संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
37. सन्तानपर दूषित रजका प्रभाव
सन्तानपर दूषित रजका प्रभाव ।
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जाता है, तब वे अवयव विकृत अर्थात् टेढ़े पड़ जाने हैं। (श०क०)
५. वायुसे दूषित रजकी सन्तान लालीमें कुछ कालापन लिये होता है। (श०क०)
६. पित्तसे दूषित रजकी सन्तान कुछ पीलेपनमें कालापन लिये हुए और अल्पजीवी होती है। (श०क०)
७. कफसे दूषित रजसे उत्पन्न सन्तान सफेदीमें पीलापन लिये होती है। (श०क०)
८. खूनसे दूषित रजकी सन्तानका वर्ण लाल होता है और वह अल्पजीवी होती है। (श०क०)
९. कफ और वायुसे दूषित रजकी सन्तान अल्पजीवी और रोगयुक्त होती है। (श०क०)
१०. पित्त और वायुसे दूषित रजकी सन्तान रोगयुक्त और अल्पजीवी होती है। (श०क०)
११. पित्त और कफसे दूषित रजकी सन्तान टेढ़े अंगवाली होती है। (श०क०)
१२. वात, पित्त और कफसे दूषित रजसे प्रायः सन्तान उत्पन्न नहीं होती। गर्भापात हो जाता है। (श०क०)
१३. कुमारी कन्याओंमें बाल-प्रदर माताके रज-विकारसे होता है। (रतिशास्त्र)
१४. यदि माताका थोड़ा रज गर्भाधान समयमें गिरे, तो पेशी दुबली मातासे नारीपद सन्तान उत्पन्न होती है।
(च०श०अ०२श्ल०१८)
१५. रजमें गर्भाशयकारक बीजका अंश दूषित होनेसे मरी दुर्दुःश्रव्या किन्नापा सन्तान उत्पन्न होती है। (श०क०)
इस प्रकार दूषित रजसे अनेक प्रकारकी सन्तान उत्पन्न
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सन्तति-शास्त्र ।
होती है । अतएव जन्म जिस समय हुआ भी विवाह आतुर हो तो उसके दूर करनेका यत्न तुल्य अन्यत्त सावधानी से करना चाहिये ।
(३२) सन्तानपर दूषित वीर्यका प्रभाव ।
वीर्य वह पदार्थ है कि जिससे शरीर बनता है । यह जिवन्ता उत्पन्न हो उदमी हो अच्छी सन्तान उत्पन्न होती है । वीर्य जब किसी प्रकारसे दूषित हो जाता है, तो अनेक रोग-युक्त सन्तान उत्पन्न होती है । इसके अनेक नमूने हैं ।
- १. वीर्यके उत्पन्न होनेसे गर्भाधान होनेपर जो सन्तान होती है वह स्त्री और पुत्रके लक्षणसे रहित हिरना अयान् नुपक होती है । (ग० क० २ पृ० १०)
- २. पित्तके दुषले वीर्यसे उद्भूत सन्तान उत्पन्न होती है । (ग० क० ३ पृ० ११ ;
- ३. वायु से दूषित वीर्य का सन्तान लालीमें कुछ कालापन लिये होती है । (ग० क०)
- ४. पित्तसे दूषित वीर्यकी सन्तान अत्यजीवी, पीलेपनमें कुछ कालापन लिये होती है । (ग० क०)
- ५. कफसे दूषित वीर्यकी सन्तान सफेद में पीलापन लिये होती है । (ग० क०)
- ६. शुभमे दूषित वीर्यकी सन्तान नात रंगका और अत्यजीवी होती है । (ग० क०)
- ७. कफ और वायुने दूषित वीर्यकी अत्यजीवी और रोग-युक्त सन्तान होती है । (ग० क०)
- ८. पित्त और वायुने दूषित वीर्यकी अत्यजीवी और रोगयुक्त सन्तान होती है । (ग० क०)