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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

४७६ आनन्द मन्दिर


रोगो की परीक्षा करने से इस बात का मुझे अनुभव हुआ है
कि सभी स्त्रियां पति के दोषो के कारण वन्ध्या कही जाती हैं।

पुरुष के दोषों को कोई नहीं देखता न समझता है। पति
स्वयं पत्नी का ही दोष देकर एक दो से भी अधिक कई कई
विवाह करलेते हैं और फिर भी सन्तान नहीं होती। उनके घर
वाले भी स्त्री का ही दोष समझते हैं।

जितनी स्त्रिया मेरे पास वन्ध्या कही जाने वाली आईं उनको
देखने से सैकड़ा पीछे दो तीन ही ऐसी निकली जो वास्तव में
वन्ध्या थी जिनको आयुर्वेद में आदि वन्ध्या कहा है, जिनके
माता पिता के रज वीर्य के दोष मे गर्भाशय होता ही नही। इस
लिये उनके कभी गर्भ नही रहता। किसी किसी के योनि मार्ग
ही नही होता। पुरुषों की भांति स्त्रियां भी हिजड़ी होती हैं।

स्त्रियों के अंडकोष

पुरुषो की भांति स्त्रियों के भी अडकोष ( गिलटियां ) होते
हैं जिस पुरुष के अडकोष नही होते वह हिजड़ा होता है इसी
प्रकार स्त्रियां भी अडकोष न होने से हिजड़ी होती हैं।

किसी स्त्री के ऐसा भी होता हैं कि बाल्यावस्था से गर्भाशय
क्रमश. बढता जाता है परन्तु युवावस्था प्राप्त होने पर गर्भाशय
का बढ़ना किसी कारण से बन्द होजाता है अर्थात् सिकुड़
जाता है इसलिये ऐसी स्त्री को मासिकधर्म होना बन्द हो जाता
है इसलिये गर्भ नही रहता।

This page contains only illustrations (historical obstetrical/anatomical woodcuts of fetal positions and presentations) and contains no text to transcribe.

३६८ आनन्द मन्दिर
विपरीत आसन से गर्भाशय को हानि
विपरीत आसन से जो मूर्ख पुरुष रतिक्रिया करते हैं उनकी
स्त्रियों के गर्भाशय को बड़ी हानि पहुँचती है गर्भाशय के मुख को
हानि पहुँचने से पुरुष का वीर्य गर्भाशय में जा ही नहीं सकता और
जब गर्भाशय के भीतरी हिस्से में खराबी होजाती है तब प्रायः
गर्भस्राव व गर्भपात हो जाया करता हैं। इसलिये तरह तरह के
उलटे सीधे तिरछे आसनों से सम्भोग करना आयुर्वेद में हानिकारक
बतलाया गया है ।
गर्भाशय का आगे का हिस्सा
ऊपर वाला चित्र स्त्री के गर्भाशय के स्थान का आगे का हिस्सा
है। जब कभी गर्भवती स्त्री नितम्बों के बल किसी कारण से गिर

The provided image is completely blank and contains no text to transcribe.

बुढ़ापा । पृ० ५०० ( सर्वाधिकार सुरक्षित )

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४७७


वाल्यावस्था में विवाह होने से पति के घर जाते ही मासिक-
धर्म होना और ऋतु के दिनों में प्रसग होने से गर्भाशय पर
दवाव पड़ने के कारण गर्भाशय खराव होजाता है इसलिये
मासिकधर्म भी ठीक नहीं होता और स्त्री वन्ध्या होजाती है ।

बन्ध्या स्त्रियों का शर्त्तिया इलाज

आदि वन्ध्या को छोड़कर जिसके गर्भाशय होता ही नहीं
वाकी सव प्रकार की खरावियों वाली वन्ध्या स्त्रियां मेरे देशी
इलाज से आराम होगई हैं और हजारों सन्तान हीन स्त्रियां
सन्तानवती होगई हैं इसलिये,—

सन्तानहीन स्त्रियां निराश न हों

किसी स्त्री के किसी कारण से भी सन्तान न होती हो
अथवा गर्भ कभी रहा ही न हो या एक ही वालक होकर फिर
गर्भ धारण न हुआ हो, कुछ भी शिकायत हो तो इलाहावाद
लाकर मुझे दिखलावें । आदि वन्ध्या को छोड़कर वाकी सव
वन्ध्याओं का इलाज कर दिया जायगा सन्तान होने लगेगी ।

पुरुष रोगियों को सूचना

किसी स्त्री का पति शीघ्रपात, सुस्ती, निर्वलता, शिथिलता,
वीर्य विकार, प्रमेह, नसों की कमजोरी, स्वप्नदोष और नपुंसकता
आदि किसी भी रोग का रोगी हो तो एकवार अपना पूरा हाल
लिखकर भेजे उसका रोग दूर कर दिया जावेगा । २५ पचीस

४७८ आनन्द मन्दिर
वर्षों में लाखों पुरुषो का इलाज उनकी स्त्रियो द्वारा करके आराम
कर दिया गया है।
सब प्रकार की चिट्ठियां गुप्त रक्खी जाती हैं इसलिये संकोच
न कर रोग का पूरा हाल लिखकर फायदा उठाइये।
मूढ़ गर्भोँ की उत्पत्ति
विपरीत आसन से रतिक्रिया करने से गर्भाशय को हानि
पहुँच कर तथा गर्भवती स्त्री से रतिक्रिया करने से गर्भ को हानि
पहुँच कर मूढ़ गर्भोँ की उत्पत्ति होती है। मूट गर्भोँ के कुछ
चित्र दो बच्चे होने के चित्रों के साथ बतलाए गये हैं। यहां पर
नीचे दिए गए चित्रों से पाठक पाठिकाओं की यह भलीभांति समझ
में आजावेगा कि गर्भवती से रतिक्रिया करने से गर्भ की स्थिति
अनेक प्रकार की होजाती है जिसके कारण गर्भ और गर्भवती
दोनों के प्राणान्त तक का समय आजाता है।

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४७६
गर्भों की स्थिति

४८० आनन्द मन्दिर
गर्भौँ की स्थिति

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८१
मूढ़ गर्भों की उत्पत्ति चित्र नं० १
३१

४८२ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० २

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८३
चित्र नं० ३

४८४ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ४

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८५
चित्र नं० ५

४८६ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ६

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८७
चित्र
नं०
७

४८८ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ८

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८६
चित्र नं० ९

४६० आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १०
कभी कभी अनियम आहार विहार के कारण तथा रति
क्रिया से गर्भ का बालक योनिमार्ग में आकर अटक जाता है।
इसलिये प्रसव के समय बड़ा कष्ट होता है।

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६१
चित्र नं० ११
गर्भवती के कुपथ्य तथा गर्मी अवस्था मे रतिक्रिया होने के
कारण गर्भ उलट जाता है और प्रसव के समय प्रसव होना
कठिन होजाता है तब काटकर निकाला जाता है इससे जच्चा
और बच्चा दोनो का कभी २ प्राणान्त तक होजाता है ।