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संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

43. गर्भमें क्या है ?

गर्भमें क्या है ?

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१. वन अर्थात् गोल आकारका गर्भ मालूम हो, तो पुत्रका गर्भ समझना चाहिये।

२. पिंड अर्थात् लम्बे आकारकी मांसपेशी हो तो कन्या का गर्भ जानना चाहिये।

३. अर्बुद अर्थात् गोल, कुछ चिपटा हुआ पिंड सरीखा हो, तो नपुंसकका गर्भ समझना चाहिये।

वागभट्ट और भावप्रकाशमें भी ऐसा ही कहा है।

३. स्त्रीकी सबसे प्रायः अर्थात् धारणादि सब क्रियाएँ वायु अंगसे अधिक हों, गर्भवतीको पुरुष संग अप्रिय मालूम हो, शयन, पान, भोजन, शील और चेष्टा सब अत्यन्त स्त्री जनोको जो उचित हैं वैसी ही हो, वायु पसलीकी तरफ गर्भका संचय अधिक हो, गर्भ वतीके आकार का न हो, वायु स्तनसे पहले दध निकले, तो ऐसे गर्भसे कन्या उत्पन्न होती है।

४. प्रथम दहिने स्तनमें दूध आना, पहले दहिने अंगसे चलना और काम करना, जैसे चलनेमें दहिना पैर पहले उठाना और काम करनेमें पहले दहिना हाथ बढ़ाना, पुरुष नामावली वस्तुओंकी इच्छा करना और दहिनी कुक्षिका ऊँचा होना, इन लक्षणोंसे पुत्र होता है।

(वा०श० अ० १ श्लो० ७०-७२)

५. नपुंसक सन्तानके लक्षण—

१. ऊपर कहे हुए कन्या और पुत्रके लक्षण मिले होनेसे नपुंसक सन्तान उत्पन्न होती है। (इस बातको चरक, सुश्रुत और वागभट्ट तीनोंने माना है।)

२. पेटके दोनों पँसवाड़े ऊँचे होने तथा पेट आगेको निकलनेसे।

(शु० श० अ० ३ श्लो० ४९)

१६०

सन्तति-शास्त्र ।

३ पेट के बीचका भाग ऊँचा होनेसे । ( वा० श० अ० १ )

६. जोड़ली—जोड़ुर्घा सन्तानके लक्षण ।

१. पेट दोनों तरफसे उभरा और बीचमें नीचा होनेसे दो सन्तान होती हैं । ( सु० श० ग्र० ३ श्लो० ५० )

२. एक ओर श्रथात् दहिनी ओर पेटका उभार और बाई ओर जरा नीचे होनेमें। एक कन्या एक पुत्र होता है । ( श० क० )

३. दोनों ओर बराबरके उभारसे यदि अधिक उभार हो, तो दोनों पुत्र, यदि उभार नीचा हो, तो दो कन्याएँ होती हैं । ( श० क० )

४ दोसे अधिक सन्तान होनेवालीके लक्षण ।

१ जो लक्षण दो बच्चे होनेवालीके होते हैं वेही कई बच्चे होनेवालीके भी होने हैं । ( श० क० )

इस प्रकार गर्भके बालककी परीक्षा हों सकती हैं ।

(४४) मूढ़गर्भ ।

गर्भकी उत्पत्तिका स्थान गर्भाशय है । यह एक ऐसी पवित्र भूमि है कि जहाँसे बच्चा नौ मास निवास करके बाहर होता है । गर्भ दो प्रकारका होता है। सच्चा और भूटा । सच्चा गर्भ वह है कि जिससे बच्चा उत्पन्न होता है । भूटा गर्भ वह है कि जिसमें बच्चा नहीं रहता, केवल मांसपिंड होता है। ऐसे गर्भको ( False Pregnancy ) कहते हैं ।

जब किसीको भूटा गर्भ होता है, तो स्त्रियाँ उसे सच्चा गर्भ समझ लेती हैं । ऐसा इस कारण होता है । कि जितने लक्षण सच्चे गर्भमें होते हैं वे ही भूटे गर्भमें भी होते हैं । जैसे रजो-धर्मका बन्द हो जाना, जी मचलाना, कै होना, भोजनमें श्रद्धा,