दूध थोड़ा सा ज्वर जल्द रहता है। मोटी वाजी खियामें प्रायः गाढ़ा दूध होता है। इससे स्पष्ट अचानक बड़े और दूधसे भरे रहते हैं। दूध गाढ़ा क्यों हो जाता है? इसका कारण तमदार चर्बी बढ़ानेवाले पुष्ट पदार्थोंका संचय है। इसी प्रकार कम और पतले दूधका विकार भी होता है। गाढ़े दूध होनेपर मावोंका हलका भोजन करना चाहिये। पौष्टिक पदार्थ बढ़ा देना चाहिये। बहुत दिनो तक पिलानेसे भी पौष्टिक पदार्थ बढ़ा देना चाहिये। ज्यादा दिन दूध पिलानेसे अनेक रोग हो जाते हैं। इन्सानिये ज्यादा दिन दूध पिलानेसे बड़े बंधनेके पिलाता उचम माना है। जितने दिनों दूध पीनेवाले पीनेवा उतनी ही देर रजस्वला होनेमें होगी। इस कारण कि वह अथ रज दनमें सहाय होता है। यही कारण है कि दूध पिलावेवाली मावोंको रज कुछ कम निकलता है। खियोंको हर समय यह विचार रखना चाहिये कि वे ऐसी असावधानियोंसे बचे कि जिनसे दूध दूधित हो जाता है। अपना दूध निकाल कर क्षय परीक्षा कर लेनी चाहिये !
जो दूध पानमें डालनेसे मिल जावे, जिसका रंग कुल्हे पीलापन लिये हो, जो जलमें धारोंको न छोड़े हलका और न जमनेवाला ऐसा दूध शुद्ध होता है।
पैनी दशामें बड़ी कठिनाई पड़ती है, जब कि गोदिका बच्चा दूध पीता हो और गर्म रह जावे, ऐसे समयका दूध हानि पहुँचाता है केवल गोदके ही बच्चोंको नहीं, गर्मके बालक
सन्तति-शास्त्र ।
२७१
( ७२ )
बच्चोंके दाँत निकलते समयकी सावधानियाँ
बच्चोंके दाँत प्रायः छठे-सातवें महीनेसे निकलने आरम्भ होते हैं । इस समय बच्चोंको कई प्रकारके कष्ट होते हैं, जैसे—
१. मसूढ़ोंमें सूजन और दर्द होना ।
२. लारका अधिक बहना ।
३. हल्का ज्वर (बुखार) आना ।
४. दस्त (पतले पाखाने) लगना ।
५. चिड़चिड़ापन और बेचैनी होना ।
उपाय और सावधानियाँ :
१. मसूढ़ोंपर दिनमें दो-तीन बार शहद या सुहागेका फूला शहदमें मिलाकर धीरे-धीरे मलना चाहिये ।
२. बच्चेको चबानेके लिये साफ और कड़ा खिलौना या गाजर आदि देनी चाहिये ।
३. यदि दस्त अधिक हों तो सौंफ और अतीसका काढ़ा या घुट्टी देनी चाहिये ।
४. बच्चेके पेटको साफ रखना चाहिये और सुपाच्य भोजन देना चाहिये ।
५. दूध स्वच्छ और ताजा ही देना चाहिये ।