विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४७६ आनन्द मन्दिर
रोगो की परीक्षा करने से इस बात का मुझे अनुभव हुआ है
कि सभी स्त्रियां पति के दोषो के कारण वन्ध्या कही जाती हैं।
पुरुष के दोषों को कोई नहीं देखता न समझता है। पति
स्वयं पत्नी का ही दोष देकर एक दो से भी अधिक कई कई
विवाह करलेते हैं और फिर भी सन्तान नहीं होती। उनके घर
वाले भी स्त्री का ही दोष समझते हैं।
जितनी स्त्रिया मेरे पास वन्ध्या कही जाने वाली आईं उनको
देखने से सैकड़ा पीछे दो तीन ही ऐसी निकली जो वास्तव में
वन्ध्या थी जिनको आयुर्वेद में आदि वन्ध्या कहा है, जिनके
माता पिता के रज वीर्य के दोष मे गर्भाशय होता ही नही। इस
लिये उनके कभी गर्भ नही रहता। किसी किसी के योनि मार्ग
ही नही होता। पुरुषों की भांति स्त्रियां भी हिजड़ी होती हैं।
स्त्रियों के अंडकोष
पुरुषो की भांति स्त्रियों के भी अडकोष ( गिलटियां ) होते
हैं जिस पुरुष के अडकोष नही होते वह हिजड़ा होता है इसी
प्रकार स्त्रियां भी अडकोष न होने से हिजड़ी होती हैं।
किसी स्त्री के ऐसा भी होता हैं कि बाल्यावस्था से गर्भाशय
क्रमश. बढता जाता है परन्तु युवावस्था प्राप्त होने पर गर्भाशय
का बढ़ना किसी कारण से बन्द होजाता है अर्थात् सिकुड़
जाता है इसलिये ऐसी स्त्री को मासिकधर्म होना बन्द हो जाता
है इसलिये गर्भ नही रहता।