रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)
Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)
About this granth
Rasaratnasamuchchaya (रसरत्नसमुच्चय) is a major text of rasashastra, the branch of Ayurveda that purifies mercury, sulphur, mica, metals and gems and turns them into medicines. It is ascribed to Vagbhatacharya, usually called Rasa-Vagbhata to distinguish him from the author of the Ashtanga Hridaya.
The opening part describes the pharmacy, apparatus, crucibles, heating methods and technical terms, followed by the purification and incineration of the major and minor minerals, metals and gems. Later chapters give mineral formulations for treating particular diseases.
This edition was published in 1939 by the Chowkhamba Sanskrit Series Office, Benares, as No. 91 of the Haridas Sanskrit Series. It carries the Suratnojjvala Hindi commentary of Pandit Ambikadatta Shastri, Ayurvedacharya of Banaras Hindu University, with notes, introduction, indices and appendices. Each verse is followed by a plain Hindi explanation, and the book long served students and practising vaidyas. The opening leaves of this copy also carry a few remedies handwritten in Nepali by an earlier owner.
[ ४ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| हरतालशुद्धिः | ११६ | स्रोतोऽञ्जनसत्त्वपातनविधिः | १२४ |
| अशुद्धतालसेवनदोषाः | ,, | कङ्कुष्ठनिरूपणम् | ,, |
| मतान्तरेण तालशोधनम् | ,, | कङ्कुष्ठोत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| मतान्तरेण शोधनमारणनिरूपणम् | ,, | द्विविधकङ्कुष्ठलक्षणम् | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ११७ | कङ्कुष्ठोत्पत्तौ मतान्तराणि | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | गुणाः | १२५ |
| मनःशिलानिरूपणम् | ११९ | रसोपरसानां सामान्यशोधनं सत्त्वपातनविधिश्च | ,, |
| मनःशिलाया भेदाः | ,, | कङ्कुष्ठशोधनम् | ,, |
| त्रिविधमनःशिलालक्षणानि | ,, | रेचकयोगः | ,, |
| गुणाः | ,, | ताम्बूलानुपानवर्जनम् | १२६ |
| अशुद्धशुद्धदोषगुणाः | ,, | विषनाशार्थं कङ्कुष्ठप्रयोगविधिः | ,, |
| शोधनम् | १२० | साधारणरसपरिगणनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | कम्पिल्लः | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ,, | गुणाः | १२७ |
| मतान्तरम् | ,, | गौरीपाषाणः | ,, |
| अञ्जनानां संनिरूपणम् | ,, | शोधनम् | १२८ |
| अञ्जनभेदाः | ,, | सत्त्वग्रहणम् | १२९ |
| सौवीराञ्जनगुणाः | १२२ | गुणाः | ,, |
| रसाञ्जनगुणाः | ,, | नवसारनिरूपणम् | ,, |
| स्रोतोऽञ्जनगुणाः | ,, | नवसारोत्पत्तिः | ,, |
| लेखनस्वरूपम् | ,, | मतान्तरेणोत्पत्तिः | १३० |
| पुष्पाञ्जनगुणाः | १२३ | गुणाः | ,, |
| नीलाञ्जनगुणाः | ,, | वराटिकावर्णनम् | ,, |
| शोधनम् | ,, | वराटिकालक्षणम् | ,, |
| अञ्जनसत्त्वाहरणम् | ,, | उत्तमादि वराटिका | ,, |
| स्रोतोऽञ्जनलक्षणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अञ्जनरसबन्धनम् | ,, | ||
| रसाञ्जनस्य विशेषशोधनम् | ,, |
[ ५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शोधनम् | १३१ | माणिक्यम् | १३६ |
| अग्निजारनिरूपणम् | ,, | द्विविधमाणिक्यनिर्देशः | ,, |
| अग्निजारपरिचयः | ,, | श्रेष्ठमाणिक्यलक्षणम् | ,, |
| गुणाः | ,, | श्रेष्ठनीलमाणिक्यलक्षणम् | ,, |
| तस्य स्वभावतः शुद्धत्वनिर्देशः | ,, | निकृष्टमाणिक्यलक्षणम् | १३७ |
| गिरिसिन्दूरनिरूपणम् | १३२ | माणिक्यगुणाः | ,, |
| गिरिसिन्दूरगुणाः | ,, | मौक्तिकनिरूपणम् | ,, |
| हिङ्गुलनिरूपणम् | ,, | प्रशस्तमौक्तिकलक्षणम् | ,, |
| हिङ्गुलभेदाः | ,, | मौक्तिकशुक्त्योर्गुणाः | ,, |
| शुकतुण्डकस्य परिचयः | ,, | हेममौक्तिकम् | १३८ |
| हंसपादलक्षणम् | ,, | मौक्तिकगुणान्तरम् | ,, |
| हिङ्गुलगुणाः | ,, | प्रवालनिरूपणम् | ,, |
| शोधनम् | १३३ | ग्राह्यप्रवालस्वरूपः | ,, |
| हिङ्गुलसत्त्वाकर्षणविधिः | ,, | हेयप्रवालस्वरूपम् | ,, |
| मृद्दारशृङ्गम् | ,, | प्रवालगुणाः | १३९ |
| परिचयः | ,, | तार्क्ष्यम् | ,, |
| गुणाः | ,, | प्रशस्ततार्क्ष्यलक्षणम् | ,, |
| साधारणशोधननिर्देशः | १३४ | अप्रशस्ततार्क्ष्यलक्षणम् | ,, |
| सत्त्वानां सामान्यशोधनम् | ,, | तार्क्ष्यगुणाः | ,, |
| चतुर्थोऽध्यायः । | पुष्परागः | ,, | |
| रत्ननिरूपणम् | १३५ | श्रेष्ठपुष्परागलक्षणम् | ,, |
| मणयः | ,, | हेयपुष्परागलक्षणम् | १४० |
| मणीनां नामानि | ,, | पुष्परागगुणाः | ,, |
| श्रेष्ठमणीनां नामानि | ,, | वज्रम् | ,, |
| ग्रहप्रसादकरत्नानि | ,, | वज्रभेदाः | ,, |
| ग्रहानुसारेण रत्नपरिगणनम् | १३६ | पुंवज्रलक्षणम् | ,, |
| रत्नप्रयोगविषयः | ,, | स्त्रीनपुंसकवज्रयोर्लक्षणानि | ,, |
[ ६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| जातिभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | १४१ | रत्नभस्मक्रमः | १४८ |
| वर्णभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | ,, | रत्नानां द्रावणम् | ,, |
| वज्रगुणाः | ,, | मुक्ताद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| रत्नदोषाः | १४२ | वज्रद्रावणविशेषविधिः | १५० |
| वज्रशोधनम् | ,, | वैक्रान्तद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| वज्रमारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | १४३ | राजावर्त्तः | १५१ |
| मतान्तरेण मारणम् | १४४ | उत्तममध्यमराजावर्त्तलक्षणम् | ,, |
| प्रयोगविशेषेण गुणविशेषकथनम् | ,, | गुणाः | ,, |
| वज्ररसायनम् | ,, | राजावर्त्तादिसामान्यशोधनम् | ,, |
| नीलनिरूपणम् | १४५ | राजावर्त्तशोधनम् | ,, |
| नीलभेदाः | ,, | राजावर्त्तमारणम् | ,, |
| जलशक्रनीलयोः स्वरूपम् | ,, | सत्त्वपातनम् | १५२ |
| गुणाः | ,, | द्रुतीनां दीर्घकालरक्षणोपायः | ,, |
| गोमेदः | १४६ | रत्नधारणगुणाः | ,, |
| गोमेदर्निरुक्तिः | ,, | गैरिकम् | ,, |
| प्रशस्तगोमेद लक्षणम् | ,, | गैरिकस्य शोधनं सत्त्वपातनञ्च | ,, |
| हेयगोमेदलक्षणम् | ,, | पञ्चमोऽध्यायः । | |
| गुणाः | ,, | लोहानि | १५३ |
| रत्नमारणनिषेधः | ,, | लोहजातिपरिगणनम् | ,, |
| रत्नप्रयोगः | १४७ | स्वर्णम् | १५४ |
| रत्नानां साधारणशोधनम् | ,, | स्वर्णभेदाः | ,, |
| वैदूर्यम् | ,, | प्राकृतस्वर्णस्योत्पत्तिः | ,, |
| श्रेष्ठवैदूर्यलक्षणम् | ,, | सहजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| हेयवैदूर्यलक्षणम् | ,, | वह्निजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| गुणाः | ,, | स्वर्णत्रयगुणाः | १५५ |
| रत्नशुद्धिः | ,, |
[ ७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| खनिजस्वर्णोत्पत्तिस्तल्लक्षणगुणाश्च | १५५ | अन्यविधिः | १६२ |
| वेधजस्वर्णोत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | रौप्यस्य निरुत्थीभस्मकरणम् | ,, |
| स्वर्णरौप्ययोः सामान्यगुणाः | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| स्वर्णगुणाः | १५६ | स्वर्णरौप्ययोर्द्रावणम् | ,, |
| अशोधितामारितस्वर्णदोषाः | ,, | रौप्यप्रयोगः | १६३ |
| स्वर्णशोधनम् | ,, | ताम्रम् | ,, |
| लौहमारणार्थमुत्तमद्रव्यकथनम् | ,, | ताम्रभेदाः | ,, |
| स्वर्णमारणम् | १५७ | म्लेच्छताम्रस्य लक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | नेपालताम्रलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | रसकर्मानर्हताम्रलक्षणम् | १६४ |
| स्वर्णद्रावणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अन्यविधिः | १५८ | ताम्रस्य दोषाः | ,, |
| स्वर्णभस्मप्रयोगविधिः | ,, | ताम्रशुद्धिः | १६५ |
| अशुद्धामारितस्वर्णदोषाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| रजतम् | १५९ | मतान्तरम् | ,, |
| रजतभेदाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सहजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | ताम्रभस्म | ,, |
| खनिजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | अन्यविधिः | १६६ |
| कृत्रिमरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | मारणान्तरम् | ,, |
| उत्तमरौप्यलक्षणम् | ,, | सोमनाथीताम्रभस्म | ,, |
| निकृष्टरौप्यलक्षणम् | १६० | ताम्रभस्मगुणाः | १६७ |
| रौप्यगुणाः | ,, | ग्रन्थान्तरोक्त ताम्रप्रयोगः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | अथलौहम् | १६८ |
| स्वर्णादिशोधनम् | ,, | लौहभेदाः | ,, |
| अशोधितमारितलोहस्य दोषाः | १६१ | मुण्डलौहभेदाः | ,, |
| रौप्यस्य विशेषशोधनम् | ,, | मृदुमुण्डलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | कुण्ठमुण्डलक्षणम् | ,, |
| रौप्यमारणम् | ,, |
[ ८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कडारमुण्डलक्षणम् | १६९ | मारणार्थं लौहस्य परिमाणनिर्देशः | १७४ |
| मुण्डगुणाः | ,, | लौहमारणे मन्त्रः | ,, |
| अशुद्धलौहस्य दोषाः | ,, | लौहत्रयाणामुत्तरोत्तरगुणाधिक्यम् | ,, |
| तीक्ष्णलौहम् | ,, | सर्वलौहशुद्धिः | १७५ |
| तीक्ष्णलौहभेदाः | ,, | लौहस्थगिरिजदोषनाशनविधिः | ,, |
| खरलौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सारलौहलक्षणम् | १७० | मतान्तरेण शोधनं मारणञ्च | १७६ |
| हृन्नाललौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरेण मारणञ्च | ,, |
| सपर्यायपोगरलक्षणम् | ,, | तीक्ष्णलौहस्य मारणम् | ,, |
| वाजीरलौहलक्षणम् | ,, | कान्तलौहस्य गुणाः | १७७ |
| काललौहलक्षणम् | ,, | लौहस्य मारणान्तरम् | ,, |
| खरलौहगुणाः | १७१ | तीक्ष्णलौहस्य विशेषमारणम् | १७८ |
| अन्यसारादितीक्ष्णलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| कान्तलोहभेदाः | ,, | मतान्तरे सर्वलौहानां मारणम् | ,, |
| वर्णानुसारकार्यभेदाः | ,, | अन्यविधिः | १७९ |
| अधमादिकथनम् | १७२ | अन्यविधिः | ,, |
| भ्रामककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| चुम्बककर्षकलक्षणम् | ,, | कान्तलोहस्य रामराजीप्रोक्तशोधनम् | १८० |
| द्रावककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | १८१ |
| रोमकान्तलक्षणम् | ,, | लौहप्रयोगः | ,, |
| मुखभेदेन श्रेष्ठाश्रेष्ठकथनम् | ,, | लौहानां रामराजीप्रोक्तगुणाः | १८२ |
| भ्रामकादिलौहकार्यनिर्देशः | १७३ | श्रेष्ठकान्तलौहस्य लक्षणम् | ,, |
| रसक्रमेण कान्तस्य विशेषता | ,, | लौहद्रुतिः | ,, |
| कान्तलौहस्य ग्राह्याग्राह्यनिर्देशः | ,, | कान्तलौहस्य विशेषमारणम् | १८३ |
| कान्तलौहलक्षणम् | १७४ | अथाष्टलौहानां द्रावणम् | ,, |
| कान्तलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| लौहकल्पश्रेष्ठता | ,, | अशुद्धपक्वलौहदोषः | ,, |
[ ९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उत्तरोत्तरमधिकगुणकरं लौहम् | १८४ | नागरसायनम् | १९२ |
| मण्डूरम् | ,, | पित्तलम् | ,, |
| मण्डूरशोधनम् | ,, | पित्तलभेदः | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | रीतिकालक्षणम् | ,, |
| लौहमण्डूरयोर्गुणसाम्यता | १८५ | काकतुण्डी लक्षणम् | ,, |
| वङ्गनिरूपणम् | ,, | रीतिकाया गुणाः | ,, |
| वङ्गस्य द्वैविध्यनिर्देशः | ,, | काकतुण्ड्या गुणाः | १९३ |
| खुरकवङ्गस्य मिश्रकवङ्गस्य च लक्षणम् | ,, | शुभरीतिकालक्षणम् | ,, |
| वङ्गगुणाः | ,, | अशुभरीतिलक्षणम् | ,, |
| खुरकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिकाशोधनम् | ,, |
| मिश्रकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिका मारणम् | ,, |
| नागवङ्गकांस्यताम्राणां सामान्यशोधनम् | ,, | मतान्तरम् | १९४ |
| वङ्गभस्म | ,, | पित्तलरसायनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | पित्तलद्रुतिः | ,, |
| मतान्तरम् | १८६ | कांस्यम् | १९५ |
| मतान्तरम् | ,, | कांस्योत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| वङ्गरसायनम् | ,, | प्रशस्तकांस्यलक्षणम् | ,, |
| नागः | १८८ | त्याज्यकांस्यलक्षणम् | ,, |
| शुद्धसीसकलक्षणम् | ,, | कांस्यगुणाः | ,, |
| सीसकगुणाः | १८९ | कांस्यशोधनम् | १९६ |
| नागशुद्धिः | ,, | कांस्यमारणम् | ,, |
| नागभस्म | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| मतान्तरम् | १९० | वर्तलौहम् | ,, |
| नागस्य निरुत्थभस्मीकरणम् | ,, | वर्तलौहस्वरूपः | ,, |
| मतान्तरम् | १९१ | वर्तलौहगुणाः | ,, |
| वर्तलौहशोधनम् | १९७ | ||
| वर्तलौहमारणम् | ,, |
[ १० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसोपरसलोहानां सूतसाधकत्वनिर्देशः | १९७ | ध्यानम् | २०७ |
| रत्नादीनां सूतयोग्यत्वनिर्देशः | ” | देवीपूजनमन्त्रम् | ” |
| भूनागसत्त्वपातनम् | १९८ | कुम्भस्थापनादिशिष्यदीक्षादानविधिः | २०८ |
| मतान्तरम् | १९९ | कालिनीलक्षणम् | २०९ |
| भूनागमुद्रिका | २०० | कालिन्यभावे तदनुकल्पविधिः | ” |
| तैलपातनविधिः | ” | होमविधिः | २१० |
| मतान्तरम् | ” | रससिद्ध्यर्थं सङ्ग्रहणीयपदार्थास्तत्पूजनादिकञ्च | २११ |
| मतान्तरम् | २०१ | रसशक्तयः | ” |
| मतान्तरम् | ” | उपरसाः | ” |
| तैलपातनम् | २०२ | महारसाः | २१२ |
| विष्णुसृष्टितैलपातनम् | ” | अष्टलौहपूजाक्रमः | ” |
| जैपालतैलपातनम् | ” | उपकरणानां पूजाविधिः | ” |
| वाकुचीतैलाहरणविधिः | ” | रससिद्धीश्वरब्राह्मणादीनां पूजनम् | २१३ |
| कृष्णमिश्रश्वेतगुञ्जाबीजतैलपातनविधिः | ” | अदीक्षितस्य रसविद्यासाधनवैफल्यनिर्देशः | २१४ |
| षष्ठोऽध्यायः । | रससाधने सिद्धिलाभहेतुनिर्देशः | ” | |
| शिष्योपनयननिरुपणम् | २०३ | कस्मै किमर्थं रसविद्यादातव्या तन्निर्देशः | २१५ |
| क्रमयुक्तशास्त्रम् | ” | गुरुसन्तोषस्य सर्वसिद्धिहेतुत्वनिर्देशः, | ” |
| शास्त्रक्रमयोः परस्परापेक्षा | ” | रसविद्याया अवश्यगोप्यत्वनिर्देशः | ” |
| रसविद्यागुरुः | ” | सप्तमोऽध्यायः । | |
| शिष्यगुणाः | २०४ | रसशाला | २१६ |
| अनुचरगुणाः | ” | रससाधनीयपदार्थाः | २१७ |
| अयोग्यशिष्याः | ” | चालनीभेदलक्षणादिकम् | २१८ |
| रससाधनरसशालारस मण्डपाः | २०५ | रससिद्ध्युपकरणानि | ” |
| रसलिङ्गस्थापनादि | २०६ | ||
| रसलिङ्गपूजनफलम् | ” |
[ ११ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उपलनामानि | २१९ | कजली | २२५ |
| कूपीनिर्माणद्रव्याणि | ,, | रसपङ्कः | ,, |
| कूपीपर्यायाः | ,, | पिष्टी | ,, |
| चषकस्य पर्यायाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| शूर्पादीनां समर्चनम् | ,, | पातनपिष्टी | ,, |
| रसविद्यायां कीदृशा वैद्या अन्ये वा नियोज्यास्तत्कथनम् | २२० | स्वर्णरौप्ययोः कृष्टिः | २२६ |
| रसपाककाले मन्त्रजपस्य कर्तव्यतानिर्देशः | ,, | कृष्ट्या उपयोगः | ,, |
| परिचारकलक्षणम् | ,, | स्वर्णकृष्ट्याः कार्यम् | ,, |
| पद्महस्तवैद्यलक्षणम् | २२१ | वरलोहकम् | ,, |
| अमृतहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्ती | ,, |
| दग्धहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्तीप्रयोगः | ,, |
| निधिरक्षायोग्यपुरुषाः | ,, | ताररक्ती | २२७ |
| बलिसाधने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | दलम् | ,, |
| रसायने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | २२२ | अन्यविधदलम् | ,, |
| स्वर्णादिधातुसिद्धिनियुक्तियोग्यपुरुषाः | ,, | शुल्बनागम् | ,, |
| भेषजाहरणे नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | शुल्बनागगुणाः | २२८ |
| केषां रससिद्धिर्भवतीत्याह | ,, | पिञ्जरी | ,, |
| रससिद्धसाधकस्य कर्तव्यनिर्देशः | ,, | चन्द्रार्कम् | ,, |
| रससिद्धमर्त्यफलम् | २२३ | निर्वापणम् | २२९ |
| अष्टमोऽध्यायः । | निर्वापणद्रव्यमात्रा | ,, | |
| परिभाषा | २२४ | वारितरलौहलक्षणम् | ,, |
| धन्वन्तरिभागः | ,, | मृतलौहलक्षणम् | ,, |
| रुद्रभागः | ,, | अपुनर्भवलक्षणम् | ,, |
| विश्वासघातकवैद्यलक्षणम् | ,, | उत्तमभस्मलक्षणम् | २३० |
| निरुत्थलौहलक्षणम् | ,, | ||
| बीजलक्षणम् | ,, | ||
| ताडनस्वरूपम् | ,, | ||
| धान्याभ्रलक्षणम् | ,, |
[ १२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वलक्षणम् | २३१ | उत्थापनादिलक्षणम् | २३७ |
| एककोलिसकलक्षणम् | ” | बन्धनलक्षणम् | ” |
| द्रावणादिकर्मसाधनेकाष्ठनिर्देशः | ” | पातनलक्षणम् | ” |
| हिङ्गुलाकृष्टो रसः | ” | रोधनलक्षणम् | २३८ |
| घोषाकृष्टताम्रलक्षणम् | ” | नियमनलक्षणम् | ” |
| वरनागलक्षणम् | २३२ | दीपनलक्षणम् | २३९ |
| उत्थापनलक्षणम् | ” | ग्रासमानम् | ” |
| ढालनलक्षणम् | ” | जारणाभेदनिर्देशः | ” |
| नागसम्भूतचपलः | ” | निर्मुखजारणालक्षणम् | २४० |
| वङ्गसम्भूतचपलः | २३३ | बीजादिनिर्देशः | ” |
| चपलकार्यम् | ” | मुखलक्षणम् | ” |
| बद्धरसोपयोगः | ” | सम्मुखजारणालक्षणम् | ” |
| धौतम् | ” | राक्षसवरसलक्षणम् | ” |
| द्वन्द्दानम् | २३४ | चारणालक्षणम् | २४१ |
| भञ्जनी | ” | गर्भद्रुतिलक्षणम् | ” |
| चुल्लका | ” | बाह्यद्रुतिलक्षणम् | ” |
| पतङ्गीरागः | ” | द्रुतेर्भेदाः | ” |
| आवापः | ” | द्रुतेः स्वरूपम् | ” |
| अभिषेकः | २३५ | जारणाभेदः | ” |
| निर्वापलक्षणम् | ” | जारणालक्षणम् | ” |
| प्रतिवापसमयनिर्देशः | ” | बिडादिलक्षणम् | २४२ |
| शुद्धावर्तः | ” | रञ्जनलक्षणम् | ” |
| बीजावर्तः | ” | सारणालक्षणम् | ” |
| स्वाङ्गशीतलम् | ” | वेधलक्षणं भेदाश्च | ” |
| बहिःशीतलम् | २३६ | लेपवेधलक्षणम् | २४३ |
| स्वेदनलक्षणम् | ” | क्षेपवेधलक्षणम् | ” |
| मर्दनलक्षणम् | ” | कुन्तवेधलक्षणम् | ” |
| मूर्च्छनलक्षणम् | ” | धूमवेधलक्षणम् | ” |
[ १३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शब्दवेधलक्षणम् | २४४ | प्रकारान्तरम् | २५४ |
| उद्घाटनलक्षणम् | ,, | नालिकायन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनलक्षणम् | ,, | भूधरयन्त्रम् | ,, |
| सन्न्यास लक्षणम् | ,, | पुटयन्त्रम् | ,, |
| रसस्वेदसन्यासगुणाः | २४५ | कोष्ठीयन्त्रम् | २५५ |
| परिभाषाऽऽवश्यकता | ,, | वलभीयन्त्रम् | ,, |
| अध्यायपठनफलम् | ,, | तिर्यक्पातनयन्त्रम् | २५६ |
| नवमोऽध्यायः । | पालिकायन्त्रम् | ,, | |
| यन्त्राणि | २४६ | घटयन्त्रम् | ,, |
| यन्त्रशब्द निरुक्तिः | ,, | इष्टिकायन्त्रम् | २५७ |
| दोलायन्त्रम् | ,, | हिङ्गुलाकृष्टिविद्याधरयन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रम् | २४७ | डमरुयन्त्रम् | २५८ |
| पातनायन्त्रम् | ,, | नालियन्त्रम् | ,, |
| अधःपातनयन्त्रम् | २४८ | तोयमृल्लक्षणम् | ,, |
| कच्छपयन्त्रम् | ,, | वह्निमृत्सा | २५९ |
| दीपिकायन्त्रम् | ,, | शेषनाभियन्त्रवर्णनम् | ,, |
| ढेकीयन्त्रम् | २४९ | ग्रस्तयन्त्रम् | ,, |
| जारणायन्त्रम् | ,, | स्थालीयन्त्रम् | २६० |
| जारणायन्त्रस्य– | ,, | धूपयन्त्रम् | ,, |
| प्रकारान्तरम् | २५० | कन्दुकयन्त्रम् | २६१ |
| विद्याधरयन्त्रम् | २५१ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सोमानलयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रम् | २६२ |
| गर्भयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रस्य त्रैविध्यनिर्देशः | ,, |
| हंसपाकयन्त्रम् | २५२ | द्विविधखल्लयोः सामान्यलक्षणम् | ,, |
| बालुकायन्त्रम् | २५३ | अर्धचन्द्राकृतिकखल्लनिर्देशः | ,, |
| बालुकायन्त्रस्य प्रकारान्तरम् | ,, | वर्तुलखल्लनिर्देशः | २६३ |
| लवणयन्त्रम् | ,, | तप्तखल्लप्रमाणनिर्देशः | ,, |
| तप्तखल्लविधिः | ,, |
[ १४ ]
दशमोऽध्यायः ।
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| मूषादिकथनम् | २६४ | मूसलाख्यमूषा | २७१ |
| मूषायाः पर्यायाः | ,, | कोष्ठिकानिर्देशः | ,, |
| मूषाया निरुक्तिः | ,, | अङ्गारकोष्ठी | २७२ |
| मूषाया उपादानम् | २६५ | पातालकोष्ठी | २७३ |
| मूषा शंसा | ,, | गारकोष्ठी | ,, |
| सन्धिलेपस्य पर्यायाः | ,, | वङ्कनालम् | २७४ |
| मूषोपयुक्तमृत्तिका | ,, | मूषाकोष्ठी | ,, |
| मतान्तरम् | २६६ | पुटस्य लक्षणम् | २७५ |
| मूषामृत्तिकायां संयोज्यद्रव्याणि | ,, | पुटस्य फलम् | ,, |
| वज्रमूषा | ,, | महापुटम् | २७७ |
| योगमूषा | ,, | गजपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणीमूषा | २६७ | वाराहपुटम् | २७८ |
| गारमूषा | ,, | कुक्कुटपुटम् | ,, |
| वरमूषा | ,, | कपोतपुटम् | ,, |
| वर्णमूषा | २६८ | गोर्वरस्वरूपम् | ,, |
| रौप्यमूषा | ,, | गोर्वरपुटलक्षणम् | २७९ |
| विडमूषा | ,, | भाण्डपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणमूषा | ,, | बालुकापुटम् | ,, |
| मूषाऽऽप्यायनम् | २६९ | भूधरपुटम् | २८० |
| वृन्ताकमूषा | ,, | लावकपुटम् | ,, |
| गोस्तनीमूषा | २७० | अनुक्तपुटमानेकर्त्तव्यनिर्देशः | २८१ |
| मल्लमूषा | ,, | उपलपर्यायाः | ,, |
| पक्कमूषा | ,, | कृत्रिमाकृत्रिमलौहनिर्देशः | ,, |
| गोलमूषा | ,, | षल्लवणानि | २८२ |
| महामूषा | २७१ | क्षारत्रयम् | ,, |
| मण्डूकमूषा | ,, | क्षारपञ्चकम् | ,, |
| मधुरत्रयम् | २८३ |
[ १५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसकर्मणितैलाहरणोपयोगिद्रव्याणि | २८३ | व्याधिविशेषेरसप्रयोगनिषेधः | २९३ |
| वसावर्गः | ,, | शुद्धमूर्च्छितरसगुणाः | ,, |
| मूत्रवर्गः | ,, | मृतपारदगुणाः | ,, |
| माहिषपञ्चकच्छागलपञ्चकयोर्निर्देशः | २८४ | रसदोषास्तेषां कार्याणि च | ,, |
| अम्लवर्गः | ,, | संस्कारार्थं पारदस्य परिमाणनिर्देशः | २९४ |
| अम्लपञ्चकम् | ,, | स्वेदनसंस्कारः | २९५ |
| पञ्चमृत्तिका | २८५ | मर्दन संस्कारः | २९६ |
| विषवर्गः | ,, | मूर्च्छनसंस्कारः | २९७ |
| उपविषवर्गः | २८६ | उत्थापनसंस्कारः | २९८ |
| दुग्धवर्गः | ,, | पातनसंस्कारः | २९९ |
| विड्वर्गः | २८७ | उर्द्ध्वाधः पातनयोः सङ्ख्यानिर्देशः | ३०० |
| रक्तवर्गः | ,, | अधःपातनविधिः | ,, |
| पीतवर्गः | २८८ | पातने प्रकारान्तराणि | ,, |
| श्वेतवर्गः | ,, | तिर्यक्पातनम् | ३०१ |
| कृष्णवर्गः | ,, | मर्दनादीनां गुणाः | ३०३ |
| रक्तवर्गादीनां प्रयोजननिर्देशः | ,, | निरोधसंस्कारः | ,, |
| शोधनीयगणः | ,, | नियमनसंस्कारः | ३०४ |
| लौहमलनाशनगणः | २८९ | प्रकारान्तरम् | ३०५ |
| लौहकाठिन्यनाशकयोगः | ,, | दीपनसंस्कारः | ,, |
| द्रावकवर्गः | ,, | प्रकारान्तरेण दीपनम् | ३०६ |
| क्षारादिकानां कार्यम् | ,, | रसभावनादौ मूलिन्यः | ३०७ |
| एकादशोऽध्यायः। | सूतसंस्कारकार्यत्वनिर्देशः | ३०९ | |
| रसशोधनादिकथनम् | २९० | रसबन्धनप्रतिज्ञा तस्य व्युत्पत्तिश्च | ,, |
| मानपरिभाषा | ,, | रसबन्धाः | ,, |
| मानपरिभाषायां मतान्तरम् | २९१ | हठबन्धः | ३१० |
| अष्टादशसंस्काराः | २९२ | आरोटबन्धः | ,, |
[ १६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| आभासबन्धः | ३११ | प्रकारान्तरेण जलूकानिर्माणम् | ३२३ |
| क्रियाहीनबन्धः | ३१२ | प्रकारान्तरम् | ३२४ |
| पिष्टिकाबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| क्षारबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ३२५ |
| खोटबन्धः | ३१३ | प्रकारान्तरम् | ३२६ |
| पोटबन्धलक्षणम् | ,, | योनिद्रावणम् | ,, |
| कल्कबन्धलक्षणम् | ,, | मदनवलयम् | ३२७ |
| कजलीबन्धलक्षणम् | ३१४ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सजीवबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्म | ३२८ |
| निर्जीवबन्धलक्षणम् | ३१५ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| निर्बीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सबीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| शृङ्खलाबन्धलक्षणम् | ३१६ | प्रकारान्तरम् | ३२९ |
| द्रुतिबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| बालकबन्धलक्षणम् | ३१७ | प्रकारान्तरम् | ३३० |
| कुमारबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| तरुणबन्धलक्षणम् | ३१८ | रसभस्मविधिः | ३३१ |
| वृद्धबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि पथ्यम् | ३३२ |
| मूर्तिबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि कुपथ्यम् | ,, |
| जलबन्धलक्षणम् | ३१९ | देवीशास्त्रोक्तककरादिगणः | ३३३ |
| अग्निबन्धलक्षणम् | ,, | श्रीकृष्णदेवोक्तककरादिगणः | ३३४ |
| सूतानां मूर्च्छाकल्पः | ,, | ककारादिनिषेधस्यापवादः | ३३५ |
| महाबन्धलक्षणम् | ३२१ | पारदविकार उपायाः | ,, |
| जलूकाबन्धः | ,, | रससेवने उपचारविधिः | ,, |
| क्रियाविशेषेण जलूकाया गुणविशेषः | ३२२ | द्वादशोऽध्यायः । | |
| जलूकायाः त्रिविधप्रमाणनिर्देशः | ,, | ज्वरचिकित्सा | ३३६ |
| जलूकायाः संस्कारविशेषः | ३२३ | रोगगणना | ,, |
[ १७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| वातज्वरलक्षणम् | ३३७ | चातुर्थिकगजाङ्कुशरसः | ३६८ |
| पित्तज्वरलक्षणम् | ३३८ | मृत्युञ्जयरसः | ३६९ |
| कफज्वरलक्षणम् | ,, | पञ्चवक्त्ररसः | ,, |
| द्विदोषजत्रिदोषजज्वरकथनम् | ३३९ | उन्मत्तरसः | ३७० |
| त्रैलोक्यसुन्दररसः | ३४० | सन्निपाताञ्जनरसः | ,, |
| त्रैलोक्यडम्बररसः | ३४१ | नस्यम् | ३७१ |
| मेघनादरसः | ३४३ | प्रतापलङ्केश्वररसः | ,, |
| ज्वरगजहरिरसः | ,, | प्राणेश्वररसः | ३७३ |
| दीपिकारसः | ३४४ | मृतसञ्जीवनरसः | ३७४ |
| शीतभञ्जीरसः | ३४५ | द्वितीयमृतसञ्जीवनरसः | ३७५ |
| प्रकारान्तरेण शीतभञ्जीरसः | ३४६ | सन्निपातकुठाररसः | ३७६ |
| मृतजीवनरसः | ३४७ | नवज्वरारिरसः | ३७७ |
| वृद्धज्वराङ्कुशरसः | ३४९ | जलमञ्जरीरसः | ३७८ |
| महाज्वराङ्कुशरसः | ,, | कान्तरसः | ३७९ |
| मृत्युञ्जयरसः | ३५१ | चन्द्रोदयरसः | ,, |
| सर्व्वज्वरादिरसः | ,, | जीर्णज्वरारिरसः | ३८० |
| चन्द्रसूर्यरसः | ३५२ | नवज्वरमुरारिरसः | ३८१ |
| विषप्रयोगायोग्यनिर्देशः | ३५३ | त्रयोदशोऽध्यायः। | |
| उमाप्रसादनोरसः | ३५४ | रक्तपित्तम् | ३८४ |
| ज्वराङ्कुशरसः | ३५५ | रक्तपित्ताङ्कुशरसः | ३८५ |
| सर्वाङ्गसुन्दरचिन्तामणिरसः | ३५६ | चन्द्रकलारसः | ३८६ |
| लोकनाथगुटिका | ३५७ | पटोलादियोगः | ३८८ |
| सूचिकाभरणरसः | ३५९ | रसेन्द्रयोगः | ३८९ |
| शार्ङ्गष्टादिवर्गः | ३६४ | अन्यश्च | ,, |
| सूचीमुखरसः | ३६५ | नवनीतादियोगः | ,, |
| सन्निपातगजाङ्कुशरसः | ३६६ | शिरोलेपः | ,, |
| चातुर्थिकहरो रसः | ३६७ | द्राक्षादिक्वाथः | ३९० |
३ र० स०
[ १८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| योगद्वयम् | ३९० | कज्जलयोगः | ४०७ |
| सितामृता | ,, | शिलापूतरसः | ,, |
| कासः | ,, | मन्थानभैरवरसः | ४०९ |
| कासनाशनरसः | ३९१ | विश्वादिवटिका | ४१० |
| कासहररसः | ,, | सामान्योपचाराः | ४११ |
| रक्तकाण्डरसः | ३९२ | तत्र रास्नादिक्षीरम् | ,, |
| भूताङ्कुशरसः | ३९३ | हिक्काघ्नधूमः | ,, |
| बोलबद्धरसः | ३९४ | गन्धपाषाणयोगः कफेभेषजविशेषनिर्देशश्च | ४१२ |
| अग्निरसः | ३९५ | स्वरभङ्गः | ,, |
| स्वयमग्निरसः | ,, | पर्पटीरसः | ४१३ |
| सामान्योपायाः | ३९६ | कफरोगे क्रियासूत्रम् | ४१७ |
| भृङ्गराजयोगः | ,, | चतुर्दशोऽध्यायः । | |
| अर्कादियोगः | ,, | राजयक्ष्मा | ,, |
| कासघ्नधूमद्वयम् | ,, | कनकसुन्दररसः | ४१८ |
| क्षयकासान्तकयोगः | ३९८ | राजमृगाङ्करसः | ४२१ |
| श्वासः | ,, | शङ्खेश्वररसः | ,, |
| ऊर्ध्वश्वासादिः | ३९९ | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२२ |
| सूर्यावर्तरसः | ,, | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२३ |
| श्वासान्तकरसः | ४०० | यक्ष्मणि औषधविशेषसेवनोपदेशः | ,, |
| श्वासारिवटकः | ४०१ | पञ्चामृतरसः | ४२४ |
| सप्तामृतावटी | ,, | जयन्तीप्रयोगः | ,, |
| नीलकण्ठरसः | ४०२ | क्षयशामकरसः | ,, |
| श्वासकासकरिकेसरी रसः | ४०३ | लोकनाथरसः | ४२५ |
| सूर्यरसः | ४०४ | वैद्यनाथरसः | ४२८ |
| सामान्योपचाराः | ,, | लोकनाथरसः | ४२९ |
| हिक्का | ४०५ | ||
| हिक्कानाशनरसः | ४०७ |
[ १९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्राणनाथरसः | ४३० | वातार्शोलक्षणम् | ४५२ |
| वज्ररसः | ४३१ | अर्शःकुठाररसः | ४५३ |
| महावीररसः | ४३३ | पित्तार्शोहररसः | ४५४ |
| अरुचिस्तस्या निदानम् | ४३५ | सर्व्वलोकाश्रयरसः | ४५५ |
| अरुचेः सलक्षणभेदाः | ,, | अर्शोघ्नवटकम् | ४५६ |
| अरुचि-चिकित्सा | ,, | अर्शोघ्नी वटिका | ४५७ |
| यवानीखाण्डवचूर्णम् | ,, | मूलकुठाररसः | ४५८ |
| छर्द्दिरोगः | ४३६ | महोदयप्रत्ययसाररसः | ४६१ |
| वान्तिचिकित्सायां मातुलुङ्गादि योगः- | ४३७ | कनकसुन्दररसः | ४६२ |
| रजन्यादियोगः | ,, | भर्कैशः | ४६४ |
| सुगन्धालककयोगौ | ४३८ | तीक्ष्णमुखरसः | ४६६ |
| हृदयरोगः | ४३८ | अर्शःकुठाररसः | ४६७ |
| हृदयरोग-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यतिलकरसः | ४६८ |
| दशमूलादिक्वाथः | ,, | सामान्योपचाराः | ४७२ |
| ककुभाद्यं चूर्णम् | ,, | वचादिमोदकः | ,, |
| हृदयार्णवोरसः | ४४० | लौहादिचूर्णम् | ,, |
| नागार्जुनाभ्रम् | ,, | श्लेष्मार्शसि औषधविशेषनिर्देशः | ४७३ |
| पञ्चाननरसः | ४४१ | अर्शोहरयोगः | ,, |
| तृष्णारोगः | ,, | देवदाल्दादिलेपः | ,, |
| तृष्णाहररसः | ४४२ | अर्शःकुठारलेपः | ४७४ |
| मदात्ययरोगः | ,, | अर्शोघ्नशौचः | ,, |
| राजावर्त्तरसः | ४४४ | दुर्नामहरलेपः | ,, |
| द्वितीयराजावर्त्तरसः | ,, | अर्शोघ्नीवर्तिः | ,, |
| भैरवनाथी पञ्चामृतपर्पटी | ४४५ | अर्कक्षीरादिलेपः | ४७५ |
| पञ्चदशोऽध्यायः। | ४५० | शिग्रुमूलादिलेपः | ,, |
| अर्शः | ,, | षोडशोऽध्यायः। | ४७६ |
| पित्तार्शोलक्षणम् | ४५१ | उदावर्त्तः | ,, |
[ २० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उदावर्त्तहरघृतम् | ४७७ | सामान्योपायाः | ५०४ |
| अतिसारः | ४७९ | वह्यादिचूर्णम् | ,, |
| दर्दुररसः | ४८० | दग्धशम्बूकादियोगः | ,, |
| द्वितीयदर्दुररसः | ४८१ | अन्योपायः | ५०५ |
| आनन्दभैरवरसः | ,, | अजीर्णम् | ,, |
| सुधासाररसः | ४८२ | अजीर्णकण्टकरसः | ५०६ |
| रसोत्तमः | ४८४ | विध्वंसरसः | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रलक्षणम् | ४८५ | विसूचीविजयरसः | ५०७ |
| लोकेश्वररसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ,, |
| लोकनाथरसः | ४८६ | वडवाग्निरसः | ५०८ |
| नागसुन्दररसः | ,, | वैश्वानरपोटलीरसः | ५०९ |
| षणिष्कतैलम् | ४८८ | चराचरवटी लक्षणम् | ५१० |
| सङ्ग्रहणी | ४८६ | श्रेष्ठमध्यमाधमवराटिकायालक्षणम् | ५११ |
| वज्रकपाटरसः | ,, | पुंवराटलक्षणं तस्य दोषाश्च | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ४९० | वडवामुखी गुटी | ,, |
| कनकसुन्दररसः | ४९१ | क्रव्यादरसः | ५१२ |
| ग्रहणीहररसः | ४९२ | राजशेखरवटी | ५१४ |
| चण्डसङ्ग्रहगदैककपाटरसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ५१५ |
| लघुसिद्धाभ्रकरसः | ४९३ | अमृतवटी | ५१६ |
| सर्वरोगरसः | ४९४ | राक्षसनामारसः | ५१७ |
| ग्रहणीगजकेसरीरसः | ४९७ | जीवननामारसः | ५१८ |
| शीघ्रप्रभावरसः | ४९९ | वडवानलरसः | ५१९ |
| पोट्टलीरसः | ५०० | अग्निजननीवटी | ५२० |
| वह्निज्वालावटोरसः | ५०१ | सर्वरोगान्तका वटी | ,, |
| वज्रधररसः | ५०२ | सामान्योपायः | ५२१ |
| ग्रहणीकपाटरसः | ,, | सप्तदशोऽध्यायः । | |
| सौवर्चलादिचूर्णम् | ५०३ | मूत्रकृच्छ्राश्मर्यादिचिकित्सनम् | ५२३ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ५०४ |
[ २१ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाषाणभेदीरसः | ५२६ | सञ्जीवन रसः | ५५१ |
| द्वितीयपाषाणभेदीरसः | ५२७ | मेहमर्दनरसः | ५५२ |
| गोक्षुरादिचूर्णम् | ५२८ | रामबाणरसः | ५५३ |
| त्रिविक्रमरसः | ,, | राजमृगाङ्करसः | ५५५ |
| आनन्दभैरवी वटी | ५२९ | मेहहररसः | ५५७ |
| अश्मरीहरयोगः | , | उदयभास्कररसः | ५५८ |
| यवक्षारप्रयोगः | ५३० | हिमांशुरसः | ५६० |
| हरिद्राप्रयोगः | ,, | वसन्तकुसुमाकररसः | ५६१ |
| शिवोक्तयोगः | ,, | सर्वमेहान्तकरसः | ५६३ |
| लघुलोकेश्वररसः | , | मेहारिरसः | ,, |
| सामान्योपायः | ५३१ | मेहबद्धरसः | ५६६ |
| गोक्षुरप्रयोगः | ,, | हरिशङ्कररसः | ,, |
| पाण्डूरादियोगः | ,, | वङ्गेश्वरो रसः | ५६७ |
| शुक्लपिण्याकादियोगः | ५३२ | गुडमार्कण्डी | ,, |
| मूत्रकृच्छ्रान्तको रसः | ,, | ताम्रयोगः | ५६८ |
| विदार्यादिकषायः | ,, | रक्तमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| क्षारप्रयोगः | ५३३ | शुक्रमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| प्रमेहः | ,, | मधुमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| चन्द्रप्रभावटी | ५३९ | शाल्मलिप्रयोगः | ५६९ |
| प्रमेहगजसिंहरसः | ५४० | रक्तमेहे बोलबद्धरसोपदेशः | ,, |
| महाविद्यागुटी | ५४१ | श्लेष्मातकक्वाथः | ,, |
| मेहध्वान्तविवस्वान् रसः | ५४२ | कुष्माण्डस्वरसप्रयोगः | ,, |
| उमाशम्भुरसः | ५४४ | स्त्रीणांरक्तस्रावे तौवरयोगः | ५७० |
| रसेन्द्रनागरसः | ५४६ | मेहकुठारो रसः | ,, |
| अष्टादशोऽध्यायः । | |||
| मेहशत्रुरसः | ५४७ | विद्रधिः | ५७१ |
| कासीसबद्धरसः | ५४८ | सर्वेश्वरपोटलीरसः | ५७२ |
| भोमपराक्रमरसः | ५५० |
[ २२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सर्वामयहरो रसः | ५७५ | देवदार्वादिचूर्णम् | ५९३ |
| वरुणकषायः | ५७७ | देवदालीपञ्चाङ्गचूर्णम् | ,, |
| शोभाञ्जनादिक्वाथः | ,, | तक्रासवः | ,, |
| वृद्धिचिकित्सा | ५७८ | एरण्डक्षारम् | ५९४ |
| वातारिरसः | ,, | शरपुङ्खादियोगः | ५९५ |
| सामान्योपायः | ५७९ | वज्रक्षारप्रयोगः | ,, |
| दार्वीप्रयोगः | ,, | काञ्चनीप्रयोगः | ,, |
| वातारिरसस्य प्रयोगोपदेशः | ,, | प्लीहिरक्तमोक्षणोपदेशः | ,, |
| तैलाईर्द्रकप्रयोगः | ५८० | शूलचिकित्सा | ५९६ |
| आन्त्रवृद्धौ पानीयतैलम् | ,, | अग्निमुखरसः | ,, |
| आन्त्रवृद्धौ पानीयतैलान्तरघृतञ्च | ,, | त्रिनेत्ररसः | ५९८ |
| अन्त्रवृद्धौ मांसरसः | ५८१ | सौभाग्ययोगः | ५९९ |
| अन्त्रवृद्धौ द्वितीयमांसरसः | ,, | चिन्तामणिरसः | ,, |
| गुल्मः | ५८२ | शूलकेसरीरसः | ६०० |
| गन्धकादिपोट्टलीरसः | ,, | मृतोत्थापनरसः | ६०१ |
| गन्धकादिपोट्टल्याः प्रयोगान्तरम् | ५८३ | क्षारताम्ररसः | ६०३ |
| वज्रेश्वररसः | ५८४ | शूलान्तकरः | ६०४ |
| शिखिवाडवरसः | ५८५ | द्वितीयोऽग्निमुखरसः | ६०५ |
| दीप्तामररसः | ५८६ | द्वितीयत्रिनेत्ररसः | ६०६ |
| विद्याधररसः | ,, | उदयभास्कररसः | ६०७ |
| रक्तोदरकुठाररसः | ५८७ | शूलगजकेसरीरसः | ६०८ |
| वैश्वानररसः | ५८८ | द्वितीयक्षारताम्रम् | ६०९ |
| अग्निकुमाररसः | ५८९ | ताम्राष्टकम् | ६१० |
| सर्वाङ्गसुन्दररसः | ,, | वडवानलगुटिका | ,, |
| गुल्मनाशनरसः | ५९२ | अग्निकुमाररसः | ६११ |
| सामान्योपायः | ५९३ | शूलहरक्षारः | ६१३ |
| तिलकक्वाथः | ,, | क्षारवटी | ६१४ |
$$[ \text{ २३ } ]$$
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सामान्योपायः | ६१४ | वातोदरलक्षणम् | ६३२ |
| शम्बूकादिलौहम् | ,, | उदरघ्नरसः | ६३३ |
| अथेन्द्रवारुणिकादिचूर्णम् | ६१५ | विनोदविद्याधररसः | ,, |
| भूदार्वादियोगः | ,, | सुरेचनकररसः | ६३४ |
| सद्यःशूलहरोयोगः | ,, | मृत्युञ्जयरसः | ,, |
| सद्यःशूलहरयोगद्वयम् | ६१६ | उदरे विरेचनविधिः | ६३६ |
| कार्श्य-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यसुन्दररसः | ,, |
| अमृतार्णवरसः | ,, | महावह्निरसः | ६३७ |
| पूर्णचन्द्ररसः | ६१७ | गुडनागरप्रयोगः | ६३८ |
| स्थौल्यचिकित्सा | ६१८ | वैश्वानररसः | ,, |
| वडवाग्निमुखरसः | ,, | उदयमार्त्तण्डरसः | ६३९ |
| स्थौल्ये पूर्वकृत्यनिर्देशः | ,, | सूर्यप्रभागुटिका | ६४० |
| मध्वार्द्रकप्रयोगः | ,, | वज्रक्षारम् | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ,, | सामान्योपायाः | ६४२ |
| अम्लपित्त-चिकित्सा | ६२३ | खदिरादियोगः | ,, |
| तत्रादौ अम्लपित्तलक्षणम् | ,, | पिप्पलीप्रयोगः | ,, |
| लीलाविलासरसः | ,, | पाण्डुरोगः | ६४३ |
| ताम्रद्रुतिरसः | ६२५ | हंसमण्डूरः | ,, |
| कुष्माण्डखण्डलेहः | ६२७ | कालविध्वंसनरसः | ६४४ |
| सामान्योपायः | ६२८ | पञ्चाननरसः | ६४६ |
| वमनयोगः | ,, | आरोग्यसागररसः | ६४८ |
| विरेचनयोगः | ६२९ | पाण्डुपङ्कशोषणरसः | ६५० |
| पित्तरोग-चिकित्सा | ,, | पित्तपाण्ड्वरिरसः | ,, |
| पित्तान्तरसः | ,, | त्रैलोक्यसुन्दररसः | ६५१ |
| दशसारचूर्णम् | ६३० | त्रिनेत्राख्यरसप्रयोगः | ,, |
| एकोनविंशोऽध्यायः । | जयपालरसः | ,, | |
| उदरादिचिकित्सा | ६३१ | देवदालीचूर्णम् | ६५२ |
| जलोदरलक्षणम् | ,, |